September 11, 2026 04:20:15
विजिलेंस ऑफिस में सीबीआई रेड में खुलासा, डीजी का करीबी बताकर डील करते थे बिचौलिए, Cbi की Fir आई सामन

विजिलेंस ऑफिस में सीबीआई रेड में खुलासा, डीजी का करीबी बताकर डील करते थे बिचौलिए, Cbi की Fir आई सामने, अधिकारी से 20 लाख और मोबाइल मांगा; रीडर फरार

May15,2026 | Enews Team | Punjab

चंडीगढ़। पंजाब विजिलेंस रिश्वतकांड में पहली बार CBI की FIR सामने आई है। FIR में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार बाप-बेटे राघव गोयल और विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल खुद को पंजाब विजिलेंस के डीजी शरद सत्य चौहान और उनके रीडर ओपी राणा का करीबी बताकर डील करते थे। आरोप है कि उन्होंने स्टेट टैक्स ऑफिसर अमित से विजिलेंस में लंबित शिकायत को बंद करवाने के बदले 13 लाख रुपए और एक महंगा मोबाइल फोन मांगा था। CBI ने चार लोगों पर केस दर्ज किया। इनमें पंजाब विजिलेंस के डीजी का रीडर ओपी राणा, विक्की गोयल, राघव गोयल और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल है। जांच में सामने आया है कि के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (डीए केस) की फर्जी शिकायत रीडर ने बिचौलियों के साथ मिलकर रची थी। शिकायत को असली दिखाने के लिए 29 अप्रैल को बिचौलिया बाप-बेटा अमित को विजिलेंस हेडक्वार्टर में लेकर गए व डीजी के ऑफिस में उसके डीए केस की गोपनीय जांच रिपोर्ट दिखाई। तीन दिन के रिमांड के बाद बाप-बेटे को आज (15 मई को ) CBI की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक विरासत में भेज दिया गया है। जबकि ओपी राणा अब भी फरार है।

    स्टेट टैक्स ऑफिसर की शिकायत: विजिलेंस के खिलाफ शिकायत 8 मई को अमित कुमार निवासी अबोहर, फाजिल्का ने दी थी, जो स्टेट टैक्स ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव गोयल और उसके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल ठेकेदार हैं। दोनों डीजी विजिलेंस शरद सत्य चौहान और उनके रीडर ओपी राणा की ओर से बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे। आरोपियों ने विजिलेंस मुख्यालय में उसके खिलाफ लंबित शिकायत बताकर उसके निपटारे के लिए रिश्वत मांगी। जैसे ही यह शिकायत मिली, उसके बाद सीबीआई ने एक्शन शुरू किया।

    13 लाख रुपए की रिश्वत मांगी: जैसे ही सीबीआई को अमित कुमार की शिकायत मिली, इसकी जांच और वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी सीबीआई एसीबी चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर अरुण अहलावत को सौंपी गई। वेरिफिकेशन के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी राघव गोयल और विकास गोयल ने शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।

    कैश के साथ मोबाइल भी मांगा: जांच में यह भी पता चला कि नकद रकम के अलावा आरोपी ओपी राणा के लिए एक मोबाइल फोन की मांग भी की थी। रकम ओपी राणा और डीजी (विजिलेंस) के नाम पर मांगी जा रही थी। 11 मई 2026 की वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने माना कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व 7A के तहत अपराध बनता है। इसके बाद औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई।

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