चंडीगढ़। चंडीगढ़ में विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों को एक ईमेल मिली, जिसमें पासपोर्ट ऑफिस और पोस्ट ऑफिसों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। ईमेल में कहा गया है कि डाकघरों और पासपोर्ट ऑफिस में सायनाइड भरे कुल 14 जहरीले IED लगाए गए हैं। ईमेल में मैथ्यू वैनडाइक और जाफर सादिक को रिहा करने की बात लिखी गई है। यह ईमेल रविवार-सोमवार की दरमियानी रात 1 बजे भेजा गया और सोमवार दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर ब्लास्ट होने की बात कही गई। ई-मेल भेजने वाले ने खुद को आजाद द्रविड़ नाडु से जुड़ा हुआ बताया। इसमें उसने धमकी के पीछे की वजह तमिलनाडु में राजनीतिक, पुलिस के मामलों के साथ बांग्लादेश से जुड़ी घटनाओं पर नाराजगी को बताया है। इसके अलावा कुछ मामलों में अवैध पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों पर अन्यायपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। यह ईमेल मिलने के बाद चंडीगढ़ पुलिस एक्टिव हुई और पासपोर्ट ऑफिस खाली करवाकर उसकी तलाशी ली। हालांकि, पुलिस को कुछ मिला नहीं। इसके बाद टीम डाकघरों में नहीं गई। पुलिस का कहना है कि इस ईमेल का चंडीगढ़ से कुछ लेना-देना नहीं है, लेकिन एहतियातन पासपोर्ट ऑफिस की तलाशी ली गई है। इस ईमेल की जांच की जा रही और इसमें लिखी बातों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
ई-मेल में ये 3 बातें लिखी हैं…
1. अधिकारियों को मिली ई-मेल में लिखा है- बांग्लादेश के अबू सईद मामले से लेकर तमिलनाडु के साथनकुलम में बेनिक्स और जयराज मामले तक, और यहां तक कि तमिलनाडु के हालिया अजितकुमार कस्टोडियल मामले में भी, जिन पुलिसकर्मियों को सजा दी गई, वे असल में बेकसूर थे। इसलिए, असली दोषी वे राजनीतिक आका और पुलिस प्रमुख हैं, जो तमिलनाडु के मंत्रियों के इशारे पर निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर दबाव डालते हैं कि वे इस तरह की हिरासत में यातनाएं दें या गैर-कानूनी आदेशों का पालन करें।
2. ईमेल में आगे लिखा है- आज आपके पासपोर्ट/डाकघरों में हुआ धमाका चेन्नई में पुलिस सुधार लाने के लिए एक सबक बने। विशेष रूप से 1979 की नैनार दास पुलिस कॉन्स्टेबल यूनियन की सिफारिशों को पूरे भारत में, और खासकर तमिलनाडु पुलिस बल में लागू करने के लिए। यदि पुलिस कॉन्स्टेबलों के लिए कोई यूनियन काम करे, जो कि पुलिस बल का सबसे निचला तबका हैं, तो उनके पास ऐसे गैर-कानूनी आदेशों को मानने से इनकार करने का अधिकार होगा।
3. अंत में लिखा है- हम, 'तमिल लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन', साथनकुलम मामले में कॉन्स्टेबलों से लेकर इंस्पेक्टरों तक के पुलिसकर्मियों को दी गई दोहरी मौत की सजा की कड़ी निंदा करते हैं। इसके साथ ही, हम विभाग के असली दोषियों- यानी सबसे वरिष्ठ IPS अधिकारियों और राजनीतिक कचरे के खिलाफ युद्ध की घोषणा करते हैं। आपके पासपोर्ट/डाकघरों में हुआ यह धमाका तमिलनाडु के राजनीतिक अपराधियों और उनके गुलाम बने IPS अधिकारियों के लिए एक सबक बने।
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