प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), दिल्ली जोनल कार्यालय ने मेसर्स पर्ल एग्रो कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और उसके समूह के मामले में 04.10.2024 को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तराखंड में 44 स्थानों पर मनी लांड्रिग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत सर्च आपरेशन चलाया गया था। इस सर्च आपरेशन के दौरान, विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए और उन्हें जब्त कर लिया गया। गौर हो कि इस सर्च अभियान के तहत ही ईडी ने लुधियाना में पर्ल ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू के राजदार कालोनाइजर विकास पासी के भी ठिकानों पर दबिश दी थी। ईडी ने सीबीआई द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। जिसमें आरोप लगाया गया है कि पीएसीएल इंडिया लिमिटेड (पीएसीएल) ने देश के विभिन्न हिस्सों में पब्लिक को प्लॉट अलॉट करने के एवज में विभिन्न्न इल्लीगल समूह निवेश योजनाओं के जरिए 18 सालों में 58 मिलियन निवेशको से करीब 49 हजार 100 करोड़ रुपए की राशि हड़पी और बाद में ये राशि कोलकता स्थित फर्जी सैल कंपनियों को लैंड डेवलपमेंट एक्सपेंसिव के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई। बाद में इस राशि को नगदी रुप में निकाल लिया गया और दिल्ली में पीएसीएल के प्रमुख सहयोगियों को सौंप दिया गया। बाद में निकाली गई करोड़ों रुपए की इस नगदी को हवाला के माध्यम से दुबई में पीएसीएल के प्रमुख सहयोगियों के नाम पर विदेशों में अचल संपत्तियों की खरीद के लिए कंपनियों में स्थानांतरित किया गया।
ईडी ने पहले ही 2018 में ऑस्ट्रेलिया में 462 करोड़ रुपये की 2 अचल संपत्तियां और 2022 में भारत में 244 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां जब्त की थीं। जब्त संपत्तियों का विवरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति के साथ साझा किया गया था, जो संपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया की देखरेख और निवेशकों को राशि वापस करने के लिए थी। बताया जाता है कि इसी नगदी का बड़ा हिस्सा देश में जमीन खरीद फरोख्त में भी इस्तेमाल किया गया। जिसके चलते ही ईडी ने शुक्रवार को देश भर में 44 स्थानों पर मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत छापामारी की गई थी। ईडी ने पीएसीएल और उससे संबंधित कंपनियों तथा निर्मल सिंह भंगू और उनके करीबी सहयोगियों के.एस.तूर, एम.एल. सहजपाल, प्रतीक, सी.पी.खंडेलवाल और अन्य सहित 11 संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं। आगे की जांच जारी है।
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चर्चा में आया कालोनाइजर विकास पासी का नाम
पर्ल ग्रुप की ओर से इल्लीगल समूह निवेश योजनाओं के तहत देश भर से करीब 50 हजार करोड़ रुपए एकत्र किया गया था। बीते शुक्रवार को ईडी की छापामारी में कालोनाइजर व एप्पल हाइट्स कॉलोनी के मालिक विकास पासी के सराभा नगर स्थित आलीशान कोठी व उसके अन्य ठिकानों पर हुई दबिश ने लोगों को पुरानी याददाशत को ताजा कर दिया है। करीब दस से पंद्रह साल पहले विकास पासी उपकार नगर में रहने वाले एक आम व्यक्ति थे और छोटे मोटे नक्शे डिजाइन का काम करते थे और आम पब्लिक के बीच स्कूटर में घूमते थे। लेकिन अब आम पब्लिक के बीच चर्चा इस बात की है कि मात्र 15 सालों में विकास पासी का तौर तरीका व शाही जिंदगी का स्टाइल कैसे उन्हें मिला। विकास पासी की जिंदगी के इस यूटर्न में बड़ा कारण पर्ल ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू के साथ उनका लिंक होना ही रहा। पासी की ओर से ही भंगू की गैर कानूनी इंवेस्टमेंट को सैट करने के लिए जमीनों की खरीद फरोख्त की। यही कारण है कि अब ईडी भी इसके सुराग ढूंढने में जुट गई है। ईडी की ओर से विकास पासी के 15 सालों में प्रॉपर्टी के लेनदेन व उनकी व उनके साथ जुडे़ पारिवारिक सदस्यों की इंवेस्टमेंट का पूरा खाका खंगाला जा रहा है। एकाएक 15 सालों में करोड़ों की राशि एकत्र कर हंबड़ा रोड पर एप्पल विला को डेवलेप करना और वहीं फिरोजपुर रोड़ पर गलाड़ा से करोड़ों का चंक खरीदने के अलावा पासी की साउथ सिटी में भी करोड़ों रुपए की इंवेस्टमेंट बताई जा रही है। ऐसे में विकास पासी के लिए अब ईडी के चक्रव्यहू से निकलना इतना आसान नहीं होगा। पारसमणि ग्रुप के अंडर ये विकास पासी की ओर से एप्पल हाइट जीरकपुर, एप्पल विला लुधियाना, प्रधानमंत्री अवास योजना के तहत लुधियाना में 100 अफोर्डएबल हाउसिस, टाउन स्कवेयर जीरकपुर जैसे अहम प्रोजेक्ट लाए जा चुके हैं।
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