लुधियाना में कांग्रेस और भाजपा मिलकर अपना मेयर बनाएगी, इस फार्मूले को लेकर भाजपा हाई कमान के पास मामला फंसता दिखाई दे रहा है। अभी तक लुधियाना जिले की इस प्लानिंग को भाजपा हाई कमान से हरी झंडी नहीं मिल पाई है। सूत्र बताते हैं कि दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की ओर से आजाद उम्मीदवारों व अन्य पार्टियों से जीते काउंसलर्स को अपने हक में करने के लिए होर्स ट्रेडिंग शुरु की जा चुकी है। बड़ी बात है कि जालंधर में भी इसी तरह की होर्स ट्रेडिंग का खेल पहले से आरंभ हो चुका है और यहां पर 4 आजाद कौंसलर्स को आम आदमी पार्टी अपने हक में कर चुकी है। इसी का नतीजा है कि लुधियाना में आम आदमी पार्टी ने ईस्ट हल्के के वार्ड नंबर 11 से आजाद चुनाव जीती दीपा रानी चौधरी को अपनी पार्टी में शामिल करवा लिया। ऐसे में आम आदमी पार्टी अपना मेयर बनाने की ओर एक कदम ओर आगे बढ़ गई है। जबकि कांग्रेस व भाजपा साल 1991- 92 की तरह कांग्रेस बीजेपी की गठबंधन के तहत चौधरी सत प्रकाश को मेयर बनने के फार्मूले के तहत ऐसा करना चाह रहे हैं । लेकिन बड़ी बात है कि साल 1992 और दिसंबर 2024 में दोनों की परिस्थितियों एकदम से भिन्न है । क्योंकि भाजपा हाई कमान दो महीने बाद दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है और वह लुधियाना में नगर निगम स्तर पर कांग्रेस और भाजपा का गठबंधन कर आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव दौरान किसी तरह का तंज करने का मौका देना नहीं चाहती। यही कारण है कि अभी तक भाजपा हाई कमान की ओर से जिले के इस फार्मूले को हरी झंडी नहीं दी गई। लेकिन वही आम आदमी पार्टी के लिए भी मुश्किलें आसान होती नहीं दिख रही । इसका बड़ा कारण है कि आम आदमी पार्टी के पास 41 काउंसलर और छह विधायकों की वोटें उनके पास है। वहीं कांग्रेस और भाजपा के समझौते संबंधी जब भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री मंथरी श्रिनिवासु से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ये फैसले हाईकमान को भेजा गया और उनकी मंजूरी के बाद ही ये संभव हो पाएगा।
हाउस बनाने में आप के विधायक निभा सकते हैं अहम भूमिका, इसमें भी अड़चन
नगर निगम का हाउस बनाने में आम आदमी पार्टी के छह विधायक अहम भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पांच काउंसलरों की जरुरत पड़ने वाली है। म्यूनिसिपल एक्ट 1077 में निगम का हाउस बनाने में विधायकों की वोट को जोड़ा जा सकता है, इसका कोई प्रावधान नहीं हैं। लेकिन साल 1997 में सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन व साल 2019 लोकल गर्वमेंट की ओर से जारी एक पत्र मुताबिक विधायक की वोट का इस्तेमाल हाउस बनाने को किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो निगम के कुल 95 कौंसलर में अगर आप के 6 विधायक जोड़ दिए जाते हैं तो ये आंकड़ा 101 पर पहुंच जाता है। ऐसे में आप को अपना हाउस बनाने के लिए भी 51 काैंसलरों की जरुरत पडे़गी। वहीं अगर कांग्रेस व भाजपा का समझौता हो जाता है तो कांग्रेस के 30 और भाजपा के 19 मिलाकर उनका आंकड़ा 49 पर पहुंच जाता है और एक आजाद उम्मीदवार जो भाजपा से संबंधित है, उसे साथ लेकर ये तादाद 50 की हो जाती है। जबकि कांग्रेस भाजपा 48 कौंसलर के साथ अपना हाउस बना सकते हैं।
लुधियाना में आप को घेरना चाह रही कांग्रेस व भाजपा
जहां तक लुधियाना में कांग्रेस व भाजपा के नगर निगम स्तर पर समझौते की बात है तो इसका अहम कारण लुधियाना में कांग्रेस व भाजपा आप की जडे़ कमजोर करना चाहती है। अगर ये दोनों मिलकर अपना मेयर बना लेते हैं तो आप शहरी एरिया में सात विधायक होने के बावजूद कांग्रेस व भाजपा नगर निगम से संंबंधित अहम फैसले लेने में सक्षम हो जाएगी। वहीं आम आदमी पार्टी के विधायकों की मनमानी भी कहीं न कहीं कम हो जाएगी। यही कारण है कि कांग्रेस व भाजपा दोनों के लोकल नेता अपनी मजबूती को इस समझौते को तैयार हैं।
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