आखिरकार पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का शिकंजा अब दयानंद मेडिकल कॉलेज पर कसना शुरु हो गया है। बीते शनिवार को पीपीसीबी लुधियाना के चीफ इंजीनियर आरके रत्तड़ा के पास दयानंद मेडिकल कालेज को जारी किए गए नोटिस की हियरिंग रखी गई थी और इस हियरिंग में डीएमसी की मैनेजमेंट से फाइनांस हैड उमेश गुप्ता पहुंचे थे। इस के अलावा उनके साथ शहर में बायो मेडिकल वेस्ट उठाने का कांट्रेक्ट चलाने वाला एक कारोबारी भी साथ में मौजूद रहा। बताया जाता है कि इस हियरिंग से कुछ मिनट पहले डीएमसी हीरो हार्ट का एक सीनियर डाक्टर भी पीपीसीबी चीफ आफिस में इसी मामले में सिफारिश करने को भी पहुंचा था । गौर हो कि पीपीसीबी ने दयानंद मेडिकल कालेज, दंडी स्वामी को अंडर सेक्शन 31 ए व 33 ए के तह वॉटर और एयर का नोटिस जारी किया था। सूत्र बताते हैं कि डीएमसी प्रबंधन की ओर से फिर ये राग अलापे गए हैं कि एजुकेशनल इंस्टीटयूट हैं, इसलिए उन्हें कंसेंट की जरुरत नहीं है। लेकिन यहां आपको साफ कर दें कि मेडिकल यूनिवर्सिटी व इंस्टीटयूट को इंवायरनमेंट क्लीयरेंस लेना अनिवार्य है और इस संबंधी समय समय पर पर गाईडलाइंस भी जारी होती रही हैं, लेकिन बोर्ड अफसरों की सेटिंग के चलते नियमों की उंल्लघना होती रही है। लेकिन अब ये पूरा मामला बोर्ड के आला अफसरों तक पहुंचने के बाद लुधियाना स्तर के अफसर हरकत में आते दिख रहे हैं। यहां आपको ये भी बता दें अभी तक दयानंद मेडिकल कालेज पीपीसीबी से कंसेंट लिए बिना ही चलाया जा रहा था। ऐसे में बोर्ड की अनदेखी के चलते डीएमसी मैनेजमेंट की ओर से जमकर नियमों की उंल्लघना की जा रही थी। गौर हो कि ई न्यूज पंजाब वैबचैनल की ओर से सालों से चली आ रही इस सेटिंग के खेल को उजागर करने के बावजूद बोर्ड अफसर अभी तक उक्त मामले में सख्त एक्शन लेने में कतरा रहे हैं। बताया जाता है कि आज की हियरिंग में भी डीएसमी मैनेजमेंट खानापूर्ति करते ही दिखाई दिए और बेहद कम दस्तावेजों के साथ बोर्ड आफिस पहुंचे और हियरिंग दौरान वे 20-25 का दिन का समय मांग कर फिर से उक्त मामले को मैनेज करने में जुटे रहे।
इस मेडिकल कॉलेज की ओर से नई बिल्डिंग निर्माण में एनवायरमेंट क्लीयरेंस ना लिए जाना भी सवालों के घेरे में है। गौर हो कि 20000 स्क्वायर मीटर से ऊपर की कंस्ट्रक्शन पर नियमों के तहत एनवायरमेंट क्लियरेंस लेनी जरूरी होती है, लेकिन इस निर्माण में सब कुछ दरकिनार कर दिया गया। पीपीसीबी की ओर से जारी नोटिस में ये साफ किया गया है कि दयानंद मेडिकल कालेज में कुल पांच ब्लॉक बनाए गए हैं और इसमें ग्राउंड फलोर के अलावा छह छह मंजिलें बनाई गई हैंं। अगर दयानंद मेडिकल कॉलेज पीपीसीबी की इंस्पेक्शन में एनवायरमेंट क्लीयरेंस के घेरे में आया तो इनके लिए बोर्ड से कंसेंट तक लेना तक मुश्किल हो जाएगा क्योंकि बोर्ड से कंसेंट लेने के लिए एनवायरमेंट क्लीयरेंस का स्टेप क्लियर करना बहुत जरूरी है। आपको यहां ये भी बता दें पीपीसीबी के चीफ इंजीनियर आरके रतड़ा बोर्ड के सबसे ईमानदार अफसरों में आते हैं और सालों लुधियाना में कार्यरत होने के बावजूद कभी उन पर रिश्वत का दाग नहीं लगा। हमेशा ही वे अपना कार्य व जिम्मेदारी बेहद ईमानदारी से निभाते आए हैं। लेकिन अब उनके पास लुधियाना की बतौर चीफ इंजीनियर कमान हैं और ऐसे में डीएमसी के लिए अब ये पूरा घालमाल मैनेज करना बेहद कठिन होता दिख रहा है। लुधियाना आर के रतड़ा से इस संबंधी बात की गई तो उन्होंने बताया कि दयानंद मेडिकल कॉलेज को बोर्ड की ओर से नोटिस के तहत आज हियरिंग की गई थी। लेकिन अभी तक कंसेंट के लिए जरुरी दस्तावेज तक डीएमसी मैनेजमेंट उपलब्ध नहीं करवा पाई है और उनकी ओर से कुछ ओर समय मांगा गया है।
Dmc-Exploits-Management-Officials-Arrived-At-Ppcb-Hearing-With-Incomplete-Documents-A-Senior-Doctor-Also-Arrived-To-Make-Recommendations-In-The-Matter