यशपाल शर्मा, लुधियाना। लुधियाना में एक दर्जन से अधिक जगहों पर दशहरा मेला आरंभ हो चुका है और मेलों के आरंभ होते ही इनमें जीएसटी की लाखों करोड़ों की चोरी भी शुरू हो गई है। है। मेले के नाम पर लाखों करोड़ों की इस कालाबाजारी में जीएसटी विभाग के साथ-साथ नगर निगम कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर के आदेश भी नतमस्तक होते दिखाई दे रहे हैं। जहां मेला साइट के आसपास की सरकारी सड़कों पर अवैध रेडी पड़ी लगाकर उनसे 20 से ₹40 हजार तक की प्रतिदिन उगाही की जा रही है और इसी तरह से रोजाना मेल चलाने में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को भी फॉलो नहीं किया जा रहा, जिसमें पुलिस कमिश्नर के आदेशों तक का उल्लंघन किया जा रहा है। इतना सब कुछ देखने के बाद यह कहना गलत नहीं होगा की झूला ठेकेदार की जेब में सरकारी अफसर गिर चुके है। टैक्स की बड़ी चोरी मेले में एंट्री फीस, पार्किंग फीस और झूले की टिकट की बिक्री में हो रही है । नियमों के तहत झूला ठेकेदार को एडवांस जीएसटी भरना होता है, जो नहीं भरा जा रहा। सरकारी विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी भी है, लेकिन इसके बावजूद में मौन होकर अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं। लुधियाना में इस समय लगभग एक दर्जन से अधिक साइट पर दशहरा मेले का आयोजन किया जा रहा है। जिनमें दरेसी, दुर्गा माता मंदिर के सामने गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन साइट, चंडीगढ़ रोड वर्धमान स्पिनिंग मिल्स के आमने सामने और दुगरी में बड़े दशहरा मेले का आयोजन किया जा रहा है । इन मेलों में छोटे से बड़े झूले चलाए जा रहे हैं। आयोजकों की ओर से इन झूलों के एवज में पब्लिक से फीस वसूली जाती है और यह हर साल से होता चला आ रहा है । नियमों के झूला ठेकेदार को इसके लिए एडवांस जीएसटी भरना होता है जो नहीं भरा जा रहा । वही दशहरा मेला कमेटियों और आयोजकों की ओर से अपने अपने झूलों की रेट लिस्ट तक जीएसटी विभाग को व जिला प्रशासन को देनी होती है, जो नहीं दी जा रही। इतना ही नहीं दशहरा कमेटी या और झूला ठेकेदारों की ओर से मनमर्जी मुताबिक रेट बढ़ाई जा रहे हैं। फायर सेफ्टी के प्रबंध भी जीरो शहर की सभी साइट्स पर फायर सेफ्टी के इंतजाम भी लगभग जीरो है । नियमों के तहत फायर सेफ्टी के लिए फायर ब्रिगेड से एनओसी लेने का प्रावधान है। एनओसी लेने के बाद झूला प्रबंधकों को साइट पर आगजनी से बचने को तमाम प्रबंध करने होते हैं। जिसमें फायर ब्रिगेड तक तक का मौके पर मौजूद होना जरूरी है जो किसी भी साइट पर नहीं किया जा रहा। पुलिस कमिश्नर के आदेशों की भी नहीं परवाह पुलिस कमिश्नर की ओर से दशहरा कमेटी और झूला प्रबंधकों को रात 11:00 तक मेला चलाने और झूले चलाने संबंधी निर्देश दिए गए हैं । लेकिन इसके बावजूद पुलिस कमिश्नर के आदेशों की भी झूला ठेकेदारों और दशहरा कमेटियों की ओर से परवाह नहीं की जा रही और रात 12 बजे से लेकर रात 12:30 बजे के बाद तक मेला चलाया जा रहा है।b शहर की विभिन्न मेल साइट में क्या-क्या कमियां है, इसका खुलासा अब ई न्यूज पंजाब वेब चैनल की ओर से किया जाएगा प्रशासनिक विफलता के मुख्य बिंदु। मेले के दौरान सड़क के किनारे अवैध दुकानें लगाकर उनकी रोजाना उगाही। एंट्री फीस, पार्किंग, झूले आदि से हुई आमदनी का टैक्स न भरना। ठेकेदार द्वारा एडवांस जीएसटी जमा न करवाना। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और पुलिस कमिश्नर के आदेशों का उल्लंघन। नगर निगम और पुलिस प्रशासन की अनदेखी या मिलीभगत
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Yashpal Sharma (Editor)