लुधियाना में ग्लाड़ा के तहत आती दश्हरा मेले की साइटों का आबंटन विवादों में आता दिखाई दे रहा है। गौर हो कि तीन दिन पहले ग्लाड़ा में चंडीगढ़ रोड व दुगरी की मेला साइटस की बोली रखी थी। बताया जाता है कि इस बोली से पहले पूरी सेटिंग का खेल खेला गया था, लेकिन बाद में पूल की गई इस बोली में शामिल होने वाले बिड़र को बांटे गए लाखों के कैश के खेल ने पूरे प्लान पर पानी फेर दिया। इस पूरे प्रकरण में ग्लाड़ा अफसरों की भी पोल खुलकर सामने आई हैं। ये अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हो कि इन दो साइटस के लिए ग्लाड़ा को जहां पिछले साल करीब 1.36 करोड़ रुपए का रेवेन्यू आया था, लेकिन ठेकेदारों की ओर से पूल की गई इस बोली को मात्र 36 लाख में सिरे चढ़ा दिया गया। और बोली के तुरंत बाद उससे फुल एंड फाइनल अमाउंट भी जमा करवा ली गई थी। बडे़ घोटाले की आशंका से इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले साल सरकार को आए रेवेन्यू में से पूरे एक करोड़ कम की राशि में आखिर ये टेंडर कैसे फाइनल कर लिया गया। जब ग्लाड़ा ने नंबर 1 बिड़र अजय मेहता से पूरी राशि जमा करवा दी और ये तय हो गया कि दोनों साइटों अजय मेहता को मिल गई हैं और इसी के चलते पूल की गई इस बोली में बैठने वाले बिड़र को मौके पर ही लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया। बस यहीं इस पूल के पूरे खेल पर पानी फिर गया और एक नेता के फोन के बाद ग्लाड़ा के सीए संदीप ऋषि ने ये बोली रदद कर दी। अब सवाल ये भी है कि ऐसे अफसरों पर क्यों कार्रवाई नहीं कि जिन्होंने ग्लाड़ा को इतना बड़ा रेवेन्यू लॉस करने में अपनी सहमति दी थी।
जानिए किस तरह ग्लाड़ा को लग रहा था एक करोड़ का चूना
ग्लाड़ा की ओर से इस बार चंडीगढ़ रोड पर वर्धमान मिल के सामने पड़ी साइट व दुगरी मेला साइट के लिए 27 हजार रुपए प्रति दिन रिजर्व प्राइस रखा था। पिछले साल चंडीगढ़ रोड की मेला साइट के प्रति दिन 5.51 लाख रुपए की बोली दी गई और वहीं दुगरी साइट के लिए 1.25 लाख रुपए रोजाना के लिहाज से बोली दी गई थी। जिस लिहाज ग्लाड़ा को 20 दिन के इस मेले के एवज में करीब 1.36 करोड़ रुपए रेवेन्यू आया। नियमों के लिहाज से ग्लाड़ा अफसरों को इस बोली में रिजर्व प्राइस पिछले साल दी गई उच्चतम बोली के लिहाज से तय करने की बजाय मात्र 27 हजार रुपए रख दिया। इतनी कम रिजर्व राशि रखना अपने आप में बड़ी सेटिंग की ओर इशारा है। इस बार वर्धमान मिल के सामने की साइट के लिए 1.25 लाख रुपए प्रति दिन और दुगरी साइट के लिए 55 हजार रुपए प्रतिदिन की फाइनल बोली दी गई। बड़ी बात है कि ग्लाड़ा जब ऐसी बोली करवाती है तो उनके पास पिछले साल में आए रेवेन्यू का पूरा लेखा जोखा होता है, लेकिन इसके बावजूद इतनी कम बोली पर किन किन अफसरों ने अपनी हाम्मी भरते हुए इस बोली को मंजूरी दे दी, उन पर एक्शन लिया जाना बनता है। बताया जाता है कि चंडीगढ़ रोड़ साइट के लिए कुल 11 बिड़र ने ड्राफट दिया था और दुगरी के लिए 4 बिड़र ने आवेदन किया था। लेकिन सूत्र बताते हैं कि इन सभी बिड़र के बीच पहले से पूल कर लिया गया था और इसी के चलते मौके पर अधिक बोली नहीं दी गई। जब ग्लाड़ा ने बोली फाइनल कर पूरी राशि जमा करवा दी तो मौके पर ही लाखों रुपए जो की कैश में 40 लाख से अधिक बताया जा रहा है, मौके पर ही अन्य बिड़र को बांट दिया गया।
अब पूरा मामला हाईकोर्ट पहुंचने की बातें आ रही सामने
लाखों रुपए के इस लेनदेन में ग्लाड़ा के सीए संदीप ऋषि की ओर से ये बोली रदद कर दी गई, लेकिन अब कांट्रेक्टरों के पास भी ये कानूनी दांवपेच हाथ लग गया है कि कम रेवेन्यू आने पर मौके पर ये बोली रदद क्यों नहीं की गई और जब फाइनल बिड़र की बोली मानते हुए फुल एंड फाइनल राशि जमा करवा ली तो बाद में ये बोली कैसे रदद की जा सकती है। ये एक ऐसा बड़ा प्वाइंट है, जिसमें ग्लाड़ा की बड़ी लापरवाही व अफसरों की सेटिंंग सामने आती दिखाई दे रही है।
Exclusive-There-Was-A-Plan-To-Defraud-Glada-Of-Rs-1-Crore-In-The-Allotment-Of-Fair-Site-With-The-Connivance-Of-The-Officers