चंडीगढ़। पंजाब कैबिनेट की मीटिंग में आज छह जिलों के रिजर्वेशन रोस्टर के बदलाव को मंजूरी दी गई है। मोहाली, पटियाला, फाजिल्का फिरोजपुर, मलेरकोटला और संगरूर शामिल है। क्योंकि इन जिलों की सीमाओं में बदलाव किया था। वहीं, जिन इलाकों में बाढ़ आई थी। उसमें सतलुज और घग्गर नदी के साथ लगती जमीन पर किसानों को डिसिल्टिंग की मंजूरी दी गई है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कैबिनेट मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। वहीं, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू करने संबंधी पूछे सवाल पर कहा कि जो भी आरोपी है उसे सजा मिलेगी। वहीं, राघव चड्ढा के सवाल पर कहा कि जो पीठ दिखाकर भागते हैं, उन्हें लोग पसंद नहीं करते हैं। हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि कई अहम फैसले लिए गए हैं। द पंजाब पंचायती राज अधिनियम 1994 में जो नियम बने थे, उनमें संशोधन किया गया। जब पंचायत समिति व जिला परिषद बनी थी। उस समय तय किया था जब किसी जिले या तहसील या ब्लॉक सीमा घटेगी या बढ़ेगी तो उस समय रिजर्वेशन की तबदीली की जा सकती है। जो एक्ट में मंजूर है। छह जिलों की सीमा बदली है। इनमें मोहाली, पटियाला, फाजिल्का फिरोजपुर, मलेरकोटला और संगरूर शामिल है। इसे धारा छह के अधीन मंजूरी है। 10 प्रतिशत से अधिक बदलाव आया है तो उसमें रिर्वेशन का रोस्टर बदला जाएगा। कोई व्यक्ति इसके खिलाफ एतराज देना चाहता है तो 10 दिन में दे सकता है। जिला परिषद मेंबर व पंचायत समिति के चेयरमैन चुने गए है। ऐसे में रोस्टर निर्धारित करना जरूरी थी। रोटेशन व रिजर्वेशन हुई है।
नौ जगह डिसिल्टिंग की मंजूरी
चीमा ने कहा कि पंजाब में बाढ़ आई तो काफी नुकसान हुआ। केंद्रीय मंत्री उस समय आए और एन्जॉय करके चले गए। लेकिन सरकार ने उन स्थानों की पहचान की है, जहां बाढ़ आती है। हरशा बेला रोपड़, मंडाला ताजोबाल, बाढ़ाकाली राउन, रुकनेवाला, खैहराबाल और डेराबस्सी में ऐसे स्थान है। इन इलाकों में सतलुज और घग्गर नदी बहती है। यहां पर डिसिल्टिंग करने की जरूरत है। जिन भी किसान की जमीन आती है, वह अपने स्तर पर पर डिसिल्टिंग कर पाएंगे। इसकी मंजूरी किसानों को लेनी पड़ेगी।
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Yashpal Sharma (Editor)