चंडीगढ़। पंजाब में एक दूसरे की विरोधी पार्टियां पंजाब यूनिवर्सिटी में सेनेट और एफिडेविट के मुद्दे पर एकजुट हो गई है। सभी की तरफ से अलग अलग तौर पर भारतीय जनता पार्टी और पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर रेनू विज स्टूडेंट्स एसोसिएशन समेत राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर हैं। एफिडेविट के मुद्दे पर पहले से स्टूडेंट्स की तरफ से शुरू किए गए प्रदर्शन को सेनेट और सिंडिकेट भंग करने के नोटीफिकेशन ने और बल दिया है। सेनेट और सिंडिकेट मुद्दे पर राजनीतिक दलों का स्टूडेंटस को पूरा समर्थन भी मिला हुआ है। पंजाब यूनिवर्सिटी की तरफ से इसी वर्ष ही दाखिला लेने वाले छात्रों को एफिडेविट देने के लिए कहा था। जिस पर विवाद शुरू हुआ तो अब पंजाब यूनिवर्सिटी प्रबंधन बैकफुट पर आ गया है। बताया जा रहा है कि एफिडेविट देने के आदेश को प्रबंधन वापिस लेने को तैयार नहीं है, मगर इसकी शर्तों में बदलाव के लिए सहमत हो गया है। स्टूडेंट इसे पूरी तरह से रद्द करने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। आने वाले एक या दो दिन में इस पर सहमती बन सकती है। मरनव्रत पर बैठे स्टूडेंट नेता को मिलने आ रहे पंजाब हरियाणा के नेता यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्ट्डीज विभाग के स्टूडेंट अभिषेक डागर पिछले चार दिन से मरण व्रत पर बैठे हुए हैं। वहीं, “स्टूडेंट्स सेव सीनेट” व “सेव पीयू” भी लिखा हुआ है। उन्हें मिलने के लिए अब तक पंजाब एवं हरियाणा के कई नेता पहुंच चुके हैं। जिनमें सांसद मुनीष तिवाडी, मालविंदर सिंह कंग, सरबजीत सिंह खालसा और दुपिंदर हुड्डा के अलावा नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा समेत कई नेता पहुंच चुके हैं। पुलिस पर भी दबाव है कि इस मरण व्रत को जल्दी से जल्दी हटावाया जाए। जिसे लेकर रविवार देर रात और सोमवार की बाद दोपहर दो बार झगड़े हो चुके हैं।
हमारा पहला उदेश्य आप तक सबसे पहले और सही खबर पहुंचाना। हमारे आसपास क्या हो रहा है, इसके बारे में आपकी नॉलेज को दुरुस्त करना। वहीं समाज की बुराईयों व गलत गतिविधियों संबंधी आगाह करना भी हमारे लक्ष्य में हैं।
Yashpal Sharma (Editor)