यशपाल शर्मा, लुधियाना
दिल्ली विधानसभा के नतीजे पंजाब के अगले दो साल का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। ये बात सुनने में थोड़ी अजीब है, लेकिन ये है पूरी तरह से सच। 5 फरवरी को दिल्ली की 70 विधानसभा सीट पर चुनाव को पब्लिक वोट कर चुकी है और आगामी 8 फरवरी को सुबह करीब 11 बजे तक साफ हो जाएगा कि दिल्ली में किस पार्टी की सरकार बनने जा रही है। किसी भी पार्टी को दिल्ली में अपनी सरकार बनाने के लिए 36 सीटों की जरुरत है और जिसके पास ये जादुई आंकड़ा होगा, वे साल 2025 में अपनी सरकार बनाएगा। बात करें इस चुनाव को लेकर आ रहे एग्जिट पोल की तो इस बार दिल्ली में भाजपा का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है और आम आदमी पार्टी के लिए तीसरी बार दिल्ली में सरकार बनाना इतना आसान दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में एग्जिट पोल के आंकडे़ सही रहे और दिल्ली में भाजपा अगर अपनी सरकार बना लेती है तो पंजाब के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा ऊथल पुथल देखने को मिल सकता है और पंजाब के मुख्यमंत्री स. भगवंत मान की बेबसी बढ़ सकती हैं। इसका बड़ा कारण है कि दिल्ली के बडे़ आप नेता गर्वमेंट पाॅवर का आनंद लेने को पंजाब में डेरा डाल सकते हैं और इतना ही नहीं खुद दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल भी अपने अगले पांच साल का राजनीतिक भविष्य साधने काे पंजाब पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। बड़ी बात है कि पंजाब में इस समय कईं अहम पदों पर दिल्ली में आईएएस पद पर रह चुके कईं अफसर बिठाए जा चुके हैं और अगर आप की दिल्ली में बिसात बिखरी तो दिल्ली के कईं भरोसेमंद अफसर पंजाब में लगाए जा सकते हैं। इतना ही नहीं चर्चा तो ये भी है कि आप सुप्रीमों व दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल पंजाब में अपना राजनीतिक सफर शुरु करने पर विचार कर रहे हैं और वे लुधियाना में वेस्ट विधानसभा की खाली सीट जहां से पहले गुरप्रीत गोगी विधायक थे, पर अपना दावा ठोक सकते हैं। हालांकि इस तरह की चर्चाएं दिल्ली चुनाव नतीजों से पहले करना जल्दबाजी होगा, लेकिन अगर चुनाव परिणाम उलटे आते हैं तो ऐसी ही चर्चाओं को हकीकत में बदलने में अधिक समय नहीं लगेगा।
पंजाब के आप नेताओं का चुनावी टैस्ट
दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर पिछले करीब डेढ़ महीने से पंजाब मंत्रिमंडल के 95 फीसदी नेता दिल्ली में डेरा लगाए हुए थे और इसका नतीजा था कि पिछले करीब 45 दिनों से पंजाब के अधिकतर विभागों का कामकाज भी लगभग ठप हो कर रह गया था। बडे़ नेताओं की गैर मौजूदगी में इन विभागों के अफसर कोई बड़ा फैसला खुद नहीं ले पा रहे थे। अब इन नेताओं की पंजाब वापसी तो हो गई है, लेकिन अब सबकी नजर उन सीटों के चुनाव नतीजों पर टिकी हुई हैं, जहां पर वे चुनाव प्रचार को डटे हुए थे। ऐसे में जहां दिल्ली के चुनाव नतीजे पंजाब के नेताओं का बड़ा टेस्ट साबित होने वाले हैं और इसके बाद अगर किसी सूरत में अगर दिल्ली में आप सरकार वापसी नहीं करती तो भी इन नेताओं का अगले दो साल का कार्यकाल बेहद कठिन होने वाला हो सकता है।
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पंजाब में खराब रिपोर्ट कार्ड वाले विधायकों की कटेंगी टिकटें
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी की ओर से 26 मौजूदा विधायकों की टिकटें काट दी गई और 4 विधायकों का चुनाव क्षेत्र बदल डाला गया। ऐसे में एक बात साफ है कि पंजाब में ऐसे विधायक जिनका रिपोर्ट कार्ड पब्लिक व वालिंटियर के बीच रिश्वतखोरी सहित अगर अन्य कारणों से खराब चल रहा है तो साल 2027 में पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनका टिकट कटना यकीनी है। बताया जाता है कि आम आदमी पार्टी ने अंदरखाते इस पर काम भी शुरु किया जा चुका है। इतना हीं पंजाब में एक बार फिर से मंत्रियों के विभागों में फेरबदल व कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह भी दी जा सकती हैं।
The-Results-Of-The-Delhi-Assembly-Elections-Will-Decide-The-Political-Future-Of-Punjab-There-Is-Also-Talk-Of-Arvind-Kejriwal-Contesting-Elections-In-Punjab