लुधियाना। बंदी सिखो के लिये आठ साल भूख हड़ताल करने वाले लुधियाना के गांव हसनपुर के बापू सूरत सिंह खालसा (92) का अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में निधन हो गया है। सूरत सिंह खालसा ने 2015 में बंदी सिक्खों की रिहाई के लिए अनशन पर रहे थे। वह 7 साल डीएमसीएच अस्पताल में भी दाखिल रहे। 16 जनवरी 2015 को सूरत सिंह खालसा ने भूख हड़ताल शुरू की जो करीब 8 वर्ष चली। उन्होंने सिख बंदी कैदियों की रिहाई की मांग के लिए भोजन और पानी पीने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने अपनी अदालती सजा पूरी कर ली है। जहां वे सिक्ख बंदी कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे, वहीं उन्होंने सभी धर्मों के कैदियों की बिना शर्त रिहाई की भी मांग की थी, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
पीएम को पत्र लिख की थी मांग
सूरत सिंह खालसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा जिसमें उन्होंने अपनी भूख हड़ताल का मकसद बताया था। अपने पत्र में सूरत सिंह खालसा ने अपनी मांगों को दो बिंदुओं में बताया। उन्होंने लिखा था कि सभी सिख कैदियों - विचाराधीन और सिख संघर्ष से संबंधित मामलों में सजा पाए लोगों- को राजनीतिक कैदी माना जाए और उन सभी कैदियों को रिहा किया जाए जिन्होंने अपनी पूरी सजा पूरी कर ली है और जिनकी रिहाई वैध है, ठीक उसी तरह जैसे देश के विभिन्न भागों में अन्य कैदियों को रिहा किया जाता है।
Bapu-Surat-Singh-Khalsa-Died-In-America-Imprisoned-Sikhs-Went-On-Hunger-Strike-For-Eight-Years-Remained-Admitted-In-Dmc-For-7-Years