यशपाल शर्मा, लुधियाना
भले ही पंजाब की राजनीति में सबसे अहम समझे जाने वाले लोकल गर्वमेंट मंत्री पद का चार्ज लुधियाना से विधायक चुनाव जीत कर कैबिनेट मंत्री बने संजीव अरोड़ा को मिल चुका है, लेकिन इसके बावजूद लुधियाना नगर निगम में तैनात अफसर रिश्वतखोरी पर लगाम नहीं कस पा रही है। नगर निगम में तैनात अफसर रिश्वतखोरी के एवज में टेंडर के नाम पर घालमेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अब ऐसा घालमेल का नया मामला फोकल प्वाइंट 34 एकड़ सकीम में नए पुराने खंभों पर एलईडी लाइटस लगाने व इनकी मेनटेंनेंस के टेंडर में सामने आता दिखाई दिया है। कहते हैं अगर ठेकेदार व अफसर के बीच रिश्वतखोरी से लिप्त फैविकॉल का मजबूत जोड़ लग जाता है तो टेंडर में जरुरी सभी दस्तावेजों के लिए आंख मूंद ली जाती है, वरना दस्तावेजों में कमी के चलते टेंडर को टेक्नीकल बिड़ में बाहर कर दिया जाता है। ऐसा ही घोटाला इस टेंडर में में सामने आया है। बताया जाता है कि सांठगांठ के इस पूरे खेल में ऐसी कंपनी का टेंडर फाइनल कर दिया गया, जो टेंडर की ऑनलाइन सबमिशन की शर्तें तक पूरी नहीं करता था। आपको बता दें कि उक्त ठेका कंपनी ने इसी वर्क से मिलता जुलता काम लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में मात्र दो फीसदी के लैस पर हासिल किया, लेकिन वहीं नगर निगम में यही काम पाने के लिए करीब 25 फीसदी तक लैस डाल दिया। बताया जाता है कि नगर निगम के इस टेंडर में हुए बडे़ घालमेल में एसई प्रवीण सिंगला और एक्सईन लाइट रमण कौशल की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिन्होंने बिना दस्तावेज पूरे किए एग्लो बिल्डर नाम के ठेकेदार का टेंडर काे फाइनांसशियल बिड़ में हरी झंडी दे दी। आज इन टेंडरों की अफसरों की मिलीभुगत से ऐसे घोटाले को इस तरह से अंजाम दिया जाता है कि नगर निगम कमिश्नर तक को इसकी भनक नहीं पड़ती। ई न्यूज पंजाब के हाथ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जिससे साफ पता चलता है कि जाली दस्तावेज तैयार करके केवल कागजी खानापूर्ति पूरा करने को टेंडर के साथ लगाए जा रहे हैं।
जानें, टेंडरों में कैसे हो रही दस्तावेजों के नाम पर बड़ी धांधली
नगर निगम की ओर से फाेकल प्वाइंट में एलईडी लगाने को दो टेंडर लगाए थे, जिनमें एक टेंडर 2 करोड़ रुपए के करीब था और दूसरा टेंडर 1.06 करोड़ की लागत का था। इनमें दो करोड़ रुपए के टेंडर के लिए विवेक इंटरप्राइसिस और एगलो बिल्डर की ओर से टेंडर डाला गया, जबकि 1.06 करोड़ रुपए की लागत वाले टेंडर में विवेक इंटरप्राइसिस, एग्लो बिल्डर के अलावा राजीव इंटरप्राइसिस की टेंडर डाला गया था। लेकिन इन टेंडरों में कुछ शर्तें ऐसी जरुरी थी कि टेंडर की आनलाइन सबमिशन में उसके दस्तावेज लगाना अनिवार्य था और ऐसा न होने पर उक्त टेंडर को टेक्नीकल बिड़ में ही रिजेक्ट करना बनता था। लेकिन सेटिंग के खेल में ऐसा नहीं किया गया और टेंडर की आनलाइन सबमिशन में जरुरी दस्तावेजों का कोरम पूरा किए बिना एग्लो बिल्डर के टेंडर को पहले टेक्नीलक और आज फाइनांसशियल बिड़ में ओके कर दिया गया। इन दोनों टेंडरों की ऑनलाइन सबमिशन में जरुरी दस्तावेजों में बीआईएस सर्टिफिकेट के साथ साथ आईएसओ की Authenticated type test reports from NABL lab से अनिवार्य था, जो नहीं लगाया गया। बताया जाता है कि ये दोनों टेंडर एग्लो बिल्डर को देने के लिए बाद में आफ लाइन ये दस्तावेज ले लिए गए। टेंडर में दस्तावेज केवल खानापूर्ति पूरा करने के लिए लगाए जा रहे हैं, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हो कि इस टेंडर में एग्लो बिल्डर की ओर से आथोराइज्ड़ डीलर के लिए सुभाष एंड संस कांट्रेक्टर का एक्सपायर्ड सर्टिफिकेट लगा दिया गया, जिसकी मियाद 31 मार्च 2025 तक थी। इतना ही नहीं एन्युल टर्नओवर के लिए सीए से लिए जाने वाले दस्तावेजों में भी बड़ा फ्राड सामने आता दिखाई दे रहा है। एक अन्य टेंडर में दो ठेका कंपनी जिनमें एक कांट्रेक्टर जगमोहन कांट्रेक्टर है तो दूसरी ठेका कंपनी सुभाष एंड संस की है की तीन साल की टर्नओवर की फिगर एकदम एक सी दिखाई गई है और इनमें एक पैसे तक का फर्क नहीं है। यानि सरेआम चार्टड अंकाउटेंट से जाली दस्तावेज तैयार कर निगम के टेंडरों में लगाए जा रहे हैं और निगम के एक्सईन व एसई स्तर के अफसर मोटी कमीशन के चक्कर में आंखें मूंद कर ऐसे दस्तावेजों को हरी झंडी दिए जा रहे हैं।
Major-Scam-Is-Being-Planned-In-The-Led-Lights-Tender-Of-Ludhiana-Mc-The-Technical-Bid-Has-Been-Given-The-Green-Light-Without-Completing-The-Necessary-Documentation