माडल टाउन में गुज्जरांखाना रोड़ पर मात्र ढाई साल में बन कर तैयार हुई आठ मंजिला बिल्डिंग को लेकर हाईकोर्ट में चल रहे विवाद में अब नया मोड़ सामने आ गया है। हाईकोर्ट ने उक्त बिल्डिंग को लुधियाना नगर निगम कमिश्नर को तलब कर लिया है और साथ ही तीन बेसमेंट व इसके ऊपर बनी पांच मंजिला बिल्डिंग में अब किसी तरह का कोई निर्माण न हो इसके लिए लुधियाना निगम कमिश्नर व पुलिस कमिश्नर लुधियाना की जिम्मेदारी फिक्स कर दी है। इस बिल्डिंग का निर्माण शुरु से ही विवादों में रहा है और इस बिल्डिंग को लेकर पड़ोसियों की ओर से लगातार शिकायतें की जा रही थी। लेकिन नगर निगम अफसरों का कहना था कि इस बिल्डिंग का सीएलयू प्लान मंजूर है और नियमों के तहत ये बिल्डिंग बन रही है। लेकिन अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। बड़ी बात है कि माडल टाउन की इस सड़क को नगर निगम कामशिर्यल बताकर यहां बिल्डिंग मालिकों को सीएलयू प्लान बांटता चला जा रहा है, जबकि इस रिहायशी एरिया की इस 60 फुटी सड़क को कामशिर्यल करने संबंधी पंजाब सरकार की ओर से नोटिफिकेशन के बिना ही ये पूरा खेल पिछले करीब पांच साल से चलता आ रहा है। यही कारण है कि जब ये पूरा मामला हाईकोर्ट के ध्यान में आया तो उसकी ओर से उक्त बिल्डिंग का काम बंद करने को कह दिया गया है। हैरानी की बात है कि जहां एक ओर ये पूरा मामला कोर्ट में हैं, तो वहीं दूसरी ओर बिल्डिंग मालिकों की ओर से निगम अफसरों से सेटिंग कर कंपाउडिंग फीस भरकर इसका कंपलिशन सर्टिफिकेट तक हासिल किया जा चुका है। इस बिल्डिंग के निर्माण को तीन रिहायशी प्लॉट 220 L , 221 L और 221 R नंबर के रिहायशी प्लॉट पहले खरीदे गए और इसके बाद इन्हें जोड़कर एक कामर्शियल नक्शे का आवेदन निगम में किया गया था। जिसकी मंजूरी के बाद ये काम शुरु हुआ। लेकिन इस बिल्डिंग को बनाने से पहले 40 फुट तक की खुदाई की गई, जिसके चलते आसपास के मकान मालिकों ने उनकी बिल्डिंग में दरारें आने शिकायत निगम को की। निगम में सुनवाई न होने पर ये लोग हाईकोर्ट मूव कर गए थे। बड़ी बात है कि इस पूरे मामले में भाजपा नेता अमरजीत सिंह टिक्का ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से विजिलेंस जांच करवाने की मांग की है और कहा कि इस पूरे गड़बड़झाले में जिम्मेदार अफसरों व आला अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बिना नोटिफिकेशन के पिछले चार सालों में यहां कईं रिहायशी प्रॉपर्टीज का मोटा पैसा जेब में डाल लेकर सीएलयू कर दिया गया।
जानें कैसे खड़ा हुआ ये पूरा विवाद
नगर निगम की ओर से 25 सितंबर 2017 को माडल टाउन स्कीम में अमेंडमेंट को रेज्यूलेशन नंबर 372 पास कर लोकल गर्वमेंट को भेजा गया। इस प्रस्ताव में गुलाटी चौक से दुगरी रोड़ तक की सड़क व प्लॉट नंबर 274 से 342 और प्लॉट नंबर 215 से 501 तक के रिहायशी प्लाटों को कामशिर्यल इस्तेमाल की मंजूरी मांगी। इस प्रस्ताव में मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के सीएलयू के लिए 80 फुटी सड़क का होना अनिवार्य बताया गया। लेकिन बाद में सरकार ने 8 फरवरी 2018 को इस प्रस्ताव में एक प्वाइंट उठाया गया कि माडल टाउन की इस सड़क की चौड़ाई मात्र 60 फुट है और इसके लिए नगर निगम कमिश्नर से ग्राउंड रिपोर्ट और उक्त सड़क का स्टेटस मांगा गया। लेकिन इसका कोई जबाव नहीं भेजा गया। जबकि नगर निगम का कहना था कि जब सरकार ने उनका रेज्यूलेशन असैप्ट कर लिया है तो अब इस सड़क के नोटिफिकेशन की कोई जरुरत नहीं हैं। अब सरकार व निगम के बीच हुई इसी गड़बड़ी ने कईयों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को हैं, जिसमें नगर निगम कमिश्नर को वीड़ियों कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट कार्रवाई में पेश होने काे कहा गया है।
Clu-Given-For-Building-Commercial-Building-In-Model-Town-Residential-Scheme-Without-Notification-High-Court-Stops-Construction-Mc-Summoned