यशपाल शर्मा, लुधियाना। जहां एक दिन पहले लुधियाना वेस्ट से कांग्रेस के उम्मीदवार भारत भूषण आशू की ओर से अपने नामांकन समागम से पहले कार रैली निकाल कर अपना मजबूत दावा पेश किया गया, वहीं आज आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार संजीव अरोड़ा की ओर से लोगों की भारी भीड़ के साथ निकले गए रोड शो ने सबको हैरत में डाल दिया। इस रोड शो में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अहम तौर पर शामिल हुए । संजीव अरोड़ा के नामांकन से पहले आरती चौक से लेकर घुमार मंडी चौक तक बड़ा रोड शो आयोजित किया गया। जिसमें आम पब्लिक की भारी भीड़ जुटाई गई और इस रोड शो के जरिए संजीव अरोड़ा ने अपनी ताकत और पब्लिक की किला बंदी का भी अहसास अपने प्रतिद्वंदियों को करवा दिया । बड़ी बात है कि लुधियाना वेस्ट एक दशक के लिए कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी से इसी विधानसभा से चुनाव लड़े गुरप्रीत गोगी ने कांग्रेस के गढ़ को भेद दिया और बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब हुए थे। इसके बाद करीब 4 महीने पहले हुए नगर निगम चुनाव में भी आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन वेस्ट विधानसभा में बेहतरीन देखने को मिला था और कई नए चेहरे आम आदमी पार्टी से काउंसलर चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे। वहीं कांग्रेस के कई दिग्गज जिनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू की पत्नी ममता आशु और कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू के भाई नरेंद्र काला भी चुनाव हार गए थे। इस बार वेस्ट विधानसभा से आम आदमी पार्टी से उतारे गए संजीव अरोड़ा बड़े कारोबारी चेहरे के तौर पर लुधियाना में अपनी पहचान रखते हैं और पिछले करीब 3 साल से बतौर राज्यसभा सांसद उनके कार्यकाल ने भी उनकी राजनीतिक छवि को मजबूत किया है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी की ओर से भी उनकी ईमानदार और साफ सुथरी छवि के चलते उन्हें इस सीट से अपना उम्मीदवार बनाया गया है । पिछले करीब 2 महीने में संजीव अरोड़ा की ओर से किए गए डेवलपमेंट कार्यों और सालों से लटकी पब्लिक डिमांडस को पूरा करने के लिए कई अहम फैसले सरकार स्तर पर करवाने में कामयाबी हसिल की । वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार भारत भूषण आशू इस बार अपनी साफ सुथरी छवि पब्लिक में पेश कर चुनाव मैदान में वोट मांग रहे हैं । लेकिन इस बार आशू के लिए भी अपना राजनीतिक कैरियर बचाने के लिए यह चुनाव जीतना बेहद अहम बना हुआ है । लेकिन पार्टी के बीच में उभरी गुटबाजी कहीं ना कहीं उनकी स्थिति को कमजोर करती दिखाई दी है। जबकि इसी विधानसभा में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की हार जीत में बड़ा रोल अदा करने वाली भारतीय जनता पार्टी अभी तक अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं उतर पाई है। इस स्थिति में भारतीय जनता पार्टी के घोषित उम्मीदवार के लिए जून की गर्मी में चुनाव प्रचार करना आसान नहीं रहेगा । साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार एडवोकेट विक्रम सिद्धू 27000 से अधिक वोट हासिल करने में कामयाब हुए थे। सिद्धू की ओर से इतना बड़ा वोट बैंक साधने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था और जीत आम आदमी पार्टी के खाते में आई थी। जबकि इस बार शिरोमणि अकाली दल की ओर से चुनाव मैदान में भाजपा की तरह एक एडवोकेट को ही मैदान में उतर गया है । जिसके लिए परोपकार सिंह घुम्मन को पार्टी का चेहरा बना चुनावी मैदान में उतारा है। परोपकार सिंह घुम्मन की छवि बेहद साफ रही है लेकिन पार्टी का गिरता ग्राफ उनकी जीत में सबसे बड़ा रोड अटकता दिखाई दे रहा है ।
Election-Fever-Huge-Crowd-Gathered-In-Road-Show-Before-Nomination-Aap-Candidate-Sanjeev-Arora-Showed-His-Strength-To-His-Rivals