पंजाब। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के तुरंत बाद मजीठिया ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल कर दी है। मजीठिया के वकील अर्शदीप सिंह कलेर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें न्याय मिलेगा। इससे पहले हाईकोर्ट के करीब 20 पन्नों के आदेश में जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कहा था कि आर्थिक अपराध सामान्य अपराधों से अलग श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों में गहरी साजिश और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका होती है, इसलिए जमानत पर विचार करते समय अदालतों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इससे पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में मजीठिया की नियमित जमानत याचिका 5 दिसंबर को खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए वित्तीय लेनदेन, कंपनियों का जटिल जाल और विदेशी स्रोतों से आई संदिग्ध रकम गंभीर आर्थिक अपराधों की ओर इशारा करती हैं।
कोर्ट ने जांच एजेंसी को निर्देश दिए कि तीन माह के भीतर जांच पूरी की जाए। साथ ही यह भी कहा कि यदि तय समय में जांच पूरी नहीं होती है, तो याची नई जमानत याचिका दायर कर सकता है।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मजीठिया की राजनीतिक हैसियत और प्रभाव को देखते हुए इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या जांच को बाधित कर सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया। वहीं मजीठिया की ओर से यह दलील दी गई थी कि यह मामला केवल एनडीपीएस केस के पुराने आरोपों को दोहराने जैसा है और यह सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एनडीपीएस मामले की जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों और बड़ी साजिश के संकेतों के आधार पर दूसरी एफआईआर दर्ज करना कानूनन सही है।
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Yashpal Sharma (Editor)