जहां एक और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की ओर से लुधियाना नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 19 सीटें जीतने आने पर अपनी पीठ थपथपाई जा रही है लेकिन वहीं दूसरी ओर अगर इस पूरे चुनाव को 6 महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जाए तो भाजपा का ग्राफ एकदम से नीचे आता दिख रहा है। जहां बीजेपी इन लोकसभा चुनाव में लुधियाना की 6 विधानसभा सीटों में से पांच विधानसभा सीटों में जीत हासिल की थी और लुधियाना के 66 वार्डो मैं सबसे आगे रही थी लेकिन इस चुनाव में उसके मुकाबले केवल भाजपा 19 सीटें ही जीत पाई है। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने नगर निगम चुनाव के दौरान लुधियाना में अपनी मौजूदगी तो जरूर दिखाई है लेकिन बड़ी बात यह है कि वह इस नगर निगम चुनाव के दौरान जिन-जिन उम्मीदवारों के पास या उनकी चुनावी रैली में गए, उनमें से केवल दो उम्मीदवार ही जीत हासिल कर सके हैं और बाकी के उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा है। भाजपा को यह मंथन करने की जरूरत है कि लुधियाना में भाजपा जब शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में थी तो वह लुधियाना की 47 सीट पर चुनाव लड़ती थी और तब भी भाजपा 11 से 13 सीटें अमूमन जीत कर लाती थी । लेकिन इस बार भाजपा ने लुधियाना की 95 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे थे और ठीक इन चुनाव से 6 महीने पहले लोकसभा चुनाव में भाजपा का ग्राफ आसमान को छू रहा था, तो अचानक इस ऊंचाई से गिरावट में भाजपा का ग्राफ क्यों आया। क्या इस चुनाव में जिले की ओर से बेहतर उम्मीदवार नहीं उतारे गए या फिर मोदी के फैक्टर का भाजपा की ओर से सही इस्तेमाल नहीं किया गया। इन नगर निगम चुनाव के नतीजे से साफ हो गया है कि लुधियाना में सभी पार्टियों का ग्राफ नीचे आया है । चाहे वह आम आदमी पार्टी है, चाहे कांग्रेस है, चाहे बीजेपी है और चाहे शिरोमणि अकाली दल है । वहीं अब इस सबके बीच भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस मिलकर लुधियाना में अपना मेयर लाने के पर विचार कर रही है और इसमें भी केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू अहम भूमिका निभा सकते हैं बिट्टू के कांग्रेस में बहुत गहरे संबंध है और खासकर लुधियाना के जिला प्रधान संजय तलवार भी उनके घनिष्ठ मित्रों में शामिल है। लेकिन यह बड़ी अजीब स्थिति है कि जहां केंद्र में भाजपा और कांग्रेस धुर विरोधी है वही लुधियाना में यह दोनों ही पार्टियों एकजुट होकर अपना मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर लाने की प्लानिंग में है । भले ही इस फार्मूले को लुधियाना की डेवलपमेंट के साथ जोड़कर बनाया जा रहा है लेकिन इस पूरे माहौल में में यह नहीं भूलना चाहिए कि अगले 2 सालों के बाद पंजाब में फिर से विधानसभा चुनाव होने हैं और 2 साल के बाद इस नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन कहां खड़ा होगा । यह भी अभी से मंथन करने की जरूरत होगी।
Municipal-Corporation-Elections-And-Bjp-Union-Minister-Of-State-Ravneet-Singh-Bittu-Is-Patting-Himself-On-The-Back-But-Know-What-Is-The-Reality