September 5, 2026 11:21:55

2006 मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट केस - 19 साल बाद सभी 12 आरोपी बरी, हाईकोर्ट बोला- सरकारी वकील दोष साबित करने में नाकाम; घटना में 189 लोग मारे गए थे

Jul21,2025 | | India

न्यू दिल्ली। मुंबई में 2006 के सीरियल ट्रेन ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट ने सोमवार को सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन यानी सरकारी वकील आरोपियों के खिलाफ केस साबित करने में नाकाम रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि आरोपियों ने अपराध किया है, इसलिए उन्हें बरी किया जाता है। अगर वे किसी दूसरे मामले में वान्टेड नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत जेल से रिहा किया जाए। 11 जुलाई 2006 को मुंबई के वेस्टर्न सब-अर्बन ट्रेनों के सात कोचों में सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इसमें 189 पैसेंजरों की मौत हो गई थी और 824 लोग घायल हो गए थे। सभी धमाके फर्स्ट क्लास कोचों में हुए थे। घटना के 19 साल बाद यह फैसला आया है। मुंबई में 11 जुलाई 2006 को शाम 6 बजकर 24 मिनट से लेकर 6 बजकर 35 मिनट के बीच एक के बाद एक सात ब्लास्ट हुए थे। ये सभी ब्लास्ट मुंबई के पश्चिम रेलवे पर लोकल ट्रेनों के फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में करवाए गए थे। खार, बांद्रा, जोगेश्वरी, माहिम, बोरीवली, माटुंगा और मीरा-भायंदर रेलवे स्टेशनों के पास ये ब्लास्ट हुए थे। ट्रेनों में लगाए गए बम आरडीएक्स, अमोनियम नाइट्रेट, फ्यूल ऑयल और कीलों से बनाए गए थे, जिसे सात प्रेशर कुकर में रखकर टाइमर के जरिए उड़ाया गया था।

धमाके का जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा आतंकी आजम चीमा

पुलिस के मुताबिक मार्च 2006 में लश्कर-ए-तैयबा के आजम चीमा ने अपने बहावलपुर स्थित घर में सिमी और लश्कर के दो गुटों के मुखियाओं के साथ इन धमाकों की साजिश रची थी। पुलिस ने कहा था कि मई 2006 में बहावलपुर के ट्रेनिंग कैंप में 50 युवकों को भेजा गया। उन्हें बम बनाने और बंदूकें चलाने का प्रशिक्षण दिया गया।

आरोपियों की रिहाई के बारे में हाईकोर्ट ऑर्डर के 4 पॉइंट

  • सबूत, गवाहों के बयान और आरोपियों से जो बरामद किया गया, वे उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
  • बम बनाने के लिए जो विस्फोटक इस्तेमाल हुए। सबूत के तौर पर उन्हें ठीक से नहीं रखा गया। पैकेट की सीलिंग भी खराब थी।
  • अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) अपराध में इस्तेमाल किए गए बमों के प्रकार को भी रिकॉर्ड में लाने में विफल रहा है।
  • आरोपियों के जो बयान लिए गए, उन्हें देखकर लगता है कि ये जबरदस्ती और चोट पहुंचाकर रिकॉर्ड करवाए गए हैं।

2006-Mumbai-Train-Serial-Blast-Case-All-12-Accused-Acquitted-After-19-Years-High-Court-Said-Public-Prosecutor-Failed-To-Prove-Guilt-189-People-Were-Killed-In-The-Incident




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