चंडीगढ़। पंजाब और चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में आठवीं कक्षा तक के छात्रों को आधा सत्र बीतने के बावजूद किताबें न मिलने पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए दो दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगर जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो पंजाब के स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और चंडीगढ़ के शिक्षा निदेशक को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा। चंडीगढ़ निवासी दीप्ति सिंह द्वारा दाखिल याचिका में एडवोकेट रंजन लखनपाल ने कहा कि सरकार आठवीं तक मुफ्त शिक्षा का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। याचिका में बताया गया कि आधे सत्र के बाद भी सरकारी स्कूलों के छात्रों को किताबें नहीं मिली हैं, जिससे गरीब छात्रों के लिए प्राइवेट स्कूलों के बच्चों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है।
समान अवसरों पर संविधान की गारंटी
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान करने की गारंटी देता है, लेकिन बिना किताबों के सरकारी स्कूलों के छात्र कैसे प्रगति कर पाएंगे? इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और यूटी प्रशासन से तत्काल जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए 4 अक्तूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और कहा है कि इस मामले में देरी स्वीकार्य नहीं है।
Free-Books-Not-Available-In-Punjab-Schools-High-Court-Issued-Notice-Also-Sought-Response-From-Chandigarh-Administration