यशपाल शर्मा, लुधियाना
सिविल लाइंस स्थित जगदंबे मार्केट में इलीगल कमर्शियल निर्माण जोरों पर, सरकारी खजाने को लाखों का रगड़ा, बिल्डिंग ब्रांच खामोश नगर निगम डी जोन के एरिया में इलीगल बिल्डिंग निर्माण के जरिए नगर निगम के सरकारी खजाने को लाखों रुपए का रगड़ा लगाया जा रहा है। पहले न्यू दीप नगर में आर्य कॉलेज फॉर बॉयज की ठीक बैक साइड पर तीन मंजिला कमर्शियल इमारत बिना बिल्डिंग बाय लॉज के बना दी गई है और इसका निगम से कोई ना तो नक्शा पास करवाया गया और ना ही ₹1 सरकारी खाते में जमा करवाया गया। वहीं अब ताजा ताजा सिविल लाइंस स्थित जगदंबे मार्केट में भी छुट्टी के दिन पुरानी दुकानों की गिरा कमर्शियल बिल्डिंग निर्माण को लेंटर डालने का काम धड़ल्ले से जारी है। आपको बता दे कि यहां भी नियमों को ताक में रखकर कमर्शियल बिल्डिंग निर्माण पिछले करीब 10 दिनों से जारी है और आज इसका पहले लेंटर डाला जा रहा है। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच को नहीं है लेकिन इसके बावजूद एमटीपी, एटीपी और बिल्डिंग इंस्पेक्टर मौन होकर इलीगल निर्माण को हरी झंडी दिए हुए हैं।
₹4000 प्रति गज से अधिक का लेनी बनती है फीस
पंजाब सरकार की ओर से लगातार रिहायशी और कमर्शियल बिल्डिंग नक्शा फीस में बढ़ोतरी की जा रही है, ताकि सरकारी खजाने में रेवेन्यू की कोई कमी ना रहे । लेकिन इसके बावजूद बिल्डिंग ब्रांच के ऑफिसर सरकार की प्लानिंग में छेद करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे । आपको बता दें कि मौजूदा समय में रिहायशी बिल्डिंग बनाने के लिए भी ₹1500 प्रति गज से अधिक की सरकारी फीस तय की गई है और वहीं अगर कोई कमर्शियल बिल्डिंग निर्माण हो तो इसके एवज में ₹4000 प्रति गज से अधिक की फीस सरकार की ओर से तय की गई है। इस लिहाज से दो मंजिला 100 गज कमर्शियल बिल्डिंग निर्माण में ही नगर निगम को ₹5 लाख तक की सरकारी फीस खजाने में आ जाती है, लेकिन कभी राजनीतिक दबाव और कभी सेटिंग के खेल के चलते नगर निगम के ऑफिसर इलीगल बिल्डिंग निर्माण को खुद ही आशीर्वाद दे देते हैं। न्यू दीपनगर में आर्य कॉलेज की ठीक बैक साइड के पीछे बन रही कमर्शियल बिल्डिंग निर्माण में कभी इलाका विधायक के नाम पर तो कभी विधायक के बेटे के नाम पर सिफारिश का खेल भी चरम पर है। इलीगल बिल्डिंग निर्माण कर्ता इन नेताओं के नाम लेकर ही नगर निगम के अफसर को मौके से चलता कर देते हैं । जिसका खामियाजा सरकारी खजाने को भुगतना पड़ रहा है और शहर में इलीगल निर्माणों की झड़ी लग जाती है। बहुत से ऐसे इलीगल बिल्डिंग निर्माण भी रहते हैं, जिन से बिल्डिंग इंस्पेक्टर की ओर से रिकवरी तो दूर उनका चालान तक नहीं काटा जाता।
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Yashpal Sharma (Editor)