यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना नगर निगम इल्लीगल बिल्डिंगों का शहर बनता दिखाई देने लगा है। इसका बड़ा कारा आप इस बात से समझ सकते हैं कि लुधियाना में बिल्डिंगें तो अन्य बडे़ शहरों के मुकाबले सबसे अधिक बनती हैं, लेकिन लुधियाना निगम रिहायशी, कार्मशियल व इंडस्ट्रियल नक्शे पास करने में सबसे पीछे है। ई न्यूज पंजाब की ओर से लुधियाना को इल्लीगल बिल्डिंग का शहर इसलिए कहा जा रहा हैं, क्यों कि यहां पर बठिंडा शहर के मुकाबले रिहायशी बिल्डिंगें तो चार गुना अधिक बनती हैं, लेकिन बठिंडा निगम में रिहायशी नक्शे लुधियाना नगर निगम से अधिक पास किए जाते हैं। इतना ही नहीं लुधियाना में कार्मशियल नक्शा पास करवाने के बाद इनका कंपलिशन लेने का रिवाज ही नहीं हैं और इसके मुकाबले जालंधर निगम में हर महीने कंपलिशन के दर्जनों केसों के आवेदन आते हैं। इसका बड़ा कारण है कि ऐसे मुलाजिमों के हाथ में नगर निगम के कुछ जोन की बागडोर थमा दी गई हैं, जो पहले से ही विवादित थे और इनको एटीपी की कुर्सी मिलने के बाद तो लोग सरकारी खजाने में फीस जमा करवाना ही भूल गए।
इस दौड़ में नगर निगम के ए जोन के सांप सीढ़ी चढ एटीपी बने गुरविंदर सिंह लक्की सबसे आगे चल रहे हैं। वैसे तो इन एटीपी साहिब का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन एटीपी की कुर्सी मिलने के बाद तो इन्होंने जोन के बाहरी हिस्से में पडते ब्लाकों में धड़ल्ले से इल्लीगल बिल्डिंगें बनवा डाली। इन्हीं के जोन में बहादुरके रोड़ के आसपास आते ब्लॉक 32 में आते न्यू प्रीत नगर, सन्यास नगर के साथ लगते इलाकों में पिछले चार महीनों में 70 से अधिक इंडस्ट्रियल बिल्डिंगें बनवा डाली हैं। इन बिल्डिंगों से निगम के खजाने में तो कुछ नहीं आया, लेकिन इन एटीपी व यहां पर तैनात एक महिला बिल्डिंग इंस्पेक्टर जरुर मालामाल हो गए हैं।
वर्तमान में भी सन्यास नगर व प्रीत नगर के मात्र दो इलाकों में ही दस इल्लीगल बिल्डिंगों का निर्माण धड़ल्ले से जारी है। इन्होंने अपने जोन में 5.5 एकड़ में एक इल्लीगल कालोनी भी बनवानी शुरु की थी, लेकिन मामला जैसे ही निगम कमिश्रर के ध्यान में आया तो तुरंत इस कालोनी का काम बंद करवा मामले पर पर्दा डालने में जुट गए हैं।
जोन ए में ब्लॉक 32 बना इल्लीगल बिल्डिंगों का गढ़
बात करें नगर निगम जोन ए में नई सब्जी मंड़ी से बहादुर के रोड़ को निकलते दाएं हाथ में पड़ता ब्लॉक 32 एक ऐसा एरिया हैं, जो होजरी व प्रिंटिंग का गढ़ कहा जाता है। यहां पर किराया अच्छा मिल जाता है और जमीन के रेट अभी भी अधिक नही हैं, इसलिए यहां पर हर महीने 20 से अधिक इंडस्ट्रियल हॉल डालने को बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन शुरु की जाती है। लेकिन ये ब्लॉक सभी आला अधिकारियों की हद से बाहर पड़ता है, इसलिए यहां पर नगर निगम का कानून नहीं चलता, ऐसा भी प्रतीत होता है। हालात ऐसे हैं कि अगर कोई शिकायत भी करता है तो कईं बार तो लिमिट से बाहर होने की बात कह भी अपनी चोरी छिपाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाती। इस ब्लॉक में आते न्यू प्रीत नगर, सन्यास नगर, बंदा बहादुर नगर, गोल्डन बिहार, न्यू आजाद नगर, भारती कालोनी ऐसे इलाके हैं, जहां पर रोजाना एक दो हॉल बनान का काम शुरु होता है। लेकिन बिल्डिंग इंस्पेक्टर व सेवादार की ओर से यहां पर बिल्डिंग का नक्शा पास करवाने को कंस्ट्रक्शन मालिक को नहीं मिला जाता, ब्लकि अपनी दस हजार से रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक की दो नंबर की फीस लेने को ही मिला जाता है। अगर इस ब्लॉक का पूरा सर्वे कर लिया जाए तो ये सामने आ जाएगा कि पिछले एक साल में इस एरिया में कैसे सैंकड़ों इल्लीगल बिल्डिंगें बनवा डाली गई।
एमटीपी को फील्ड़ में उतर एटीपी व बिल्डिंग इंस्पेक्टरों से मांगनी होगी रिपोर्ट
करीब 15 दिन पहले लोकल गर्वमेंट की ओर से टेक्नीकल एमटीपी के तौर पर नगर निगम में विजय कुमार को तैनात किया है। विजय कुमार जितना लुधियाना शहर को जानते हैं, उतना ही वे बिल्डिंग ब्रांच में तैनात अपने एटीपी व बिल्डिंग इंस्पेक्टरों की कारगुजारी से भी वाकिफ हैं। लेकिन नए एमटीपी की छत्रछाया में ये एटीपी व बिल्डिंग इंस्पेक्टर क्या गुल खिल रहे हैं और कैसे निगम के खजाने को नुकसान पहुंचा अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं, इसके लिए विजय कुमार को हर जोन में एक दिन फील्ड़ में उतर स्थानीय स्टाफ से रिपोर्ट मांगनी हेागी। तभी इल्लीगल बिल्डिंग निर्माण पर नकेल कसी जा सकेगी और निगम का रेवेन्यू भी बढे़गा।
फोटो में सभी बिल्डिंगें 32 ब्लॉक में वर्तमान में बनने से संबंधित है।
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Yashpal Sharma (Editor)