अमृतसर। अमृतसर में बुधवार को सिखों के पांचों तख्तों के जत्थेदारों ने श्री अकाल तख्त साहिब पर मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने पूर्व सीएम बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजेआना को तुरंत भूख हड़ताल खत्म करने के आदेश दिए हैं। सिखों के सर्वोच्च न्यायालय श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह की तरफ से इस बैठक को बुलाया गया था। इस सभा के दौरान बलवंत सिंह राजोआना द्वारा भेजे गई चिट्ठी पर चर्चा के बाद आदेश जारी किए गए...
1. श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री द्वारा बलवंत सिंह राजोआना और अन्य बंदी सिखों की रिहाई के संबंध में एक अधिसूचना जारी की गई थी। केंद्र सरकार से बातचीत के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया है। जिसमें दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका, बरजिंदर सिंह हमदर्द, बीबी कमलदीप कौर राजोआना, विरसा सिंह वल्टोहा शामिल हैं।
2. केंद्र सरकार 31 दिसंबर 2023 तक राजोआना की फांसी की सजा को रद्द नहीं करती है तो राजोआना के बार-बार श्री अकाल तख्त साहिब को भेजी प्रतिक्रियाओं के मद्देनजर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर इस पर विचार करेगी।
3. बलवंत सिंह राजोआना को पंज सिंह साहिबों द्वारा आदेश दिया गया है कि वे उनके स्वास्थ्य को किसी भी तरह से नुकसान न पहुंचाएं, तुरंत अपनी भूख हड़ताल वापस ले लें।
4. अगर केंद्र सरकार तय समय में फैसला नहीं लेती है तो उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
SGPC की कोशिशों के बाद भी भूख हड़ताल की शुरू
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और अकाली दल की कोशिशों के बाद भी बलवंत सिंह राजोआना बीते दिन से भूख हड़ताल पर चला गया है। बलवंत सिंह ने बीते दिनों श्री अकाल तख्त साहिब को एक खत लिखा। जिसमें उसने SGPC और अकाली दल पर आरोप लगाए कि SGPC और अकाल दल ने उसे राहत दिलाने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किए। वहीं, राजोआना ने घोषणा की थी कि अगर उसकी सजा को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो वे भूख हड़ताल पर चला जाएगा और हुआ भी ऐसा ही।
SGPC ने बैठकों का किया था दौर शुरू
SGPC ने श्री अकाल तख्त साहिब से निर्देश मिलने के बाद एक-एक कर तीन बैठकें की। जिसमें निर्णय लिया कि 4 दिसंबर को SGPC का वफद बलवंत राजोआना को जेल में जाकर मिलेगा। जिसके लिए अकाल दल के नेता बिक्रम मजीठिया को भेजा गया, लेकिन 4 दिसंबर को उन्हें जेल में जाने ही नहीं दिया गया। इसके अलावा SGPC ने 20 दिसंबर को दिल्ली में एक बड़ा रोष मार्च निकालने की भी घोषणा की है। जिसमें वे भारत के राष्ट्रपति को 26 लाख हस्ताक्षर एप्लीकेशन सौंपेंगे, जिनमें बलवंत सिंह राजोआना की सजा को कम करने और बंदी सिखों को रिहा करने की अपील की गई है। इसके साथ ही SGPC राष्ट्रपति से 2011 में भेजी गई मरसी पटीशन पर निर्णय लेने की मांग करेगी।
SGPC और अकाल दल की छवि को पहुंच रहा नुकसान
SGPC चाहे बलवंत राजोआना से मुलाकात और मरसी पटीशन पर निर्णय न लेने को लेकर राज्य व केंद्र सरकार को कोस रही है, लेकिन भूख हड़ताल पर जाने से SGPC व अकाली दल की छवि को नुकसान पहुंचा है। बलवंत सिंह राजोआना को जिंदा शहीद का खिताब दिया गया है, ऐसे में राजोआना की तरफ से ही SGPC व अकाली दल पर कुछ न करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।