नगर निगम कमिश्नर संदीप ऋषि की ओर से लुधियाना में इल्लीगल बिल्डिंग निर्माण को रोकने व ब्रांच को सुचारु ढंग से चलाने के लिए दो बीएंडआर एसई को एमटीपी ( नॉन टेक्नीकल ) का जिम्मा तो साैंप दिया गया है, लेकिन इससे आम जनता की समस्याएं कम होने की बजाय ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। सुनने में तो ये भी आ रहा है कि एक नॉन टेक्नीकल एमटीपी तो रिहायशी प्लान के लिए भी रिश्वत मांग रहा हैं और दोनों के कंप्यूटर से कार्मशियल नक्शे की मंजूरी तभी मिलती है, जब इनके साथ मोटी सेटिंग हो जाती है और अगर ये सेटिंग नहीं होती तो महीनों ये फाइल अटकी रहती है। इसके लिए या तो मोटी सिफारिश चलती है या फिर सीधे सीधे लाखों में सेटिंग के बाद ही इस प्लान को मंजूरी मिलती है। यही कारण है कि आम पब्लिक नगर निगम से कार्मशियल नक्शा पास करवाने की बजाय इसे अवैध बनाने में ही सहूलियत समझ रहे हैं। असल में बिल्डिंग ब्रांच में नक्शा पास और चालान अस्समेंट में सभी को ईजी मनी जरुर दिखाई देती है, लेकिन ये ईजी मनी आगे चलकर मुश्किलें भी लेकर आती हैं। ओरीसन हास्पिटल को दी गई मंजूरी मामले में एसई संजय कंवर की विजिलेंस जांच शुरु हाे चुकी है और खुद डीजीपी विजिलेंस की ओर से इस जांच में टीम बनाकर मौका भी चैक किया जा चुका है। संजय कंवर निगम कमिश्नर संदीप संदीप ऋषि के सबसे चहेतें अफसरों में हैं। इल्लीगल बिल्डिंग बनाने में सहूलियत ही ग्राउंड पर उतरने वाले एटीपी, बिल्डिंग इंस्पेक्टर व सेवादारों के लिए बड़ी कमाई का सौदा बन गया है और नगर निगम को इससे हर महीने करोड़ों का चूना लग रहा है। ऐसा नहीं कि नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच का स्टाफ इल्लीगल बिल्डिंग जब शुरुआती दौर में होती है, उस तक नहीं पहुंचता। लेकिन ये स्टाफ निगम का खजाना भरने की बजाय अपनी जेब की सेटिंग कर अवैध निर्माण को मंजूरी दे देता है। बड़ी बात है कि रिहायशी नक्शे को एमटीपी तक के पास मंजूरी को क्यों भेजा जा रहा है, जबकि इस नक्शे को एटीपी अपने लेबल तक पास कर सकता है। इन नॉन टेक्नीकल एमटीपीज के कारनामें हम आपको दो उदाहरण के जरिए समझाने की कोशिश करेंगे। लुधियाना जैसे शहर में एक नहीं दाे टेक्नीकल एमटीपी की जरुरत है, जिसे लुधियाना के जनप्रतिनिधियों व निगम कमिश्नर की ओर से पंजाब सरकार के पास कोई आवाज नहीं उठाई जा रही। यही कारण है कि लुधियाना नियमों को ताक में रखकर बनता चला जा रहा है।
केस नंबर- 1
ओरीसन हास्पिटल में सीलिंग की तैयारी में निगम, एकाएक हो गई सेटिंग
करीब डेढ़ दो महीने पहले साउथ सिटी में ओरीसन हास्पिटल को नगर निगम की ओर से सील करने के लिए नोटिस तक चस्पा कर दिया गया था, लेकिन एकाएक ये पूरा विवाद ठप हो गया। असल में इस हास्पिटल के निर्माण में बिल्डिंग बॉयलाज की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। लेकिन निगम की सीलिंग के पहले डी जोन का जिम्मा संभाल रहे नॉन टेक्नीकल एमटीपी संजय कंवर की ओर से ऐसा कारनामा कर दिया गया कि इससे आप भी हैरान होंगे। ये हास्पिटल पार्किंग के बॉयलाज को पूरा नहीं करता था, लेकिन इसकी कंपाउडिंग करने में नियमों की धज्जियां उड़ा दी गई। नियमों को ताक में रखकर किसी पड़ोसी के प्लाट को (लीज पर) पार्किंग यूज के लिए दिखा ओरीसन हास्पिटल की कंपाउडिंग कर दी गई, जो बॉयलाज के तहत संभव नहीं है। ये पूरा मामला पंजाब के चीफ सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल पहुंचने के बाद उनकी ओर से इस पूरे मामले को डीजीपी विजिलेंस पंजाब के पास इंक्वायरी को भेजा दिया गया। जिस पर डीजीपी विजिलेंस की ओर से अपनी टीमें भी साइट पर भेज पूरी ग्राउंड रिपोर्ट जुटाई जा रही है।
केस नंबर-2
नॉन टेक्नीकल एमटीपीज के चलते बड़ी गड़बडियों की भी आशंका
नगर निगम कमिश्नर की ओर से बिल्डिंग ब्रांच का जिम्मा नॉन टैक्नीकल एमटीपीज को दिये जाने से प्लान मंजूरी में भी बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। ईजी मनी के चक्कर में रिहायशी जोन में इंडस्ट्रियल और इंडस्ट्रियल जोन में कामशिर्यल नक्शे पास किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर सदर्न बाइपास का एरिया इंडस्ट्रियल जोन में आता है और यहां पर नियमों को ताक में रख व ईजी मनी पाने को कार्मशियल नक्शे को मंजूरी दे दी गई, जो कभी संभव ही नहीं हैं। ऐसे ही कुछ अन्य मामले भी हैं ,जहां रिहायशी जोन में इंडस्ट्रियल नक्शा पास कर दिया गया।
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अफसरों की रिश्वतखोरी की कमजोरी के चलते नेता हुए हावी
वहीं इस बारे में जब भाजपा के प्रवक्ता परमिंदर मेहता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि लुधियाना नगर निगम पंजाब की सबसे बड़ी कारपोरेशन हैं और यहां पर टेक्नीकल एमटीपी की जरुरत है। जिन
नॉन टेक्नीलक अफसरो को बिल्डिंग ब्रांच का जिम्मा दिया गया उनके मुंह में तो पहले ही बीएंडआर ब्रांच में मिलने वाली मोटी कमीशन का खून मुंह में लगा हुआ है। आज तक किसी भी अफसर ने रिहायशी
नक्शों के लिए रिश्वत नहीं मांगी, लेकिन इन अफसरों ने तो हद कर दी है। अफसरों की रिश्वतखोरी की कमजोरी से नेता निगम में हावी हो गए हैं और निगम की आमदन की पैसा अब नेताओं के घरो में जा रहा है।
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वहीं इस बारे में जब एमटीपी (नॉन टेक्नीकल) संजय कंवर से उनके मोबाइल नंबर 9988817330 पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने मोबाइल उठाने तक की जहमत तक नहीं की।
Non-Technical-Mtp-Exploits-In-The-Corporation-Violation-Of-Bylaws-In-The-Hospital-Compounding-Vigilance-Investigation-Begins