यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना सेंट्रल हलके से भारतीय जनता पार्टी के हल्का इंचार्ज और और प्रदेश भाजपा के कैशियर गुरुदेव शर्मा देबी की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं । आपको बता दें कि लुधियाना सेंट्रल किसी समय भारतीय जनता पार्टी का गढ़ कहा जाता था और गुरुदेव शर्मा देबी यहां से दो बार भाजपा की टिकट पर चुनाव तो लड़े लेकिन वे जीत हासिल नहीं कर सके। हार के इस बड़े कारण में भाजपा के पूर्व मंत्री रहे स्वर्गीय सतपाल गोसाईं परिवार का उनके साथ ना होना भी रहा। लेकिन आज सतपाल गोसाई के पोते अमित गोसाई की ओर से शिरोमणि अकाली दल में जॉइनिंग दे डाली गई। देबी की परेशानी का बड़ा कारण यह है कि शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल की ओर से अमित गोसाई को लुधियाना सेंट्रल हलके का इंचार्ज बनाया है। ऐसे में अगर अकाली दल और भाजपा का गठबंधन नहीं होता तो आगामी विधानसभा चुनाव में गुरुदेव शर्मा के समक्ष अमित गोसाई भी एक बड़े उम्मीदवार के रूप में होंगे।
भाजपा छोड़कर शिरोमणि अकाली दल में उनकी जॉइनिंग का बड़ा कारण सतपाल गोसाईं परिवार और राजनीति में युवा चेहरा कहे जाने वाले अमित गोसाई को भाजपा की और से नजर अंदाज करना रहा।
आपको बता दें कि सतपाल गोसाई इसी सेंट्रल विधानसभा से चुनाव जीतकर अकाली भाजपा कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी स्पीकर के पद पर भी रहे थे, लेकिन सतपाल गोसाईं के उम्र दराज होने के चलते बीजेपी ने गोसाई परिवार से किसी को टिकट देने की बजाय गुरुदेव शर्मा को टिकट दिया । लेकिन इस बीच देबी गोसाईं परिवार का साथ हासिल नहीं कर पाए। इसी के चलते भाजपा का गढ़ होने के बावजूद गुरुदेव शर्मा देबी यहां से दोनों बार चुनाव नहीं जीत पाए ।
सतपाल गोसाई का चुनावी लेनदेन देखते देखते देबी ने सीधे कब्जाई टिकट
शराब कारोबारी और प्रॉपर्टी कारोबारी गुरुदेव शर्मा साल 2007 से सतपाल गोसाई के केंद्रीय विधानसभा चुनाव के दौरान उनके साथ जुड़े । इस दौरान देबी ही सतपाल गोसाई का चुनावी लेनदेन देखते थे और चुनावी खर्च का भी पूरा लेखा जोखा उनके पास रहता था। यह चुनाव जीतने के बाद सतपाल गोसाई को हेल्थ मिनिस्टर बनाया गया। इसके बाद साल 2012 में गोसाई सेंट्रल हलके से कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र डाबर से चुनाव हार गए और लेकिन इसके कि दौरान भी उनके पास 42000 वोट बैंक था। साल 2017 में गोसाई के वृद्धि होने के चलते उनका टिकट कट गया और उनकी देबी को टिकट दिया गया था देबी जहां पहले सतपाल गोसाई के कैशियर थे और उसके बाद वह भाजपा के प्रदेश कैशियर बने। उन्होंने इस दौरान पार्टी में अपने कद को बढ़ाया और आल्हा नेताओं के संपर्क में आए । जिसके चलते ही पार्टी हाईकमान ने गोसाईं परिवार को नजर अंदाज करते हुए गुरुदेव शर्मा देबी को सेंट्रल हलके से अपना उम्मीदवार बनाया। दो बार चुनाव लड़ने के बावजूद गुरुदेव शर्मा कभी भी 42 हजार वोट का आंकड़ा नहीं छू पाए और और 30 हजार से भी कम वोट के नीचे में सिमट गए। हालांकि जहां पहले इस विधानसभा में कुल वोट एक लाख के आसपास थी लेकिन अब यही कुल वोट का आंकड़ा सवा लाख को पार कर चुका है।
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Yashpal Sharma (Editor)