ई न्यूज पंजाब,लुधियाना प्रार्थना सभा में श्रद्धेय श्री नरेश सोनी (भाई साहिब) जी ने सभी साधकों के साथ मिलकर परमपिता श्री राम एवं पूज्यनीय गुरुजनों से जाने अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा एवं सभी के लिए सुखी, स्वस्थ और सन्मानित जीवन माँगा। उन्होंने परम पूज्य स्वामी सत्यानन्द जी महाराज के उपदेशों का वर्णन करते हुए कहा कि निर्गुणी का संग नही करना है। क्योंकि गुणी का ही मूल्य होता है। हीरा चाहे पायल में जुड़ा हुआ हो उस का मूल्य उस की शुद्धता से होता है। ऊंचे कुल और वंश में जन्म ले कर भी यदि गुण नही हो तो संसार मे सत्कार नही होता। कोवा चाहे कल्प वृक्ष पर भी बैठ जाये उस का मान नही होता। गुण सज्जन के और गुरु के संग से ही विकसित हो सकते है। हमें निंदा करने वाले से कभी भी डरना नही है, क्योंकि वह हमें सही रास्ता दिखा सकता है। हमें अपने आप को अच्छा बनाना है। जैसे हमारे भाव होंगे वैसा ही जग हमारे लिए होगा। अच्छा बनने के लिए संत और सत्संग जरूरी है। संत्संगति से सज्जनता आ जाती है। जब भी कभी साधक सकटों में घिरा हो उस समय पूर्ण भक्ति व प्रेम भाव से राम नाम का सिमरन करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं। महाराज जी ने सामूहिक प्रार्थना में बहुत बल बताया है। सामूहिक तौर पर प्रार्थना करने से प्रभु की शीघ्र कृपा होती है। प्रभु बहुत दयालु हैं। उनकी कृपा सब पर बरसती है।