नई दिल्ली। हरियाणा के सोनीपत में 20 रुपए के नकली सिक्के बनाने का दावा किया गया है। उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने मामले में गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी सहारनपुर में भी फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने सहारनपुर से ही इन्हें गिरफ्तार किया। सहारनपुर पुलिस के मुताबिक, गिरोह का सरगना पंजाब में जीरकपुर निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है। वह 2001 से इस काम में लगा हुआ था। उपकार ने सोनीपत की बड़ी इंडस्ट्री एरिया में मशीन और डाई की मदद से नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री लगा रखी थी। यहां रोजाना 12 हजार सिक्के तैयार करने की क्षमता थी। इन सिक्कों को छोटे दुकानदारों के अलावा सरकारी शराब ठेकों और टोल टैक्स पर चलाने का दावा किया गया है। आरोपियों ने करीब 6 महीने में 70 करोड़ रुपए से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में चलाने की बात कही है। हालांकि, सोनीपत पुलिस का कहना है कि उन्हें सहारनपुर पुलिस इस कार्रवाई का नहीं पता। यह फैक्ट्री कहां चल रही थी इसकी भी जानकारी नहीं है। आरोपियों को सहारनपुर से ही गिरफ्तार किया गया था।
25 साल से सिक्के बनाने के काम में था सरगना
सहारनपुर SSP अभिनंदन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह शुरुआत में सुनार का काम करता था और चांदी के सिक्के बनाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई, जिनके संपर्क में आने के बाद उसने नकली सिक्के बनाने का काम शुरू कर दिया। इस काम में मुनाफा होने के बाद उसने धीरे-धीरे अपना नेटवर्क तैयार किया और दूसरे लोगों को भी इसमें शामिल कर लिया। उपकार पहले जेल भी जा चुका है। तिहाड़ जेल समेत अन्य जेलों में रहने के दौरान उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई थी। बाद में ये लोग उसके नेटवर्क का हिस्सा बने।
सोनीपत में रोजाना 10-12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता
पुलिस जांच के अनुसार गिरोह ने सोनीपत की बड़ी इंडस्ट्री एरिया में नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री लगा रखी थी। यहां मशीनों और डाई की मदद से 20 रुपए के नकली सिक्के तैयार किए जाते थे। फैक्ट्री में रोजाना करीब 10 से 12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता बताई गई है। सिक्कों की फिनिशिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था, जिससे पहली नजर में उनकी पहचान करना मुश्किल बताया गया है।
छोटे दुकानदारों से शराब ठेकों और टोल तक सप्लाई
SSP के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि तैयार नकली सिक्कों को छोटे दुकानदारों के अलावा सरकारी शराब ठेकों और टोल टैक्स पर चलाया जाता था। पुलिस अब यह पता कर रही है कि सिक्कों की सप्लाई किन लोगों के जरिए अलग-अलग राज्यों में की जाती थी और इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं। पूछताछ में करीब 6 महीने में 70 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत के नकली सिक्के बाजार में चलाने का दावा किया है।
सहारनपुर में नई फैक्ट्री लगाने की तैयारी
पुलिस के मुताबिक, नकली सिक्कों की मांग बढ़ने के बाद गिरोह सोनीपत के अलावा सहारनपुर में भी फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए जमीन और अन्य व्यवस्थाओं की तलाश की जा रही थी। नई फैक्ट्री शुरू होने से पहले ही पुलिस ने गिरोह का खुलासा कर दिया। अब जांच टीम यह पता कर रही है कि सहारनपुर में फैक्ट्री लगाने की योजना में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके लिए किन लोगों से संपर्क किया गया था।