नगर निगम में घोटाले थमने का नाम नहीं ले रहे। यहां बडे़ बडे़ घोटालों को अंदरखाते अंजाम दे दिया जाता है और अगर मामला फंस जाता है, तो संबंधित फाइल तक को गायब कर दिया जाता है। ऐसा ही मामला लुधियाना के सग्गू चौक और फिरोजपुर रोड के बीच में बने होटल ऑन से संबंधित कंपाउडिंग फाइल का है। मोटी रिश्वत लेकर इस होटल की उस 37 हजार स्कवेयर फीट जगह को कंपाउंड कर ड़ाला, जो संभव नहीं था। यानि मोटी रिश्वत के खेल में होटल के इल्लीगल हिस्सा जो नॉन कंपाउंड ऐबल था, उसे भी कंपाउंड कर दिया गया। इस पूरे मामले की जांच लोकल गर्वमेंट का सीवीओ सैल कर रहा है। लेकिन जब से इस मामले की जांच शुरु हुई है, तब से इसमें कईं चौकान्ने वाले मामले सामने आ रहे हैं। सबसे पहला चौकाने वाला मामला इस में ये सामने आया कि जांच शुरु होते ही इस होटल की फाइल ही आफिस से गायब कर दी गई और चंडीगढ़ के आला अधिकारियों तक को ये तो बताया जा रहा है कि उन्हें इसकी फाइल नहीं मिल पा रही। लेकिन बिल्डिंग ब्रांच के किसी अधिकारी व कर्मचारी ने ये फाइल मिसिंग होने संबंधी कोई एफआईआर पुलिस में दर्ज नहीं करवाई। यानि ये पूरा खेल अफसरों की सहमति से खेला जा रहा है। इस पूरी बिल्डिंग को पहले नाजायज ढंग से सात मंजिला खड़ा कर दिया गया और पार्किंग को रखी बेसमेंट को भी सालों से बैंकट हॉल में तबदील किया जा चुका है। वहीं कईं महीनों पहले ली गई कंपाउंडिंग फीस के बावजूद इस होटल का 37 हजार स्कवेयर फीट नॉन कंपाउंडएबल हिस्सा तोड़ा नहीं गया। अब ये पूरा मामला चंडीगढ़ में जांच के दायरे में है और इसकी फाइल डायरेक्टर लोकल बॉडीज के पास एक्शन लेने को टेबल पर पड़ी हैं।
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होटल मालिक पर मेहरबानी में एमटीपी का दोहरा चार्ज लेने वाले एसई व एटीपी का पूरा हाथ
बताया जाता है कि होटल ऑन का नॉन कंपाउंड एरिया को लेकर कोई भी अफसर, इंस्पेक्टर इस फाइल पर हाथ डालने को ड़रता था। लेकिन बीएंडआर के एसई संजय कंवर को एमटीपी का चार्ज मिलते ही उन्होंने नियमों की परवाह किए बिना इस होटल की फाइल को कंपाउंड करने तक रिस्क उठा अपनी नौकरी तक दांव पर लगा दी। बताया जाता है कि सुविधा सेंटर से काटी गई अंतिम रसीद पर फाइल कंपाउडिंग फीस तक लिखकर करीब 3 लाख रुपए जमा करवाया गया। बताया जाता है कि इस होटल के एवज में बिल्डिंग मालिक 27 लाख रुपए पक्के में निगम को दे चुका है। बताया जाता है कि इस कंपाउडिंग में एसई संजय कंवर व एटीपी मोहन सिंह चंडीगढ़ में खूब चर्चा में आए हुए हैं। नॉन कंपाउंड एरिया के एवज में कंपाउडिंग फीस लेने में एसई संजय कंवर के साथ एटीपी मोहन सिंह की अहम भूमिका रही है। हैरानी की बात ये है कि जांच शुुरु होते ही इस होटल की फाइल को निगम डी जोन के बिल्डिंग आफिस से गायब कर दिया गया। फाइल गुम होते ही इस फाइल पर हस्ताक्षर करने में भी कुछ निचले स्तर के स्टाफ मुकर गया है, लेकिन एसई संजय कंवर व एटीपी मोहन सिंह ने अपने बयानों में माना है कि उन्होंने इस फाइल पर हस्ताक्षर किए हैं। इन अफसरों का ये भी कहना है कि फाइल में होटल मालिक का एफिडेविट भी है, जिसमें उसने नॉन कंपाउंड एरिया गिराने पर अपनी सहमति दे रखी है, लेकिन अब फाइल गुम है, इसलिए नगर निगम भी इस बिल्डिंग पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। लेकिन कंपाउडिंग के इस पूरे दांव पेच में होटल मालिक को कहीं न कहीं पूरा फायदा निगम अफसरों की ओर से दिया जा चुका है।
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तोहफे में मर्सीडीज देने में लुधियाना नगर निगम के अफसर पहले से चर्चा में
जहां एक ओर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से ईमानदारी के दावे धड़ल्ले से किए जा रहे हैं और पंजाब विजिलेंस ब्यूरो भी रिश्वतखोरी के खिलाफ धड़ल्ले से एक्शन लेता पिछले दो तीन सालों में नजर आया है। लेकिन इसके बाजवूद लुधियाना नगर निगम के अफसर बड़ी बड़ी धांधली करने में सरकार व विजिलेंस ब्यूरो की कोई परवाह नहीं कर रहे। आपको बता दें पिछले कुछ समय में नगर निगम के एक अधिकारी का नाम भी अपनी पत्नी को मर्सीडीज कार तोहफे में देने को लेकर चर्चा में आया हुआ हैं। इस होटल में जिस लिहाज से लाखों रुपए का लेनदेन किया गया है, उससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर किसी अधिकारी को केवल हस्ताक्षर करने के लिए लाखों रुपए मिल जाएं तो ऐसे में किसी भी अधिकारी के लिए अपनी पत्नी को मर्सीडीज कार तोहफे में देना कोई बड़ी बात नहीं हैं।
Hotel-Onn-In-Ludhiana-In-News-Even-Thousands-Of-Feet-Of-Non-Compoundable-Part-Was-Not-Demolished-And-Compounding-Was-Done-In-The-Game-Of-Bribe