September 10, 2026 01:08:46
इनसाइड स्टोरी- क्या आम आदमी पार्टी की मेहरबानियों का बोझ संजीव अरोड़ा की जेल यात्रा के सफर का बना बड

इनसाइड स्टोरी- क्या आम आदमी पार्टी की मेहरबानियों का बोझ संजीव अरोड़ा की जेल यात्रा के सफर का बना बड़ा कारण!

संजीव अरोड़ा ने तह किया एक साल में मंत्री से जेल का सफर

- दिल की बजाय दिमाग की सुनते चले गए संजीव अरोड़ा

May10,2026 | Yashpal Sharma | Ludhiana

यशपाल शर्मा, लुधियाना


कारोबारी संजीव अरोड़ा पर आम आदमी पार्टी की मेहरबानियां का बोझ कहीं ना कहीं उन पर भारी पड़ गया। यही कारण था कि वे आम आदमी पार्टी को छोड़ भारतीय जनता पार्टी के दामन में नहीं जा पाए और इसी बोझ के चलते उन्हें अब जेल यात्रा का नया अध्याय अपनी किस्मत की किताब में लिखना पड़ा। आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद संजीव अरोड़ा सबसे पहले साल 2022 में राज्यसभा मेंबर बने और 2025 तक से बखूबी ढंग से इस जिम्मेदारी को निभाया। इसी पद पर रहते हुए उन्हें आम आदमी पार्टी की ओर से लुधियाना वेस्ट से विधायक टिकट का ऑफर मिला। यह मात्र विधायक टिकट का ऑफर नहीं था बल्कि इसके साथ-साथ उन्हें मजबूत पोर्टफोलियो और पंजाब के डिप्टी सीएम बनाए जाने का भी ऑफर साथ में दिया गया था।  यही कारण था कि मात्र डेढ़ से 2 साल के बचे विधायक कार्यकाल के लिए संजीव अरोड़ा के साथ-साथ आम आदमी पार्टी की ओर से चुनाव जीतने को पूरी जान फूंक दी गई। बॉय इलेक्शन था और इस चुनाव में संजीव अरोड़ा 10000 वोट के बड़े मार्जिन से चुनाव जीते। चुनाव जीतते ही आम आदमी पार्टी की मेहरबानियां की बौछार उन पर कर दी गई। विधायक बनते ही उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया। सबसे पहले उन्हें उद्योग मंत्री बनाया गया इसके बाद चंद कुछ ही दिनों बाद उन्हें बिजली मंत्री का भी पोर्टफोलियो दे दिया गया । विधायक बनते ही उनके मंत्री पद में लग रहे तगमो को देख पार्टी के अन्य मंत्रियों को भी उनकी काबिलियत पर ईर्ष्या होने लगी थी। आम अभी पार्टी की मेहरबानियां का बोझ यही तक नहीं रुका इसके बाद उन्हें सबसे मजबूत माने जाने वाले मंत्रियों के पोर्टफोलियो से जुड़े लोकल बॉडी विभाग का भी जिम्मा दे दिया गया। बतौर मंत्री पिछले करीब 1 साल के अपने इस कार्य कार्यकाल को संजीव अरोड़ा ने वह खूबी निभाया। सुबह करीब 5 से 5:30 बजे उठने के बाद वे सुबह 7:00 बजे से ही अपने विभाग के पेंडिंग कामों के लिए मोबाइल घुमाने शुरू कर देते थे। लेकिन इस सबके बीच उनकी एक कमी भी खलती दिखाई दी की वह आम लोगों को आसानी से नहीं मिल पाए और कुछ चमचों के बीच में ही घिरकर अपने बढ़ते ग्राफ की राह रोक बैठे थे।


अब संजीव अरोड़ा पंजाब के सबसे ताकतवर कैबिनेट मंत्री के तौर पर उभरे। इसके बाद चर्चाएं यहां तक हुई कि चंद दिनों में उन्हें पंजाब का डिप्टी सीएम भी बनाया जा सकता है, लेकिन तब जब भी ऐसी प्लानिंग पार्टी की ओर से बनाई गई तभी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की तबियत बिगड़ने की खबरें आती रही। इन्हीं मेहरबानियां के बोझ के चलते संजीव अरोड़ा भारतीय जनता पार्टी में जाने में अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं कर पाए और वे इन मेहरबानियां के बोझ तले इतने दब गए कि उन्हें ईडी के एक्शन में अपने जेल तक का सफर दिखाई नहीं दिया।

जेल यात्रा में किस्मत के खेल को भी नहीं किया जा सकता दरकिनार

 उनकी इस जेल यात्रा में किस्मत के खेल को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। असल में जब कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के ऊपर ईडी ने 17 अप्रैल को छापामारी की, उससे एक दिन पहले ही वे पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ विदेश यात्रा पर निकल गए। जहां एक तरफ ईडी की कार्रवाई होती रही तो वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी उन्हें ना डरने और मजबूत रहने का पाठ पढ़ती रही। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जब लवली यूनिवर्सिटी के मालिक अशोक मित्तल और Trident ग्रुप के चेयरमैन राजेंद्र गुप्ता पर ईडी की छापामारी की गई तो वे तुरंत भाजपा नेताओं के संपर्क में आ गए। लेकिन यह मौका संजीव अरोड़ा को किस्मत ने नहीं दिया क्योंकि वह विदेश यात्रा में थे और वापस लौट के बाद उन्हें केवल ईडी के नोटिस मिला था और इसके लिए वह अपने वकीलों पर ही भरोसा करते रह गए। सूत्र बताते है कि इस बीच उन्हें भाजपा से ऑफर जरूर आई लेकिन आम आदमी पार्टी की मेहरबानियां का बोझ उन्हें उस तरफ नहीं खींच पाया।                    

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सवाल:  क्या अब कोई कारोबारी लेना चाहेगा राज्यसभा मेंबर और मंत्री का पद

सवाल खड़ा होता है कि किसी भी राज्य की सरकार में केंद्र सरकार के उलट कोई बिजनेसमैन या कारोबारी राज्यसभा मेंबर और मंत्री पद का पोर्टफोलियो लेना चाहेगा इसका बड़ा कारण है कि कारोबार में कई तरह की बारीकी है ऐसी होती है जो बिजनेसमैन रहते तो उनके लिए कभी दिक्कत का कारण नहीं बनती लेकिन जैसे ही कोई बिजनेसमैन राजनीति में कदम रखता है तो उसके लिए यही छोटी दिक्कत बड़े पहाड़ की तरह खड़ी हो जाती है और उन्हें जेल यात्रा तक का सफर करने पर मजबूर कर देती है। लुधियाना में कई बड़े कारोबारी ऐसे रहे हैं जिन्हें राज्यसभा मेंबर का पद बीती सरकारों की ओर से ऑफर किया गया लेकिन वे समझदारी दिखाते हुए इससे किनारा कर गए। जिसमें ओसवाल और हीरो घराने जैसे बड़े बिजनेस परिवार शामिल है। लेकिन इन उदाहरणों से अब एक बात जरूर साफ है कि अब केंद्र सरकार के उलट दूसरी राज्य की सरकारों में कोई भी बिजनेसमैन राजनीति में कदम रखने की जल्दी जरूरत नहीं करेगा। 

Inside-Story-Was-The-Burden-Of-Aam-Aadmi-Party-Favours-A-Major-Reason-For-Sanjeev-Arora-Jail-Journey-



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