इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) के जालंधर कार्यायलर की ओर से मैसर्स व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसिज लिमिटेड व अन्य (M/s Vuenow Marketing Services Ltd. and others) के खिलाफ मनी लाड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत उक्त कंपनी की करीब 178.12 करोड़ रुपए कीमत की 6 अचल संपतियों सहित 73 बैंक खातों व 26 लग्जरी वाहनों को कुर्क कर लिया है। पीएमएलए एक्ट के तहत 6 फरवरी 2025 को ये अंतरित कुर्की आदेश जारी किए गए थे, जिसके तहत ये एक्शन लिया गया है। ईडी ने गौतमबुद्ध नोएड़ा उत्तरप्रदेश थाने की ओर बीएनएस 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआरआई के तहत अपनी जांच शुरु की थी । ईडी की जांच में पता चला है कि मैसर्स व्यूनाउ मार्केटिंग ने अन्य समूह संस्थाओं के साथ मिलकर विभिन्न निवेशकों को क्लाउड पार्टिक्लस बेचने और उन पार्टिक्लस को वापस पर पटटे पर देने (एसएलबी मॉडल) की आड़ में उनका पैसा निवेश् करने के लिए प्रेरित किया और उच्च किराये के रिटर्न का भी वायदा किया, जबकि इसके लिए उनके पास कोई पर्याप्त बुनायदी ढांचा तक नहीं था। इसके बाद आपराधिक गतिविधियों से उत्पन्न अपराध की आय (पीओसी) का उपयोग व्यवायसायिक उद्देश्यों को पूरा करने व अन्य कार्यों के लिए किया गया। इसके लिए मेसर्स वीएमएसएल और अन्य और समूह की कंपनियों के जरिए लग्जरी वाहनों की खरदी व फर्जी शैल कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपए की धनराशि को रुट करके प्रॉपर्टी में निवेश किया गया। उल्लेखनीय है कि व्यूनाउ समूह के प्रमुख व्यक्तियों जिनमें कंपनी के सीईओ सुखविंदर सिंह करोर को इस जांच में शामिल होने के लिए कईं मौके दिए गए, लेकिन वे इसमें शामिल नहीं हुए और अपने हजारों निवेशकों को मझधार में अकेला छोड़ दिया गया है। गौर हो कि ईडी की ओर से 26 नवंबर 2024 और 17 जनवरी 2025 को पीएमएलए एक्ट के तहत कईं जगहों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया था।
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