फर्जी हस्ताक्षर मामले में सांसद और राघव चड्ढा को को राज्यसभा से सस्पेंड कर दिया गया है। देश के गृहमंत्री अमित शाह की शिकायत पर ये एक्शन लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि राघव चड्ढा की ओर से जो प्रस्ताव राज्यसभा में रखा गया, उस पर सांसदो के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं। अब इस मामले की प्रिविलेज कमेटी इंक्वारी कर रही है और इस इंक्वायरी तक राघव चड्ढा राज्य सभा से सस्पेंड रहेंगे। बड़ी बात है कि अगर राघव चड्ढा इस इंक्वारी में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सांसद के पद से भी हाथ धोने पड़ सकते हैं। बड़ी बात है कि कल ही इस मामले में सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ एक प्रेस वार्ता भी की थी और अपने पर लगे आरोपों को झूठ करार दिया था। गौर हो कि राज्यसभा में सोमवार को दिल्ली सेवा बिल को लेकर जमकर बहस हुई थी और इसके बाद बिल पास भी हो गया था। आम आदमी पार्टी इस बिल का कड़ा विरोध कर रही थी, इसके बावजूद बिल पास हो गया। फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा चेयरमैन से जांच की मांग की। --यह है पूरा मामला। दरअसल, राघव चड्ढा ने सदन में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें दिल्ली से जुड़े बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की सिफारिश की और इस प्रस्ताव में उनके अलावा 4 अन्य सांसदों के हस्ताक्षर थे। इसमें प्रस्तावित सेलेक्ट कमेटी का भी जिक्र था, हालांकि, बाद में इन सांसदों ने कहा कि उन्होंने ऐसे किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं या सहमति नहीं जताई है। राघव चड्ढा के अलावा जिन चार सांसदों का जिक्र इसमें है, वो एस. कोन्याक, नरहरी अमीन, सुधांशु त्रिवेदी, सस्मित पात्रा और एम. थंबीदुरई शामिल थे, जिनके दिल्ली से जुड़े बिल की सेलेक्ट कमेटी में शामिल होने की बात कही गई। बीजेपी सांसद नरहरी अमीन ने कहा कि राघव चड्ढा ने मेरा नाम इस लिस्ट में लिया, उन्होंने इस बारे में मुझसे बात नहीं की और ना ही मैंने किसी तरह की सहमति दी है। राघव चड्ढा ने जो किया है वह पूरी तरह से गलत है। उनके अलावा अन्य सांसदों ने भी इस मसले की जांच की बात कही है। क्या कहता है नियम? बता दें कि राज्यसभा के नियम के तहत सांसदों ने नियम 722 के तहत चेयरमैन को अपना नोटिस दिया है, जहां राघव चड्ढा का मसला उठाया गया है। अगर आरोप सही पाया जाता है तो इस मामले में कुछ वक्त के लिए सस्पेंशन हो सकता है, वहीं अगर प्रिविलेज कमेटी की जांच में राघव चड्ढा दोषी पाए जाते हैं तो उनकी राज्यसभा सदस्यता भी जा सकती है।
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