पंजाब। पंजाब में औद्योगिक प्लॉट आवंटन से जुड़े बड़े घोटाले में विजिलेंस ब्यूरो ने एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSIEC) के इन आरोपियों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दर्शन कुमार उर्फ दर्शन गर्ग और अमरजीत सिंह, दोनों पूर्व एस्टेट अधिकारी और विजय कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सहायक शामिल हैं। विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, इन तीनों आरोपियों ने मोहाली की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण के तुरंत बाद विजिलेंस ब्यूरो ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि आरोपियों पर औद्योगिक प्लॉट आवंटन में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करने और घोटाले को अंजाम देने के गंभीर आरोप हैं।
एफआईआर और धाराएं
इस मामले में पहले ही 8 मार्च 2024 को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 409 (सरकारी सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन), 465, 467, 468, 471 (जाली दस्तावेज तैयार करना) और 120-बी (अपराधिक साजिश), के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)1 और 13(2) के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। यह मामला विजिलेंस थाना फ्लाइंग स्क्वाड-1, एसएएस नगर (मोहाली) में पंजीकृत है।
फर्जी दस्तावेजों से खेला बड़ा खेल
विजिलेंस की जांच में सामने आया है कि आरोपी अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी खरीदारों, जाली पते और नकली फर्मों का उपयोग करके औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन में भारी अनियमितताएं कर रहे थे। इस धोखाधड़ी से सरकारी संपत्तियों का गलत तरीके से आवंटन कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया। इसके लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी नामों से प्लॉट आवंटित किए गए थे, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
जांच जारी, और भी गिरफ्तारियां संभव
विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच अभी भी जारी है और आगे कुछ और आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। जांच के दौरान इस घोटाले से जुड़े और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। विजिलेंस विभाग ने पहले भी कई ऐसे घोटालों का खुलासा किया है और इस मामले में भी दोषियों को सजा दिलाने के लिए सख्त कार्रवाई जारी है।
घोटाले में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस मामले में गिरफ्तार किए गए सेवानिवृत्त अधिकारी और वरिष्ठ सहायक की संलिप्तता ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह सवाल उठ रहा है कि कैसे सरकारी पदों पर रहते हुए इन अधिकारियों ने भ्रष्टाचार को अंजाम दिया और सरकार की संपत्तियों का दुरुपयोग किया।
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