आर्थिक संकट से जूझ रही पंजाब सरकार की अब ऐसे विभागों पर नजर है, जिनके खातों में मोटी रकम जमा है और अब ऐसे विभागों का भी भरा खजाना पंजाब सरकार खाली करने की तैयारी में है। गौर हो की पंजाब सरकार की ओर से आर्थिक संकट से निकलने को पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी की जा चुकी है और वही 7 किलो वॉट से अधिक के रिहायशी बिजली कनेक्शन धारकों को दी जा रही ₹3 प्रति यूनिट की छूट को भी खत्म कर दिया है। इसके साथ-साथ पंजाब सरकार ने केंद्र से भी उनके कर्ज सीमा में 10000 करोड रुपए की बढ़ोतरी की मांग रखी है। इसके लिए वित्त मंत्रालय ने केंद्र को लैटर भी लिखा है। जिसमें लिखा है कि सरकार अधिक कर्ज उठाकर अपने खर्चों की पूर्ति करना चाहती है। इस वित्तीय साल में पंजाब की कर्ज लेने की सीमा 30,464 करोड़ रुपए है। जिसमें से जुलाई में पंजाब सरकार ने केंद्र से 13,094 करोड़ रुपए का कर्ज उठा लिया है। इसके अलावा सरकार ने वित्तीय साल में 10 हजार करोड़ कर्ज सीमा की और जरूरत है। सबसे पहले ग्लाडा और गामड़ा पर नजर। मालदार विभागों से फंड जुटाने की तैयारी में पंजाब सरकार की सबसे पहले नजर ग्लाड़ा और गमाड़ा पर है। सूत्र बताते हैं कि लुधियाना ग्रेटर एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (ग्लाड़ा) से 100 करोड़ और गमाडा से 1000 करोड रुपए मंगवाने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। बड़ी बात है कि मोहाली और लुधियाना में बड़े स्तर पर कई रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट पिछले कुछ महीनो में बड़ी तेजी से डेवलप होने शुरू हुए हैं और ऐसे प्रोजेक्टो को पास करवाने में इन विभागों में मोटी राशि जमा हुई है। जिस लिहाज से पंजाब सरकार की आर्थिक हालत पतली होती दिखाई दे रही है, उससे एक बात साफ है कि पंजाब सरकार आने वाले कुछ महीनो में सरकारी प्रॉपर्टीज की भी नीलामी कर सकती है। पंजाब सरकार के लिए सबसे बड़ी आफत इस बात की है कि जिस लिहाज से पंजाब सरकार के खर्चों में बढ़ोतरी हो रही है, उस लिहाज से आमदन के आंकड़े नहीं बढ़ पा रहे हैं। यही कारण है कि पंजाब सरकार आर्थिक कर्ज की दलदल में तेजी से फंसती चली जा रही है।
The-Punjab-Government-Which-Is-Facing-Financial-Crisis-Now-Has-Its-Eyes-On-The-Treasury-Filled-Departments