लुधियाना। नगर निगम लुधियाना आये दिन अपने कार्यों को लेकर चर्चा में रहता है। अब ताजा मामला 10 करोड़ के टेंडरों को लेकर सामने आया है। इस दस करोड़ी टेंडर में घोटाले की आशंका को लेकर एफ़एंडसीसी मीटिंग में इतना विवाद हुआ कि सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर ने बायकाट तक कर डाला। जिसके चलते मीटिंग बीच में ही रोकनी पड़ गई। जिसके चलते अब मीटिंग दोबारा होगी। दरअसल, करीब तीन महीने पहले निगम के एक्सियन रहे हरजीत सिंह की आईडी से करीब दस करोड़ के टेंडर लगाए गए। चर्चा है की इन टेंडरों के पूल होने पर विवाद हो गया। जिसमें जो टेंडर पहले 25 से 40 प्रतिशत तक लेस पर जाते थे। वह टेंडर 1 से 5 प्रतिशत तक लेस पर देने की तैयारी कर ली गई थी। जबकि सबसे बड़ी बात यह सामने आयी कि जिस एक्सियन हरजीत सिंह की आईडी से यह टेंडर लगाए गए वह अधिकारी करीब तीन महीने पहले ही रिटायर्ड हो चुके है और मौजूदा समय में विदेश बैठे है। जिसके चलते सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर ने इन टेंडरों में भ्रष्टाचार की बदबू आने की आशंका जाहिर की गई। जिसके चलते उन्होंने इन टेंडरों को कैंसिल करने की मांग की थी।
टेंडर कैंसिल ना करने पर किया बायकाट
सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर ने जब इन टेंडरों पर विरोध जताया तो उन्हें शुक्रवार को होने वाली एफ़एंडसीसी की मीटिंग से पहले बुलाया गया। ताकि इन टेंडरों पर विचार किया जा सके। मीटिंग 12 बजे थी, लेकिन दोनों लीडरों को 11 बजे बुलाया गया। शुक्रवार को एफ़एंडसीसी की मीटिंग से पहले सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर दोनों निगम ऑफिस पहुंच गए। लेकिन वहा पर निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल नहीं पहुचे और मेयर पहुंची तो वह मीडिया को इंटरव्यू देती रही। 12 बजे जब मीटिंग शुरू हुई तो पाँच मिनट बाद ही सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर ने टेंडर को लेकर बायकाट कर दिया। उन्होंने कहा की अगर टेंडर रद्द होंगे तभी वह इस मीटिंग में शामिल होंगे।
अफसरों और विधायकों को रिश्वत देने के आरोप
वही चर्चा है की इन टेंडरों के पीछे बड़ा रिश्वत का खेल हुआ है। कहा जा रहा है की इन टेंडरों में अधिकारियों से लेकर विधायकों तक को मोटी रिश्वत दी गई है। जिसके बाद हीं टेंडर अलॉट किए थे। बस मीटिंग में इन्हें फाइनल कर मोहर लगाई जानी थी। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि आप पार्टी के कार्यकाल में भी एसे हेरफेर कर सरकार को चुना लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रो के अनुसार जिन ठेकेदारों को यह टेंडर अलॉट हुए अब वह अफसरों और लीडरों के ऑफिसों के चक्कर लगा रहे है। अब रिश्वत लेने वाले अफसर और लीडर परेशान है की रिश्वत तो ले ली, लेकिन टेंडर ना मिले तो दिक्कत हो जाएगी। जिसके चलते अब सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर को मनाने की कोशिशें की जा सकती है।
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