यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना की वेस्ट विधानसभा चुनाव में खडे़ विभिन्न पार्टी उम्मीदवारों के लिए मई जून की तपती गर्मी में चुनावी कैंपेन चला पाना बड़ा चैलेंज जैसा रहा है। अब हालात ऐसे हैं कि कोई भी उम्मीदवार सुबह 7 बजे से 10 बजे और शाम में 6 बजे के बाद ही पब्लिक के बीच जाकर अपने हक में वोट मांग पा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से लुधियाना वेस्ट विधानसभा चुनाव की वोटिंग को 19 जून की तारीख तय कर दी है। ऐसे में अब मात्र 25 दिन ही हर एक उम्मीदवार के लिए अपने प्रचार को बचे हैं। इस चुनावी कैंपेन की बात करें तो आप उम्मीदवार संजीव अरोड़ा का पलड़ा सबसे अधिक भारी दिखाई दे रहा है। आप इस तरह ये भी समझें कि राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा सबसे पहले इस चुनाव में अपने प्रचार को उतरे और उसमें वे काफी आगे निकल गए। उनके प्रतिदंद्धी इसमें काफी पिछड़ गए। वे सत्तापक्ष के उम्मीदवार हैं और इसके चलते मौजूदा सरकार ने भी कईं अहम फैसले लेकर संजीव अरोड़ा के हाथ मजबूत किए। संजीव अरोड़ा व उनका परिवार किसी राजनीतिक ग्राउंड से न होकर एक नामी बिजनेस घराने से संबंधित हैं और अब लुधियाना वेस्ट विधानसभा से अपना राजनीतिक कैरियर शुरु करने जा रहे हैं। संजीव अरोड़ा पहले से समाजिक कार्यों में खुले मन से अपना योगदान देते रहे हैं और पिछले करीब तीन साल वे बतौर राज्यसभा सांसद रहकर लगातार शहर के डेवलपमेंट कार्यों व इंडस्ट्री से जुड़ी मुश्किलों का हल करवाने को सत्ताधारी सरकार और केंद्र सरकार के बीच में पुल का काम करते आए हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से एकाएक उन्हें चुनावी पोलिंग समर में उतारे जाने के बाद उनका बतौर राज्यसभा मेंबर बनकर किए गए कार्यों ने उन्हें मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा किया। इस के बाद उनकी ओर से शुरु की चुनावी कैंपेन में चाहे कोई समुदाय हो या कोई पब्लिक मीटिंग हो, उसमें जाकर पूछना कि कोई काम हैं, तो बताएं के उनके स्टाइल ने उन्हें अपने अन्य प्रतिद्वंदियों से अलग ला खड़ा किया। बड़ी बात है कि उनकी ओर से पब्लिक के बीच खड़ा हो काम पूछना और अगर किसी ने उन्हें अपनी दिक्कत या काम बताया, उस पर तुरंत एक्शन ले उसे करके भी दिखाया।
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भाजपा अभी तक अपने उम्मीदवार को लेकर मंथन में, कांग्रेस व शिअद उम्मीदवार जुटे प्रचार में
जहां आज से लुधियाना वेस्ट विधानसभा चुनाव को लेकर इच्छुक उम्मीदवारों के नामांकन भरने का सिलसिला आरंभ हो जाएगा, तो वहीं दूसरी ओर भाजपा अभी भी अपने उम्मीदवार को लेकर मंथन करने में जुटी है। भाजपा से उम्मीदवारी के लिए बिक्रम सिद्धू, जीवन गुप्ता, राशि अग्रवाल और राकेश कपूर चर्चित नामों में है, लेकिन बीच बीच में ये भी उठता आया है कि पार्टी इस चुनाव को लेकर कुछ नया सोच रही है। लेकिन अब भाजपा की ये देरी यहां से खडे़ होने वाले किसी उम्मीदवार के हक में नहीं, ब्लकि उसके पिछड़ने का का अहम कारण बनती दिख रही है। इसका बड़ा कारण है कि मात्र 20 दिनों में इस मई जून की गर्मी में किसी भी भाजपा उम्मीदवार के लिए पब्लिक के बीच में कैंपेनिंग करना असंभव दिखाई दे रहा है, क्यों कि नाम एलान होने के साथ ही उम्मीदवार के लिए अगले एक सप्ताह अपने नामांकन की तैयारियों में ही निकल जाना है। वहीं इस चुनावी समर की कैंपेन में दूसरा अहम नाम भारत भूषण आशू का लिया जा रहा है, जो इस विधानसभा से चुनाव जीत कैबिनेट मंत्री बनने में कामयाब रहे थे। इस तपती गर्मी में आशू की चुनाव प्रचार मुहिम भी घर से घर चल आ रही हैं, लेकिन उनका अपनी पार्टी के प्रधान और लुधियाना के सांसद राजा वडिंग से अलग थलग पड़ना, उनकी चुनावी मुहिम को कहीं न कहीं बड़ा डेंट डालती दिखाई दी है और इन दो दिग्गज नेताओं की लड़ाई में पार्टी हाईकमान का भी चुप रहना कईं सवाल खडे़ करता दिखाई दे रहा हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल से टिकट हासिल करने वाले सीनियर वकील परोपकार सिंह घुम्मन के लिए भी ये चुनावी समर एकदम से नया हैं। इससे पहले यहां पर पार्टी के सीनियर नेता महेश इंद्र सिंह ग्रेवाल अपना भाग्य अजमाते रहे हैं, लेकिन वे कभी कामयाब नहीं हो पाए। ऐसे लंबे समीकरणों और पार्टी के गिरते ग्राफ के बीच वकील परोपकार सिंह घुम्मन का चुनावी समर भी आसान नहीं दिखाई दे रहा।
Election-Season-In-The-Scorching-Heat-Of-May-June-Aap-Candidate-Sanjeev-Arora-Is-At-The-Forefront-Of-The-Campaign-Bjp-Is-Still-In-Deliberation