यशपाल शर्मा, लुधियाना
नगर निगम और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में अफसरों व ठेकेदारों के बीच के नैक्सेस को लुधियाना वेस्ट हलके से विधायक बन लोकल बॉडी मंत्री बने संजीव अरोड़ा कैसे तोड़ पाएंगे, ये बड़ी चर्चा में हैं। आपको बता दें नगर निगम हो या लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट हों, यहां पर काम केवल अफसरों से सेटिंग करके चलने ठेकेदारों को ही मिल पाते हैं और नया ठेकेदार इस सेटिंग के खेल को समझ ही नहीं पाता। अपने चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए अफसर अपने स्तर पर ऐसी शर्तें टेंडर में डाल देते हैं, जिसमें अधिकतर ठेकेदार क्वालिफाई हीं नहीं कर पाते। मेयर कैंप आफिस में आज एफएंडसीसी की बैठक थी और इसमें कईं करोड़ के ऐसे टेंडरों को हरी झंडी दी गई, जिनमें मात्र एक से दो फीसदी तक का लैस डाला गया था। लेकिन इसके पीछे की हकीकत ये है कि ये सभी टेंडर एक नैक्सेस के जरिए पूल कर डाले गए हैं। उम्मीद ये रहती है कि कम लैस में डेवलपमेंट वर्क की क्वालिटी बढ़िया आएगी, लेकिन हकीकत ये है कि ये लैस अफसरों के साथ सेटिंग कर पूल के जरिए रहता है, इसलिए ठेकेदार ये काम अपने मनमाने अंदाज में ही करते हैं। पूल के इस खेल में एफएंडसीसी में रखे कुछ टेंडर में एक ही घर में टेबल में एक साथ डिनर करने वाले बाप बेटा की ही कंपनियों आपस में कंपीटिशन करती सामने आई हैं। लुधियाना के बडे़ कारोबारी परिवार से जुडे़ संजीव अरोड़ा इंडस्ट्री, पॉवर के बाद अब लोकल बॉडी मंत्री की भी कमान मिल चुकी है। आम लोगों में चर्चा है कि संजीव अरोड़ा हर काम के लिए बेहद पाजिटिव माइंड हैं और डेवलपमेंट करवाने में वे किसी तरह की कोई कमीं नहीं छोड़ना चाहते। लुधियाना में सत्तारुद्ध पार्टी के कईं नेता कमीशन की दलदल में फंसे हुए हैं, चाहे वो टेंडर डेवलपमेंट वर्क का हो या पार्किंग ठेके से जुड़ा हो। इनमें कईं नेता अपनी सेटिंग का खेल मौज से चला रहे हैं, लेकिन जब वहीं बात मंत्री संजीव अरोड़ा की होती है तो वे इस दलदल से कोसों दूर कहे जाते हैं। कारण ये हैं कि वे डेवलपमेंट वर्क में किसी तरह का समझौता नहीं चाहते और क्वालिटी एवन हो, ये उनकी हमेशा से डिमांड रहती है। लेकिन लुधियाना नगर निगम व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में काम कर रहे ठेकेदार केवल नैक्सेस के तहत ही काम करना पसंद करते हैं, क्यों कि इस खेल में मोटा कमीशन अफसरों की जेब में जाता है और वहीं ठेकेदार घटिया मैटीरियरल इस्तेमाल कर अपनी चांदी कूटते हैं। कईं बार तो नगर निगम अफसरों व ठेकेदारों के पूल में नेताओं की भूमिका भी बेहद अहम रहती है और वे भी दो से पांच फीसदी का कमीशन लेकर टेंडर को पूल करवा देते हैं।
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लंबे समय से लुधियाना में टिके हैं कईं अफसर
लुधियाना नगर निगम में कईं आला अफसर ऐसे हैंं, जो लंबे समय से लुधियाना में टिके हैं, इनमें कुछ का एक दो बार तबादला भी हुआ, लेकिन ठेकेदारों से सेटिंग का खेल उन्हें दोबारा लुधियाना खींच लाता है। कांग्रेस कार्यकाल के कुछ अफसरों को तो लुधियाना से चलता कर दिया गया, लेकिन कुछ अफसरों की माैजूदा विधायकों से अच्छी सेटिंग ने उनकी लुधियाना में कुर्सी कायम रखी है। लेकिन लुधियाना वासियों को बेहतर क्वालिटी तभी मिल सकती है, जब अफसरों व ठेकेदारों का नैक्सेस तोड़ा जाए। ऐसे में जिन अफसरों के खिलाफ ऐसी शिकायतें हैं, उन्हें लुधियाना से चलता करने की बड़ी जरुरत हैं और ये कदम मंत्री को उठाना भी पड़ सकता है।
अफसरों की तय करनी होगी जिम्मेदारी
करीब 20 दिनों के बाद नगर निगम की ओर से हॉट मिक्स प्लांट के ठेकेदारों से सड़क बनवाने के काम शुरु करवा दिए जाएंगे। ये काम करोड़ों रुपए की कॉस्ट के हैं। मामला अफसरों की सेटिंग का रहता है, इसलिए ठेकेदार की ओर से करवाए जाने वाले वर्क पर कईं बार जेई एसडीओ तक मौके पर नहीं जाते और इसका नतीजा रहता है कि कम टैंपरेचर के कारण या घटिया मैटीरियरल इस्तेमाल के कारण ये सड़कें 15 दिनों के भीतर ही उखड़ जाती हैं। अगर इन कामों में क्वालिटी बेहतर लेनी है तो संबंधित अफसरों की जिम्मेदारियां फिक्स करनी होगी और सड़क टूटने पर ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट या डीबार करने तक की सख्त कार्रवाई अमल में लानी होगी।
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Yashpal Sharma (Editor)