September 7, 2026 15:42:10

पंजाब में आप की नई पॉलिटिक्स: अपने ही 5 विधायकों के इलाकों में हल्का इंचार्ज लगा दिए; सवाल- टिकट किसे मिलेगी, किसकी कटेगी

Sep7,2026 | Enews Team | Punjah

पंजाब। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए बिसात बिछानी शुरू कर दी। पार्टी ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में हलका इंचार्ज नियुक्त करने शुरू कर दिए। पार्टी मई से लेकर अब तक 14 हलकों में नए हलका इंचार्ज नियुक्त कर चुकी है। सबसे रोचक बात यह है कि पार्टी ने पांच ऐसे हलकों में भी हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिए हैं जिनमें पहले से आम आदमी पार्टी के ही विधायक हैं। अब सवाल यही उठता है कि पार्टी विधानसभा चुनाव 2027 में हलका इंचार्ज को टिकट देगी या फिर मौजूदा विधायक को। जो भी हो, लेकिन हलके के कार्यकर्ताओं और आम लोगों में भी असमंजस बन गया है कि वो आगे किसके साथ काम करें? पार्टी सूत्रों की मानें तो हाईकमान ने ऐसे हलकों की एक लिस्ट तैयार की है जहां पर विधायकों के साथ हलका इंचार्ज लगाए जाने हैं। वहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना है कि पार्टी सिटिंग विधायक के होते हुए हलका इंचार्ज लगा रही है जिसका सीधा मतबल है कि सुप्रीमो विधायकों के कामकाज से संतुष्ट नहीं है।
खरड़ विधानसभा क्षेत्र
यहां से आम आदमी पार्टी की सिटिंग विधायक अनमोल गगन मान हैं। अनमोल गगन मान सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। इसके बावजूद पार्टी हाईकमान ने परमिंदर सिंह गोल्डी को खरड़ का नया हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिया है। गोल्डी की नियुक्ति के बाद से ही क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भारी हलचल है।
चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र
 इस सुरक्षित सीट से डॉ. चरणजीत सिंह चन्नी आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक हैं। यहां पार्टी ने संगठन को पुनर्गठित करते हुए जसबीर सिंह गढ़ी को हलका इंचार्ज की कमान सौंपी है। जिम्मेदारी मिलने के बाद से क्षेत्र के प्रशासनिक कामकाज में भी उनकी सक्रियता बढ़ गई है।

पट्टी विधानसभा क्षेत्र
सीमावर्ती हलके पट्टी से लालजीत सिंह भुल्लर विधायक हैं। पार्टी ने जसकंवर सिंह गिल (जस्सा गिल) को यहां का नया हलका इंचार्ज नियुक्त किया है। पूर्व मंत्री के हलके में नया इंचार्ज लगाया जाना पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए काफी चौंकाने वाला रहा है।

बठिंडा रूरल विधानसभा क्षेत्र
यहां से अमित रतन कोटफत्ता आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। विवादों और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच पार्टी ने यहां गोपाल सिंह को हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिया है। गोपाल सिंह की नियुक्ति से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी इस क्षेत्र में नए सिरे से अपना जनाधार मजबूत करना चाहती है।

अमृतसर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र
यहां से कुंवर विजय प्रताप आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। आम आदमी पार्टी ने उन्हें अभी पार्टी से नहीं निकाला है। पार्टी ने वहां इंप्रूवमेंट में ट्रस्ट के चेयरमैन कर्मजीत सिंह रिंटू को हलका इंचार्ज लगाया है। अब वो ही अमृतसर नॉर्थ में विधायक के होते हुए सभी काम करवा रहे हैं।

टिकट कटने का सीधा संकेत
पॉलिटिकल एक्सपर्ट एवं सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि पंजाब की राजनीति में हलका इंचार्ज नियुक्त करने का सीधा और स्पष्ट मतलब है कि अगले चुनाव की तैयारी में अभी से जुट जाओ। सिटिंग एमएलए के रहते हुए भी अगर पार्टी नए हलका इंचार्ज की नियुक्ति कर रही है, तो इसका सीधा संदेश यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में संबंधित विधायक की टिकट पर तलवार लटक गई है। जब पार्टी किसी दूसरे नेता को हलके की कमान सौंप देती है, तो वह नेता अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करने लगता है और जनता के बीच अपनी पैठ बनाता है। ऐसे में चुनाव आते-आते मौजूदा विधायक का प्रभाव कम हो जाता है और हलका इंचार्ज स्वाभाविक रूप से टिकट का सबसे प्रबल दावेदार बन जाता है।

बाकी विधायकों को भी कड़ा मैसेज
पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का आगे कहना है कि आम आदमी पार्टी ने 10 ऐसे हलकों में भी इंचार्ज लगाए हैं जहां पर उनके विधायक नहीं हैं। उन हलकों में हलका इंचार्ज नियुक्त करके विकास कार्यों और जनता की समस्याओं को हल करवाने की पूरी जिम्मेदारी उनको ही सौंपी गई है। वे ही अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर विधायकों से संबंधित सभी काम करवा रहे हैं और उनकी सीधे पब्लिक से कनेक्टिविटी है। लेकिन जिन 5 हलकों में सिटिंग एमएलए हैं, वहां इंचार्ज लगाने का मकसद सिर्फ उन 5 हलकों तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पार्टी हाईकमान ने पंजाब के बाकी सभी विधायकों को भी एक कड़ा और स्पष्ट मैसेज दे दिया है कि यदि उनके काम, जनता में छवि या ग्राउंड रिपोर्ट सही नहीं पाई गई, तो उनके हलकों में भी नया हलका इंचार्ज तैनात करने में देरी नहीं की जाएगी।

एमएलए के बावजूद हलका इंचार्ज अटपटा फैसला
पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट वैवस्वत वैंकट का कहना है कि सिटिंग एमएलए होने पर अकसर राजनीतिक पार्टियां अलग से हलका इंचार्ज नहीं लगाती हैं। उन्होंने विश्लेषण करते हुए कहा कि यदि किसी विधायक की परफॉर्मेंस ठीक नहीं भी होती, तब भी पार्टियां सार्वजनिक तौर पर हलका इंचार्ज नियुक्त करने से बचती हैं। आम तौर पर ऐसी स्थितियों में पार्टी अंदरखाने किसी एक भरोसेमंद नेता को गतिविधियां तेज करने और कैडर को संभालने को कह देती है, ताकि जनता के बीच असंतोष या गुटबाजी का संदेश न जाए। वैंकट मानते हैं कि खुले तौर पर विधायक के होते हुए इंचार्ज तैनात करना एक अटपटा और जोखिम भरा फैसला है।

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