चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया है कि हरियाणा के गुरुद्वारा महंतों के चंगुल में हैं। उन्होंने हरियाणा के सिखों से उन्हें कब्जे से छुड़ाने की अपील की है। उन्होंने यह ऐलान भी किया कि अकाली दल हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (HSGMC) चुनाव लड़ेगा। हरियाणा में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मिलीभगत से गुरुद्वारों पर कब्जा कर लिया है, इसलिए गुरुद्वारों को आजाद कराना जरूरी है। चंडीगढ़ में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी।
सिखों से वोटर बनने की अपील की
बादल ने कहा कि हमारा ध्यान हरियाणा में सिखों को अपनी स्वयं की गुरुद्वारा कमेटी का अधिकार देने के अलावा उन्हें वर्तमान कमेटी से मुक्त कराना है, जो आधिकारिक मीटिंगों में झगड़े तथा गाली गलौज कर रहे हैं, जो सभी सिद्धांतों और मानदंडों के खिलाफ है। उन्होंने हरियाणा में सिखों से बड़ी संख्या में खुद को मतदाता के रूप में अपना नामांकन कराने की भी अपील की ताकि आगामी गुरुद्वारा चुनावों में अपने राज्य के पंथ के गौरव को बहाल किया जा सके।
पंजाब में बाढ़ के लिए CM मान को जिम्मेदार बताया
सुखबीर सिंह बादल ने पार्टी की कोर कमेटी में चर्चा किए गए मुद्दों के बारे में कहा कि अकाली दल का दृढ़ विश्वास है कि पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ मानव निर्मित त्रासदी है और इसके लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान जिम्मेदार हैं। मुख्यमंत्री बारिश शुरू होने से पहले बाढ़ नियंत्रण की कोई मीटिंग लेने में विफल रहे हैं। वह भाखड़ा और पोंग डैम से बाढ़ के पानी को छोड़ने को नियंत्रित करने में भी नाकाम रहे। बाद में जब पंजाब का बड़ा हिस्से में बाढ़ आ गई तो वह अपने बॉस अरविंद केजरीवाल के साथ आप के चुनाव कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भाग गए।
बाढ़ प्रभावितों को नहीं मिला उचित मुआवजा
बादल ने बाढ़ प्रभावित किसानों और मजदूरों के लिए उचित मुआवजे की भी मांग की और कहा कि सरकार द्वारा जारी किया गया 186 करोड़ का मुआवजा किसान समुदाय के घावों पर नमक छि़ड़कने के समान है। आप ने गिरदावरी से पहले फसल क्षति के लिए अंतरित राहत देने का वादा किया था, लेकिन पहले ही तीन खराब फसलों के लिए ऐसा करने में विफल रही है। ‘‘ पंजाब में बाढ़ के बाद मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त तक मुआवजा जारी करने का वादा किया था, लेकिन कुछ चेक वितरित करके प्रचार की नौटंकी की जिन लिफाफों पर 40 हजार रुपए प्रिंटिड थे वास्तव में उनमें सिर्फ 4000 रुपए थे।
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Yashpal Sharma (Editor)