September 11, 2026 08:52:55
चंडीगढ़ में बिजनेस करिए, सुविधाएं प्रशासन देगा, इसमें आईटी पार्क में ऑफिस, एसी, हाई स्पीड इंटरनेट भी;

चंडीगढ़ में बिजनेस करिए, सुविधाएं प्रशासन देगा, इसमें आईटी पार्क में ऑफिस, एसी, हाई स्पीड इंटरनेट भी; 3 जुलाई तक अप्लाई कर सकेंगे

Jun25,2026 | Enews Team | Chandigarh

चंडीगढ़। चंडीगढ़ में अगर आप नया स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो आपको अब ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। प्रशासन ही आपका मददगार बनेगा। इमारत से लेकर सारा सेटअप प्रशासन मुहैया करवाने जा रहा है। इसके लिए राजीव गांधी आईटी पार्क स्थित एंटरप्रेन्योर डेवलपमेंट सेंटर (EDC) में खाली पड़े स्पेस आवंटित किए जाएंगे। स्टार्टअप कंपनियों को वहां सेंट्रलाइज्ड एसी और 24 घंटे पावर बैकअप (बिना एसी के), हाई-स्पीड इंटरनेट, कॉन्फ्रेंस हॉल, सेमिनार हॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम, आइडिएशन रूम और पार्किंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी। काम प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर होगा, ताकि वे आसानी से अपना कारोबार आगे बढ़ा पाएं। इसके लिए तीन जुलाई तक युवा आवेदन कर पाएंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया चलेगी। हालांकि, कंपनियों के आवेदन के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं, जिनका उन्हें पालन करना होगा।

इंक्यूबेशन बे स्पेसः इसमें पहले और दूसरे फ्लोर पर कुल 9 समर्पित बे उपलब्ध हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 8,311 वर्ग फुट है। इसके लिए आरक्षित लाइसेंस शुल्क 142 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह (GST व अन्य लागू टैक्स) तय किया गया है।

को-वर्किंग स्पेसः को-वर्किंग स्पेस को 'ECOS' नाम दिया गया है, जिसमें कुल 103 को-वर्किंग सीटें उपलब्ध हैं। ग्राउंड फ्लोर (19 सीटें)- सीट के स्थान के अनुसार 7,200 रुपये से 7,842 रुपये प्रति सीट प्रति माह। सेकंड फ्लोर (16 सीटें)- 7,500 रुपये प्रति सीट प्रति माह। थर्ड फ्लोर (68 सीटें)- 10,537 रुपये प्रति सीट प्रति माह।

कॉल सेंटर व बैंक वाले नहीं कर पाएंगे आवेदन

आवेदन करने वाला स्टार्टअप केवल सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट, वेब डेवलपमेंट, डेटाबेस मैनेजमेंट, मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपमेंट या किसी भी तकनीक आधारित डेवलपमेंट सर्विसेज से जुड़ा होना चाहिए। कॉल सेंटर, बैंक ऑफिस, सेल्स एंड मार्केटिंग, BPO, KPO और ट्रेनिंग एजेंसियां इस आवंटन के लिए पात्र नहीं हैं। स्टार्टअप कंपनी, LLP, पार्टनरशिप फर्म या DPIIT से प्रमाणित होना चाहिए। स्टार्टअप का संचालन अधिकतम 10 वर्ष तक का हो और उसका सालाना टर्नओवर 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। कंपनी किसी भी सरकारी संगठन द्वारा ब्लैकलिस्टेड नहीं होनी चाहिए।

एक साल के लिए दिया जाएगा

इंक्यूबेशन बे का आवंटन शुरू में 1 वर्ष के लिए होगा, जिसे परफॉर्मेंस के आधार पर अधिकतम 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। को-वर्किंग स्पेस न्यूनतम 6 महीने के लिए भी आवंटित किया जा सकता है। हर महीने की 7 तारीख तक 100% एडवांस लाइसेंस फीस जमा करानी होगी। देरी होने पर इंक्यूबेशन बे के लिए 500 रुपये प्रतिदिन और को-वर्किंग स्पेस के लिए 100 रुपये प्रति सीट प्रतिदिन की पेनल्टी लगेगी। हर साल पूरा होने पर लाइसेंस फीस में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी। आवंटित स्पेस को किसी अन्य को सब-लेट (किराए पर) देने की अनुमति नहीं होगी।

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