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राम जाप दे आनंद महान, मिले उसे जिसे दे भगवान- सोनी जी

Nov24,2019 | Enews team | Ludhiana

ई न्यूज पंजाब, लुधियाना "श्री रामशरणम्",किचलू नगर में साप्ताहिक श्री अमृतवाणी सत्संग में नरेश सोनी (भाई साहिब) ने कहा कि राम जाप दे आनंद महान, मिले उसे जिसे दे भगवान। तीन लोक का सार है सच्चा सुख है तो केवल राम नाम के जाप सिमरन ध्यान में है। सभी वेद पुराण राम नाम का गुण गान करते हैं। सभी साधु संतों ने राम नाम की आराधना करके ही सुख को पाया है। जिस ने भी राम नाम का सहारा लिया राम उसी के हो जाते है इस में कोई संशय नही है। जिस ने भी गुरु के सहारे अपनी जीवन नाव छोड़ दी उस को फिर बड़े से बड़े तूफानों में किनारा मिलता ही मिलता है। यदि मन में राम नाम के चिंतन का विचार भी आ जाये तो मान लो शुभ समय आने वाला है। मन को राम नाम के सिमरन में लगाना कठिन है। पर गुरु की कृपा से मन राम नाम के जप सिमरन में लगता है। मनुष्य में भावना का होना ज़रूरी है। सच्ची भावना वाला व्यक्ति ही प्रभु कृपा प्राप्त कर लेता है। उन्होंने श्री भक्ति प्रकाश जी में से "जनक ज्ञान" के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि राजा जनक दीक्षा लेने चाहते थे तो प्रभु कृपा से याज्ञवल्क्य मुनि उनके घर आते है। जनक जी ने उन से दीक्षा देने की प्रार्थना की तो गुरु ने कहा अपनी सब से प्यारी वस्तु मुझे दान में दो। तो जनक ने याज्ञवल्क्य मुनि को अपना मन दान में दिया। कुछ समय बाद मुनि ने जनक जी से उन का हाल पूछा तो जनक जी ने कहा मेरा मन ध्यान में स्थिर नही होता। इधर उधर भटकता रहता है। जो मुनि बोले तूने मन तो मुझे दान में दिया है तू इसे कैसे उपयोग कर सकता है। तो जनक जी को ज्ञान मिला कि मन गुरु चरणों में समर्पित और जीवन को श्री राम और गुरु के भरोसे छोड़ कर, के मन शांत हो सकता है ध्यान में स्थिर हो सकता है। जिस प्रकार जनक जी ने अपना मन ध्यान में लगाया उसी प्रकार हम भी अपने गुरु को मन दान में देकर, मन गुरु चरणों मे लगा कर अपनी चिंता राम भरोसे छोड़ कर शान्ति का अनुभव कर सकते हैं। पूर्ण समर्पण व भक्ति भाव से गुरु के पास जाने से ज्ञान की प्राप्ति होती है। जिस प्रकार हीरे का मूल्य उस के तराशने के बाद पड़ता है उसी प्रकार मनुष्य जीवन को गुरु तराश कर सफल बना सकते है।इस जीवन में मनुष्य का राम नाम के सिवा कोई सहारा नही है । केवल राम राम ही उसे भव से पार लगा सकता है। जिस प्रकार राजा जनक का गुरु ज्ञान से उद्धार हुआ, उसी प्रकार हमें भी गुरु के संग कर, अपना उद्धार करना है। सेवा प्रभु कृपा को प्राप्त करने का सबसे उत्तम साधन है।इस लिये जब भी हमें सेवा करने का सुअवसर मिले तो अवश्य करनी चाहिए। भाई साहिब ने सूचित किया कि 08.12.2019 को श्री राम शरणम्, गोहाना में जप यज्ञ के शुभ आरम्भ पर विशेष सत्संग प्रातःकाल 10-30 बजे से 12-00 बजे तक होगा।

Sri Ramsharnam




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