यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना नगर निगम में माननीय सुप्रीम कोर्ट माननीय हाई कोर्ट और सरकार तक के आदेशों तक को नहीं माना जाता। यहां केवल जिसकी लाठी उसी की भैंस के तर्ज पर कर्मचारियों को चार्ज दे दिए जाते हैं। फिर वह आदेश चाहे सुप्रीम कोर्ट का हो या हाई कोर्ट का, उसकी धज्जियां उड़ाने में कोई परवाह नहीं की जाती। इस सब के पीछे मौजूदा नगर निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल सहित उनसे पहले आए निगम कमिश्नर्स की नाकामी साफ साफ झलकती दिखाई दी हैं, जो स्थानीय नेताओं के दवाब में इन आदेशों को धज्जियां उड़ाते चले आ रहे हैं। यह पूरा मामला बिल्डिंग ब्रांच से संबंधित डुप्लीकेट एटीपी बनाए जाने से संबंधित हैं। जहां बिल्डिंग इंस्पेक्टर, हेड ड्राफ्टमैन, ड्राफ्टमैन स्तर के कर्मचारियों को बतौर डुप्लीकेट एटीपी की कुर्सियां थमा दी गई हैं। इतना ही नहीं नेताओं के विधानसभा मुताबिक बिल्डिंग इंस्पेक्टर ब्लॉक दे दिए गए हैं, ये प्रथा आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद ही बनी हैं। मौजूदा सरकार में जोन वाइस एटीपी व बिल्डिंग इंस्पेक्टर का चयन विधायक की रजामंदी से होता चला आ रहा है। नगर निगम में पहले तो एटीपी की कमी थी लेकिन अब यह बहाना भी नहीं है कि इनके पास एटीपी नहीं है। लुधियाना नगर निगम में इस समय तीन पक्के एटीपी है लेकिन उन्हें जोन का चार्ज दिए देने की बजाय साइड़ के काम थमा दिए गए है। मौजूदा समय में लुधियाना के डी जोन को छोड़कर बाकी के तीन जोन में डुप्लीकेट एटीपी कुर्सी संभाले हुए है। सभी निगमों, नगर कौंसिल में सख्ती से इन नियमों की पालना हो इसके लिए लोकल गर्वमेंट के सीवीओ ने दो महीने पहले ही इस संबंधी पत्र भी जारी किया है, लेकिन उनका ये एक्श्न केवल खानापूर्ति मात्र ही साबित हुआ है। लेकिन अब तीन दिन पहले लोकल गर्वमेंट के अंडर सेक्रेटरी की ओर से भी पंजाब भर के निगम कमिश्नर व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सभी चेयरमैनों को पत्र जारी कर तुरंत प्रभाव से अधिकारियों व मुलाजिमों को दिए गए करंट डयूटी चार्ज वापिस लेने को कहा गया है। फिलहाल इस पत्र पर भी कोई एक्शन नहीं हो पाया है।
जोन वाइस बात की जाए तो नगर निगम ए जोन में गुरविंदर सिंह लकी को डुप्लीकेट एटीपी का चार्ज दिया गया है, जबकि इससे पहले वे डुप्लीकेट बिल्डिंग इंस्पेक्टर का चार्ज भी देखते रहे हैं लेकिन नेताओं की शह पर वे एटीपी की कुर्सी संभाले हुए हैं । हैरानी की बात है कि करीब छह साल पहले गुरविंदर सिंह लक्की पंप आपरेटर क्लर्क की पोस्ट पर थे और इस दौरान उनको रिकवरी के लिए जारी G-8 बुक अभी तक गायब बताई जाती हैं। इस पूरे विवाद में वे इंक्वायरी के घेरे में हैं, लेकिन इसके बावजूद वे निगम मुख्यालय कहे जाने वाले जोन ए में एटीपी की कुर्सी तक पहुंच गए हैं। नगर निगम बी जोन में भी हालात कुछ अधिक बेहतर नहीं हैं। यहां पर भी आर्किटेक्ट आस्सिटेंट कपिल देव को डुप्लीकेट एटीपी और बिल्डिंग इंस्पेक्टर कुलजीत सिंह मांगट को कुछ ब्लॉक का डुप्लीकेट एटीपी का चार्ज दिया गया है, वही बात की जाए जोन सी की तो यहां पर बिल्डिंग इंस्पेक्टर नवनीत खोकर को डुप्लीकेट एटीपी बनाया गया है । जबकि यह जोन सबसे बड़ा शहर का इंडस्ट्रियल जोन है और यहां पर बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रियल बिना नक्शे के बनाई जाती है लेकिन इन बिल्डिंग इंस्पेक्टर पर स्थानीय साउथ विधायक राजिंदर कौर छीना का आशीर्वाद प्राप्त है, जबकि खोखर हीरो बेकरी निर्माण में विवादों के घेरे में आए हुए हैं। इस विवाद के बाजवूद एमएलए मैडम के दबाव में निगम कमिश्नर की ओर से बिल्डिंग इंस्पेक्टर को एटीपी का चार्ज दिया गया है। बात करें नगर निगम डी जोन की तो यहां पर बिल्डिंग इंस्पेक्टर से एटीपी प्रमोट हुए हरविंदर सिंह हनी को दो सप्ताह पहले चार्ज दिया गया है हालांकि इससे पहले लंबे समय तक हैड ड्राफ्टमैन मोहन सिंह को डुप्लीकेट एमटीपी का चार्ज दिया गया था और उनके कार्यकाल में जमकर इलीगल बिल्डिंग का निर्माण भी किया गया। यही कारण है की बिल्डिंग ब्रांच की रिकवरी भी पिछले साल के मुकाबले 5 करोड रुपए पीछे चल रही है।
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असली एटीपी साइड़ में, चांदी कूट रहे डुप्लीकेट एटीपी
नगर निगम के पास चार जोन मुताबिक चार असली एटीपी हैं, जिनके पद को सरकार ने मंजूरी दी हुई हैं। जिनमें एटीपी राजकुमार, एटीपी सुनील, एटीपी निरवान व एटीपी रणधीर सिंह शामिल हैं। लेकिन चाराें एटीपी में से किसी को भी जोन को चार्ज नहीं दिया गया। जबकि डुप्लीकेट एटीपी जमकर नाजायज बिल्डिंगें बनवा कर जमकर चांदी कूट रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इल्लीगल निर्माण में लुधियाना शहर पूरे पंजाब में सबसे आगे है, जबकि रिकवरी में इस समय पिछले साल के मुकाबले 5 करोड़ रुपए पीछे बताए जा रहे हैं। आपको बता दें कि जांलधर में सबसे अधिक बिल्डिंग कंपलिशन के केस आते हैं, वहीं लुधियाना में हर महीने सैंकड़ों नाजायज बिल्डिंगें बनती हैं और इनमें नक्शा पास दो दर्जन बिल्डिंग का भी नहीं होता और इसके बाद नक्शा पास बिल्डिंग मालिक भी निगम में बिल्डिंग कंपलीशन तक लेने नहीं आते।
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