पंजाब। राघव चड्ढा ने AAP छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी के दो-तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हो रहा हूं। संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा, “हमने यह फैसला किया है कि हम, यानी राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को BJP में मिला लेंगे।” उन्होंने कहा के जिस AAP को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है। अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फ़ायदे के लिए काम करती है... पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं। इसलिए, आज हम यह घोषणा करते हैं कि मैं AAP से खुद को अलग कर रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं।
राघव चड्ढा ने कहा- राज्यसभा में आप के 10 सांसद हैं, जिनमें से दो-तिहाई, यानी 7 हमारे साथ हैं। इनके नाम-
1. राघव चड्ढा
2. संदीप पाठक
3. राजेंद्र गुप्ता
4. विक्रम साहनी
5. स्वाती मालीवाल
6. हरभजन सिंह
7. अशोक मित्तल
राघव ने कहा- अभी और भी हैं जो साथ आएंगे। बीजेपी जॉइन करने का काम आज शाम को होगा। भारत का संविधान यह प्रोवीजन देता है, कि अगर 2/3 से ज्यादा सांसद किसी दूसरी पार्टी में जाना चाहें तो वे ऐसा कर सकते हैं। यह अधिकार हमें भारत के संविधान ने ही दिया है।
पिछले कुछ सालों से मुझे महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही व्यक्ति हूं। इसलिए आज मैं घोषणा करता हूं कि मैं AAP से दूरी बना रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं।
राघव चड्ढा ने कहा- राजनीति में आने से पहले, मैं एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) था। इस मंच पर मेरे साथ अलग-अलग क्षेत्रों के लोग थे। कुछ वैज्ञानिक थे, तो कुछ शिक्षाविद। आज, AAP छोड़ने वालों में एक विश्वस्तरीय क्रिकेटर, एक पद्मश्री विजेता और कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इन सभी लोगों ने अपना सब कुछ त्यागकर, एक भ्रष्टाचार-मुक्त भारत बनाने के संकल्प के साथ एकजुट होकर इस पार्टी की स्थापना की थी।
मैं इस पार्टी का एक संस्थापक सदस्य था। शायद ही कोई मुझसे बेहतर इस बात को जानता होगा। हम सबने मिलकर, पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ, दिल्ली में इस पार्टी को खड़ा किया, पंजाब में इसे स्थापित किया। अन्य राज्यों में भी इसका विस्तार करने का प्रयास किया। लेकिन आज, बड़े दुख, पीड़ा और शर्म के साथ मैं यह कहता हूं कि जिस पार्टी का गठन भ्रष्टाचार को खत्म करने की शपथ के साथ हुआ था, वह आज भ्रष्ट और समझौतावादी लोगों के हाथों में बुरी तरह फंस चुकी है।
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Yashpal Sharma (Editor)