यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना नगर निगम में जैसे ही करोड़ों की डेवलपमेंट वर्क के टेंडर लगाने और इनके वर्क आर्डर जारी करने की बारी आती है, तो इसके साथ ही करोड़ों रुपए की कमीशन व एडजस्टमेंट का खेल भी शुरु हो जाते हैं। तीन दिन पहले मेयर कैंप आफिस में केंद्र की ओर से जारी स्पेशल अस्सिटेंस फंड से सबंधित करीब 70 करोड़ रुपए की लागत के 12 कामों के वर्कआर्डर एफएंडसीसी ने मंजूर तो कर लिए, लेकिन अभी तक इनके वर्कआर्डर ठेकेदारों को जारी नहीं हो सकें हैं। दबी जुबान में इन टेंडरों के वर्कआर्डर जारी न होने के पीछे कमीशन का खेल बताया जा रहा है। गौर हो कि नगर निगम में डेवलपमेंट वर्क की फाइल को पास करने व इसके बाद उक्त काम की पेमेंट अदायगी में पहले केवल जेई, एसडीओ, एक्सईन, एसई, डीसीएफए, एडिशनल कमिश्नर और कमिश्नर की कमीशन रहती थी, लेकिन कौंसलर चुनाव में हुई देरी के बाद इसमें राजनेताओं की कमीशन में जोड़ दी गई। लेकिन अब जब से नगर निगम में नया हाउस बनने के तीन महीने बाद ही इसमें निगम के आला नेताओं की भी कमीशन चर्चा में आई हुई हैं। बताया जाता है कि स्पेशल अस्सिटेंट से संबंधित डेवलपमेंट वर्क के काम 31 मार्च से पहले पूरा किए जाने हैं। निगम की ओर से जब इन कामों के पार्ट पेमेंट जारी होगी, तभी 31 मार्च से पहले स्पेशल अस्सिटेंस के लिए रखा करोड़ों का फंड निगम को जारी हो पाएगा। लेकिन इन कामों की गंभीरता को देखे बिना इनसे संबंधित टेंडरों के वर्कआर्डर तो पास कर दिए गए, लेकिन कमीशन के खेल में इनके वर्क आर्डर ठेकेदारों को जारी नहीं हो पा रहे। ऐसे में बड़ी चर्चा इस बात कि अब राजनेता ठेकेदारों की पेमेंट अदायगी में तो हिस्सा लेंगे ही, वहीं ठेकेदारों को अब वर्क आर्डर पर भी राजनेताओं को माथा टेकना पडे़गा।
करोड़ों के टेंडराें में भी जारी पूल का खेल, विजिलेंस तक पहुंचा मामला
आपको बता दें कि नगर निगम की ओर से केंद्र सरकार की ओर से पंजाब को दिए गए स्पेशल अस्सिटेंस फंड के तहत विभिन्न विधानसभा क्षेत्र में सड़कें बनाने को करीब 70 करोड़ रुपए के टेंडर लगाए हैं और इन कामों को पूरा करने की मियाद भी केवल तीन महीने कांट्रेक्टर को दी गई हैं। लेकिन चर्चा में ये बात भी सामने आई हैं, इन कामों के हॉट मिक्स प्लांट ठेकेदारों ने कंपीटिशन की बजाय पूल कर अधिकतर टेंडर डाले हैं और इसको लेकर एक ठेकेदार की स्टेट विजिलेंस में शिकायत भी खूब चर्चा में हैं। यही कारण है कि इन में कुछ टेंडर मात्र डेढ़ से 2 फीसदी लैस पर ठेकेदारों को अलॉट हुए हैं। जबकि इन टेंडरों के पीछे टीआईसी सैल के एसई शाम लाल गुप्ता व एक एक्सईन की बड़ी मिलीभुगत रही है, क्यों किन इन अअफसरों को पूल की जानकारी थी, तब भी इनकी ओर से इन टेंडरों को हरी झंड़ी देकर सरकारी खजाने को बड़ा चूना लगने दिया। अगर ये टेंडर कंपीटिशन के साथ डलवाए जाते तो इसमें दस से 15 करोड़ रुपए की बचत हो सकती थी।
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Yashpal Sharma (Editor)