पंजाब। 3 साल की मेहनत, जिंदगी भर की कमाई और सपनों का 2 मंजिला आशियाना, सब कुछ तैयार था, बस रंग-रोगन बाकी था। तभी एक नोटिस ने पंजाब के बरनाला के किसान के पैरों तले से जमीन खिसका दी। उसे बताया गया कि उसकी आलीशान कोठी अब भारतमाला प्रोजेक्ट के रास्ते में आ चुकी थी। लुधियाना से बठिंडा के लिए बन रहे हाईवे के रास्ते से इसे हटाना होगा। यह बात सुनते ही वह टेंशन में आ गया। 2 महीने परिवार परेशान रहा। कई लोगों से सलाह ली लेकिन मेहनत से बनाई कोठी को कैसे टूटने दें, हर वक्त यहीं चिंता खाती रहती। किसान के सामने दो ही रास्ते थे- या तो सपना तोड़ दिया जाए, या फिर नामुमकिन को मुमकिन बनाया जाए। किसान ने दूसरा रास्ता चुना। 60 लाख से बनी कोठी को अब किसान मशीनों के जरिए 350 फुट आगे खिसका रहा है। इसके लिए हरियाणा के ठेकेदार की मदद ली है। करीब 2 महीने से कोठी को खिसकाने का काम चल रहा है और इसमें 3 महीने और लगेंगे। इसमें 10 लाख 60 हजार का खर्च आएगा।
2017 में शुरुआत की, 2020 में बनकर तैयार हुई 2 मंजिला कोठी
कोठी के मालिक सुखप्रीत सिंह बताते हैं कि 2017 में उन्होंने 2 मंजिला कोठी बनानी शुरू की। 2020 में कोठी बनकर तैयार हो गई। यह कोठी 2500 स्क्वायर फीट में बनी थी। इस कोठी पर उनका करीब 60 लाख रुपए खर्च हुए थे। कोठी का काम पूरा होने के बाद पूरा परिवार खुश था। पेंट की तैयारी चल रही थी। सुखप्रीत ने बताया कि साल 2021 में लुधियाना-बठिंडा हाईवे रोड के लिए सर्वे हुआ। यह रोड केंद्र सरकार के भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रही थी। सर्वे के दौरान उनकी नई कोठी भी रोड के हिस्से में आ गई। पैसे जोड़-जोड़कर कोठी बनाई थी। उन्हें कहा गया कि उनकी कोठी को वहां से हटाना पड़ेगा। वह मुआवजा लेकर कोठी को खाली कर दें। सुखप्रीत ने कहा कि उन्हें सिर्फ 60 लाख रुपए का मुआवजा मिल रहा था। जिसमें कोठी और जिस जमीन पर ये बनी थी, दोनों सरकार प्रोजेक्ट के लिए ले रही थी। ये करीब कोठी से दोगुनी जगह थी। मुआवजा इतना पर्याप्त नहीं था कि वह दूसरी जगह ऐसी कोठी बना सकें। इस वजह से उन्हें काफी चिंता हो गई और उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।
परिवार का कोठी का सपना था, दोगुना पैसा लगाया
सुखप्रीत कहते हैं- मेरे पिता 7 भाई हैं। पहले वे एक छोटे से घर में रहते थे। नई कोठी बनाना सबका बड़ा सपना था। ये सपना भी पूरा हुआ लेकिन उसमें रहते, उससे पहले ही गिराने की नौबत आ गई। लोग उन्हें कहते थे कि 25–30 लाख रुपए में नई कोठी बन जाएगी। मगर, मैं उन्हें कहता कि इस कोठी पर मैंने इससे दोगुना पैसा लगा दिया। सुखप्रीत ने बताया कि इसके बाद मैंने फैसला कर लिया कि मैं कोठी नहीं हटाऊंगा। 2 साल तक वह सरकार को इनकार करते रहे। प्रशासन की तरफ से उन्हें कहा गया कि सरकार से मुआवजा लो और कोठी तोड़ दो या खाली कर दो। मगर, वह नहीं माना। दिन का चैन और रातों की नींद उड़ गई थी। हर वक्त मन में यही बात चलती थी कि किस तरह से कोठी को बचाऊं।
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Yashpal Sharma (Editor)