September 10, 2026 03:21:34
पंजाब में फर्जी एनकाउंटर केस में 32 साल बाद सजा, रिटायर्ड Ssp और Dsp समेत 5 पुलिस अफसरों को उम्रकैद;

पंजाब में फर्जी एनकाउंटर केस में 32 साल बाद सजा, रिटायर्ड Ssp और Dsp समेत 5 पुलिस अफसरों को उम्रकैद; 7 लोगों की हत्या की थी

Aug4,2025 | Enews Team | Punjab

पंजाब। पंजाब के तरनतारन में 1993 में हुए फर्जी एनकाउंटर केस में सोमवार को CBI की स्पेशल कोर्ट ने सजा सुनाई। कोर्ट ने रिटायर्ड SSP भूपेंद्रजीत सिंह, DSP दविंदर सिंह, इंस्पेक्टर सूबा सिंह, ASI गुलबर्ग सिंह और ASI रघबीर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन सभी पर 7 लोगों की हत्या और आपराधिक साजिश यानी IPC की धारा 302 और 120-B के तहत मुकदमा चला। पहले इस केस में 10 पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन ट्रायल के दौरान 5 की मौत हो गई। मामला 1993 का है, जिसमें 7 लोगों को 2 अलग-अलग मुठभेड़ में मरा हुआ दिखाया गया था। जबकि इनमें 4 स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) के पद पर तैनात थे। दोषियों ने 27 जून 1993 को लोगों को उनके घरों से उठाकर कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखा और उन पर अत्याचार किए। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI को सौंपा केस

28 जुलाई 1993 को तत्कालीन डीएसपी भूपेंद्रजीत सिंह के नेतृत्व में फर्जी मुठभेड़ को अंजाम दिया गया। तरनतारन के थाना वैरोवाल व थाना सहराली में दो अलग-अलग फर्जी पुलिस मुठभेड़ की FIR दर्ज की गईं। 7 लोगों को फेक एनकाउंटर में मार दिया। सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 1996 के आदेश के बाद यह केस CBI को सौंपा गया। CBI जांच में हुआ खुलासा 2 जुलाई 1993 को पंजाब पुलिस ने दावा किया था कि 3 लोग शिंदर सिंह, देसा सिंह और सुखदेव सिंह सरकारी हथियारों के साथ फरार हो गए। इसके 10 दिन बाद यानी 12 जुलाई को तत्कालीन डीएसपी भूपेंदरजीत सिंह और इंस्पेक्टर गुरदेव सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने एक मुठभेड़ की कहानी बनाई।

पुलिस का दावा- रास्ते में हमला किया

पुलिस ने कहा कि डकैती के एक मामले में वसूली के लिए मंगल सिंह नामक व्यक्ति को घड़का गांव ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में आतंकवादियों ने हमला कर दिया। पुलिस के मुताबिक, दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में मंगल सिंह, देसा सिंह, शिंदर सिंह और बलकार सिंह मारे गए। लेकिन जब मामले की जांच CBI को सौंपी गई, तो 2 पॉइंट्स के आधार पर समझ आया कि मुठभेड़ फर्जी थी- 

  • पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि मरने से पहले इन लोगों को बुरी तरह से पीटा गया था। 
  • फोरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि जिन हथियारों को लेकर मुठभेड़ का दावा किया गया था, उनमें कई गड़बड़ियां थीं।

Punishment-After-32-Years-In-Fake-Encounter-Case-In-Punjab-5-Police-Officers-Including-Retired-Ssp-And-Dsp-Sentenced-To-Life-Imprisonment-Had-Killed-7-People



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