बीते शुक्रवार बाद दोपहर को मेयर कैंप ऑफिस में हुई फाइनेंस एंड कांट्रैक्ट कमेटी की बैठक विवादों में आती दिखाई दे रही है मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर की अगुवाई में यह पहले एफएमसी बैठक थी और उनकी ओर से बुलाई पहले ही बैठक विवादों में आ गई है। एफ एंड सीसी की मीटिंग का कोरम पूरा करने के लिए नगर निगम कमिश्नर सहित कल चार मेंबरों की मौजूदगी अनिवार्य थी, लेकिन इस मीटिंग में कमिश्नर सहित केवल तीन मेंबर ही मौजूद दिखाई दिए। जिसमें मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पाराशर नगर निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल मौजूद रहे, जबकि इस मीटिंग से डिप्टी मेयर प्रिंस जोहर गैर हाजिर रहे। मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर ने प्रिंस जौहर की गैर मौजूदगी का कारण उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं होने बताया था और उनका स्वास्थ्य इतना बिगड़ गया कि उन्हें अस्पताल तक भर्ती करवाने की बात मेयर साहिबा की ओर से की गई। इतनी गंभीर मेडिकल ग्राउंड में प्रिंस जोहर का 2 से 3 दिन आराम जरूरी था, लेकिन प्रिंस जौहर इस मीटिंग के 12 घंटे बाद ही आत्म नगर हलके के वार्ड नंबर 42 में 25 हॉर्स पावर के ट्यूबवैल का उद्घाटन करते दिखाई दिए। उनके साथ हल्का आत्मनगर के विधायक कुलवंत सिद्धू भी मौजूद रहे। इससे एक बात तो साफ होती है कि प्रिंस जौहर का एफएंडसीसी बैठक में ना आने का कारण मेडिकल ग्राउंड तो नहीं रहा होगा, बल्कि इसमें कहीं ना कहीं राजनीतिक खींचतान बड़ा कारण माना जा रहा है । ऐसे में डिप्टी मेयर की गैर मौजूदगी में हुई यह मीटिंग अवैध मीटिंग बन कर रह गई। बताया जाता है कि इस एफएमसी की बैठक में 80 फीसदी काम एक ही विधानसभा से संबंधित थे, जिसके चलते अन्य विधानसभा के विधायक इस मीटिंग के बुलाई जाने से ना खुश थे। इस पहली बैठक में एक दर्जन के करीब कामों को मंजूरी दी गई। इस तरह की गलती के लिए मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर के पास नगर निगम का तजुर्बा ना होना भी है, क्योंकि वह पहली बार पार्षद चुने जाने के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी की ओर से उन्हें मेयर के पद पर बैठा दिया गया है। ऐसे में मेयर साहिब के लिए सबसे पहले आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों को साथ लेकर चलना ही उनके लिए सबसे बड़ा चैलेंज बनता दिख रहा है। अगर वह किसी एक विधायक की ओर झुकती हैं तो ऐसे अन्य विधायकों की नाराजगी उन्हें झेलनी पड़ सकती है।
कमिश्नर सहित छह सदस्यों से बनती है एफएंडसीसी कमेटी
नियमों के मुताबिक एफएंडसीसी की मीटिंग के लिए छह सदस्यों की कमेटी बनती है। जिसमें मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, निगम कमिश्नर और दो अन्य एफ एंड सीसी मेंबर रहते हैं। जिनमें एक सत्ताधारी पार्टी का एक मेंबर और एक विपक्ष का पार्षद मेंबर बनता हैं। चर्चा है कि इस मीटिंग में सिर्फ तीन मेंबर ही मौजूद थे, जिनके हस्ताक्षरों से एजेंडे पास किए गए हैं। हालांकि निगम कमिश्नर का एफएंडसीसी मीटिंग में रोल सिर्फ सेक्रेटरी का होता है।
आप विधायकों में बन सकती है टकराव की स्थिति
चर्चा है कि एक विधायक द्वारा खुद को सुपर पॉवर बनाने के लिए यह एमरजेंसी मीटिंग रखवाई गई थी, ताकि वह अपने प्रोजेक्ट्स को पास करवा सके। इसी वजह से विधायकों के आपसी टकराव की चर्चाएं छिड़ गई है। चर्चा है कि सत्ताधारी पार्टी का बाहुबली विधायक एक तरफ और बाकी विधायक एक तरफ हैं। चर्चा है कि सुपर पॉवर बनना चाहते विधायक के कार्यों को निगम में ज्यादा तवज्जो दी जा रही है। जिस कारण बाकी विधायक इस बात से खफा हैं।
एफएंडसीसी की पहली मीटिंग में ही दिखाई दी आप की मनमर्जी- मेहता
वहीं भाजपा नेता व मीडिया पैनलिस्ट परमिंदर मेहता ने कहा कि एफएंडसीसी की हुई मीटिंग पूरी तरह से इललीगल है। पहले निगम हाउस की मीटिंग होती है, उसमें एफएंडसीसी कमेटी मेंबरों की घोषणा होती है। अगर इसके बिना भी यह मीटिंग होती है तो मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर की मौजूदगी अनिवार्य है और किसी एक की गैर मौजूदगी इस पूरी मीटिंग को अवैध बना देती है। लेकिन यहां पर मनमर्जी से कमेटी बना मीटिंग की गई। इस संबंधी लोकल बॉडी सेक्रेटरी को पत्र लिखा जा रहा है। ताकि इस मीटिंग में पास हुए एजेंडों को कैंसिल किया जाए।
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