यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच आजकल सुर्खियों में है। लुधियाना सेंट्रल हलके में विधायक के चहेते बिल्डिंग इंस्पेक्टर की ओर से दर्जनों इलीगल बिल्डिंग बनवा डाली गई है। यह बिल्डिंग इंस्पेक्टर हरविंदर मक्कड़ और इनके पास नगर निगम ए जोन में पड़ते सेंट्रल हल्के के ब्लाकों की कमान हैं। इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर को इसलिए सेंट्रल हलका विधायक अशोक पराशर पप्पी का नजदीकी कहा जाता हैं क्योंकि इनका लुधियाना से पिछले 6 महीने में दो बार तबादला हुआ है, लेकिन हर बार अपनी नजदीकी के चलते फिर से लुधियाना वापिस लौट आया। वापसी के बाद फिर से जोन ए के तहत आते हल्का सेंट्रल के ब्लॉकों की कमान संभाल लेता है। हालात ऐसे हैं कि हल्के में कोई भी कमर्शियल बिल्डिंग बन रही हो तो यह इंस्पेक्टर आम आदमी पार्टी के विधायक का नाम इससे जोड़ने में कोई गुरेज नहीं करता और यही कारण है कि उक्त बिल्डिंग इंस्पेक्टर की हर कोताही पर आला अफसर आंखें मूंदते चले जा रहे हैं। इसका नतीजा है कि हल्का सेंट्रल में दर्जनों इलीगल बिल्डिंग के बन रही है और वहीं दूसरी ओर खुद विधायक अशोक पाराशर पप्पी और शहर के डिप्टी मेयर राकेश पाराशर बीते दिनों इन इल्लीगल बिल्डिंग्स पर कार्रवाई करने की बजाय रेहड़ी फड़ी वालों पर डंडा चलाते देखे गए हैं । हल्का सेंट्रल में ताजा इलीगल बिल्डिंग का मामला इस्लामिया स्कूल के नजदीक तीन दुकानों के अवैध निर्माण से जुड़ा है, जहां हाउस लेन पूरी कवर कर ली गई है। वहीं ख्वाजा कोठी चौक में पांच मंजिला कमर्शियल इमारत पिछले कुछ महीनों से सरेआम धड़ल्ले से बनाई जा रही हैं और इसके आगे भी कोई फ्रंट लेन तक नहीं छोड़ी गई। जिस लिहाज से ये कार्मशियल बिल्डिंग बन रही है, उससे लगता है कि यहां पर बड़ा होटल खोलने की तैंयारी की जा रही है। वहीं बाबा थान सिंह चौक में करीब 1100 गज में बनी तीन इलीगल दुकानों का निर्माण जारी है। ऐसे में एक बात साफ है कि इन बड़ी बड़ी बिल्डिंगों में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं रखी गई और इन के बाहर सड़कों पर होने वाली पार्किंग से यहां पर जाम लगना तय हैं। इसके साथ-साथ मालीगंज चौक में भी इलीगल ढंग से दुकान बनवाने का काम जारी है । बड़ी बात है कि इन इंस्पेक्टर साहब की ओर से खुद ही बिल्डिंग की शिकायत डाल कर मोटी रिश्वत वसूली में कोई परवाह नहीं की जाती।
बिल्डिंग इंस्पेक्टर के खिलाफ दर्जनों शिकायतें
बिल्डिंग इंस्पेक्टर के खिलाफ दर्जनों शिकायतें होने के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। इन शिकायतों के चलते ही कि पंजाब सरकार की ओर से उक्त इंस्पेक्टर की दो बार लुधियाना से ट्रांसफर तो की जाती है लेकिन फिर से नेताओं की सिफारिश पर उसकी वापसी हो जाती है।
मोटी रिश्वत उगाही को बिठाए अपने शिकायतकर्ता
इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर की चालाकी और बहादुरी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि दुकानदारों व बिल्डिंग मालिकों से मोटी रिश्वत उगाही को उक्त बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने अपने नजदीकी ही शिकायतकर्ता के तौर पर सेट कर रखे हैं। इतना ही नहीं कई बार तो यह बिल्डिंग इंस्पेक्टर साहब खुद ही चिट्ठी लिख नगर निगम कमिश्नर व आला अफसरों के नाम की शिकायत डाल देते हैं। इसके बाद सेटिंग का पूरा खेल शुरू होता है । ये सेटिंग का खेल तीन लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक में निपटाया जाता है। इस सेटिंग के बाद ही बिल्डिंग निर्माण को हरी झंडी दी जाती है । यह सेटिंग का खेल भी शिकायतकर्ता और प्रॉपर्टी मालिक को एक साथ बिठाकर रेस्टोरेंट में चाय कॉफी पीने के बहाने बुलाकर किया जाता है। यह सेटिंग का खेल सराफा बाजार मालीगंज बाजार, थापरा मोहल्ला सहित कई तंग गालियों वाले बाजारों में धड़ल्ले से जारी है।
पहले डेमोलिशन, फिर सीलिंग और बाद में बनवा डाली बेसमेंट सहित पांच मंजिला बिल्डिंग
इन बिल्डिंग इंस्पेक्टर की अगर बात शुरू की जाए तो इनके किस्से जानकर आप हैरान हो जाएंगे । न्यू माधोपुरी बुड्ढा नाला रोड ब्लॉक 24 में करीब 8 महीने पहले एक बिल्डिंग निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। इस बिल्डिंग के प्लाट में अवैध कब्जे और बेसमेंट निर्माण की शिकायतों के चलते इन्हीं बिल्डिंग इंस्पेक्टर साहब ने पहले इस बिल्डिंग की डिमोलिशन की गई और बाद में इसे सील तक किया। इसी बिल्डिंग निर्माण को लेकर एक समाजसेवी की ओर से भी नगर निगम जोन बी ऑफिस पहुंचकर इंस्पेक्टर हरविंदर मक्कड़ के खिलाफ मोर्चा खोला गया था। जैसे ही यह मामला ठंडा हुआ इन इंस्पेक्टर साहब ने सेटिंग कर सील व डिमोलिशन की गई बिल्डिंग को बेसमेंट सहित पांच मंजिला बनवा डाला । बड़ी बात है कि सेटिंग के बाद नगर निगम को अब इस बिल्डिंग में ना तो कहीं अवैध कब्जा दिखाई दे रहा है और ना ही बिल्डिंग बाय लॉज की उल्लंघना दिखाई देती है।
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वहीं इस बारे में जब एमटीपी रणजीत सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस बारे में उनके पास कुछ शिकायतें आई हैं, लेकिन अभी उन्हें पूरी जानकारी नहीं हैं। लेकिन इस संबंधी संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर से रिपोर्ट मांगी जाएगी और बनती कार्रवाई की जाएगी।
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Yashpal Sharma (Editor)