यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना में दशहरा पर मेलों का सीजन आरंभ हो चुका है, लुधियाना में करीब एक दर्जन बड़े मेलों के अलावा कल 50 के करीब छोटे बड़े मेले शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए हैं । भले ही यह मेले 15 से 20 दिनों के लिए है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इन 15 से 20 दिनों में ही झूला ठेकेदार कमाई करोड़ों में कर जाते है। इस बार लुधियाना में भोला शंकर एंड कंपनी की ओर से सबसे अधिक मेलो पर कब्जा किया गया है। जिसमें छोटे से बड़े विभागीय अफसर से सेटिंग और एक आप नेता का आशीर्वाद इसमें बताया जा रहा है। यही कारण है कि करोड़ों की कमाई में लाखों की टैक्स चोरी भी धड़ल्ले से की जा रही है और एडवांस टैक्स के नाम पर चंद रुपए जमा कर सरकारी खजाने का मुंह बंद कर दिया गया है। विभागीय सेटिंग के चलते जीएसटी विभाग के अफसर साइट पर ठेकेदार कमाई का आकलन तक नहीं करने जाते । लुधियाना की दुर्गा माता मंदिर के सामने गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स की साइट पर भी भोला शंकर एंड कंपनी की ओर से ठेका चलाया जा रहा है। इस मेला साइट में एंट्री करते ही टैक्स चोरी का खेल शुरू हो जाता है। जहां मेले में झूले के चार्ज अलग है तो वही इस साइट पर एंट्री के नाम पर रोजाना लाखों रुपए की कमाई की जाती है और इसके बाद पार्किंग की फीस चुकाने के बाद ही आपकी मेले में एंट्री हो पाती है। लेकिन आपको हैरानी होगी कि मेले में एंट्री से पहले ही ठेकेदार रोजाना का 10 लाख रुपया इकट्ठा कर जाता है, लेकिन जीएसटी विभाग के अफसर के आशीर्वाद से उन्हें सरकारी खजाने में ठगी की मंजूरी दे दी जाती है। बड़ी बात है कि जीएसटी के अफसर यह तक नहीं देखने जाते की ठेका कंपनी की ओर से आम पब्लिक पर झूलों की टिकट के अलावा क्या क्या चार्ज पब्लिक से हो रहा है। ठेकेदार की कमाई का आप अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि साइट पर लगने वाली खाने पीने की रेहड़ी फड़ी व काउंटर से रोजाना का 3 लाख से अधिक रुपए इकठ्ठा किए जाता हैं, लेकिन यहां लगने वाले रहड़ी फूड से सेफ्टी की बात की जाए तो यह जीरो रहती है।
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बताया जाता है कि इस बार उक्त कंपनी को शहर में अधिकतर ठेके मिलने के पीछे एक नेता का भी हाथ रहा, जिसके चलते उक्त कंपनी अधिक से अधिक ठेके लेने में कामयाब रही। उक्त ठेका कंपनी का हिसाब किताब व लेनदेन इतना साफ है कि संबंधित अफसरों को घर बैठे ही उनका हिस्सा मिल जाता है और यही कारण है कि अधिकतर विभागीय अफसर भी उक्त ठेका कंपनी के फेवर में रहते हैं। मेला मात्र 20 25 दिनों का रहता है, इसलिए अफसर भी अधिक तोल मोल न कर अपनी सेटिंग बिठा लेते हैं।