यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट एक बार फिर से लाइटों के टेंडर में बड़े गोलमाल को लेकर चर्चा में आया हुआ है। बताया जाता है कि इन टेंडर में मोटी कमीशन का खेल चला और अफसरों ने अपनी जेबें भरने को सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया गया और टेंडर देने में ऐसी शर्त लगा दी गई कि कंपटीशन में कोई कांट्रेक्टर न आ सके। यही कारण हुआ कि इन टेंडर को पूल कर मात्र 2 से 2.5 फीसदी के लेस पर ये टेंडर अलॉट कर दिए गए। इस पूरे घोटाले का खेल octagonal pole लगाने के नाम पर खेला गया। 4 महीने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने लुधियाना शहर में हाई मास्क पोल लाइट का टेंडर 45% लेस पर अलॉट किया था, तो वहीं इस octagonal pole LED light टेंडर मैं अधिकारियों ने अपने स्तर पर एक शर्त लगाकर इस टेंडर को पूल की दलदल में डाल दिया। आपको बता दें कि पंजाब सरकार की क्लियर हिदायत है कि आपातकालीन टेंडर्स को छोड़ निगम व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट अधिकारी अपने स्तर पर कोई शर्त नहीं रख सकते, लेकिन इसके बावजूद रिश्वत के खेल में इस टेंडर पर एक शर्त लगाकर ठेकेदारों के कंपटीशन को खत्म कर दिया गया। और मोटी कमीशन के खेल में यह टेंडर चहेते ठेकेदारों को अलॉट कर दिया गया। बताया जाता है कि इस टेंडर में करीब 10% तक की कमीशन अफसरों में बांटी गई। यानि करीब 3 करोड़ के टेंडर में 25 से 30 लाख की रिश्वत अफसरों की जेबों में डाल दी गई। अब इस पूरे विवाद में एक ठेकेदार की ओर से इन टेंडरों को रद्द करने की मांग की है और कहा कि अगर दोबारा से ये टेंडर लगाए जाते हैं तो इनमें 35 से 45 लैस का मिल सकता है।
जाने, कैसे इस टेंडर में अंजाम दिया गया घोटाले को
लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से बीते जून महीने में लुधियाना के नॉर्थ, सेंट्रल और ईस्ट हल्के में करीब 1 - 1 करोड़ की लागत के तीन टेंडर लगाए गए। तब इन टेंडर में किसी तरह की कोई शर्त नहीं लगाई गई थी। जब तक इन टेंडरों की ट्रस्ट ऑफिसर्स के साथ सेटिंग नहीं हुई तब तक इन टेंडरों को करीब 4 बार एक्सटेंड किया जाता रहा। उसके बाद इन टेंडरों में एक शर्त लागू कर दी गई। जिसके तहत टेंडर डालने वाली कंपनी जहां से भी बिजली का पोल खरीदेगी, उसे कंपनी की इन हाउस लैब टेस्टिंग होने की शर्त रख दी गई । आपको बता दें कि बिजली का पोल बनाने वाली 99 फ़ीसदी कंपनियों के पास इन हाउस लैब की व्यवस्था नहीं रहती, क्योंकि वह जांच के लिए थर्ड पार्टी लैब को प्रमुखता देती है। इसका बड़ा कारण उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी को लेकर कोई अंगुली न उठा सके। वैसे भी पोल बनाने में इस्तेमाल होने वाला स्टील पूरे भारत में टाटा स्टील और जेएसडब्लू स्टील से प्रोवाइड होता है। इस पूरे खेल को अंजाम देने में सुभाष एंड संस की ओर से अहम भूमिका निभाई गई । बताया जाता है कि इस कंपनी की ओर से ही ट्रांसिल कंपनी की ऑथराइजेशन लेटर टेंडर डालने वाली कंपनी को दिलाई गई। आपको हैरानी होगी कि टेंडर डालने वाली सभी ठेकेदारों के पास ट्रेन कंपनी की ही ऑथराइजेशन की लेटर लगाई गई थी ।
बताया जाता है कि सुभाष एंड संस की ओर से ही यह शर्त इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के एसई और एक्सियन के साथ सेटिंग का खेल करते हुए फाइनल करवाई गई । जिसके चलते इस टेंडर को मात्र दो से ढाई परसेंट की लेस पर फाइनल कर दिया गया। बताया जाता है कि इस टेंडर के लिए मनमोहन सिंह एंड कंपनी की ओर से 35 फीसदी से अधिक का लेस डाला गया था लेकिन उसका यह टेंडर इन हाउस लैब का ऑथराइजेशन लेटर न होने के चलते रद्द कर दिया गया। लुधियाना नॉर्थ में बिजली के पोल लगाने का टेंडर एग्लो बिल्डर को दो 2.27 फ़ीसदी के लेस पर अलॉट किया गया इस टेंडर में सुभाष एंड संस की ओर से भी दूसरा टेंडर डाला गया था । जिसमें 2.25 फीसदी लेस की बिड की गई थी। जबकि लुधियाना सेंट्रल में यह बिजली के पोल लगाने का टेंडर एमएस एंटरप्राइजेज को 2.30 फीसदी के लेस पर दिया गया।
इस टेंडर के लिए सेकंड बिड़ सुबोध बातिश ठेकेदार की इस्तेमाल में लाई गई। जिसमें 1.75% का लेस डाला गया था। लुधियाना ईस्ट में यह बिजली के पोल लगाने का टेंडर जितेंद्र कुमार कांट्रेक्टर को दिया गया। जिसकी ओर से 2.39% का लेस डाला गया जबकि इस टेंडर में दूसरा टेंडर सुभाष एंड संस का इस्तेमाल में लाया गया। सुभाष एंड संस ने इस टेंडर के लिए 2.25 फ़ीसदी का लेस डाला था। इस पूरी घोटाले को आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि इन टेंडर में इन हाउस लैब टेस्टिंग का ऑथराइज्ड लेटर ट्रांसिल नाम की कंपनी से सभी ठेकेदारों को प्रोवाइड करवाया गया। जिससे इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया । इन तीनों विधानसभा हलकों में करीब 3 करोड़ की यह लाइट का अलग अलग टेंडर लगाया गया और अगर ट्रस्ट अफसरों ने ये काम ईमानदारी से लगाया होता तो सरकारी खजाने में करीब एक करोड रुपए की बचत की जा सकती थी। इस पूरे घोटाले का मामला सीएम ऑफिस तक भी पहुंच गया है जिसकी एक शिकायत सरकार को की गई है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से एक बार फिर से यह टेंडर अन्य विधानसभा हल्का में लाइटें लगाने को लगाए गए हैं लेकिन इस बार इन टेंडर पर कोई भी शर्त नहीं लगाई गई है और सरकार ने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट अधिकारियों को भी साफ किया गया है कि वह अपने स्तर पर कोई शर्त इन टेंडर पर ना लगाए।
स्टेट विजिलेंस ओर सीवीओ तक मामले की शिकायत
इस मामले को लेकर ठेकेदार मनमोहन सिंह की ओर से स्टेट विजिलेंस, लोकल गवर्नमेंट सेक्रेटरी और स्थानीय निकाय विभाग के सीवीओ के अलावा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन को इसकी शिकायत कर दी गई है।
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