एक तरफ जहां 27 अक्टूबर को लुधियाना ईस्ट विधायक संजय तलवाड़ के प्रयासों से पंजाब के कालोनाइजर्स की सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के साथ मीटिंग तय हुई है, वहीं दूसरे ओर हाउसिंग एंड अर्बन डेवलमपेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी सर्वजीत सिंह ने इल्लीगल कालोनियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश सभी जिलों के चीफ एडमिनस्ट्रेटर व अर्बन डेवलपमेंट के एडीसी को जारी कर दिए हैं। ये कापी सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नर को भी भेजी गई है। बड़ी बात है कि बीते दिनों जहां पंजाब कालोनाइजर्स एंड प्राॅपर्टी डीलर्स एसोसिएशन ने चंडीगढ़ रोड पर एक प्रेसवार्ता कर पंजाब सरकार को चेताया था कि वे अगर एक सप्ताह में रजिस्ट्री के लिए जरुरी की गई एनओसी की शर्त को वापिस नहीं लेते तो वे अपने कारोबार बंद कर अपने आफिसों की चाबी पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपेंगे, लेकिन उसके बाद सरकार की ओर से किसी तरह की राहत का फैसला तो नहीं आया, लेकिन अब इल्लीगल कालोनियों पर डंडा चलाने के आदेश जरुर सरकार की ओर से जारी कर दिए गए हैं। इन आदेशों में साफ किया गया है कि सभी सीए व एडीसी अर्बन डेवलपमेंट अपने अपने एरिया का सर्वें कर इस रिपोर्ट तैयार कर टाइम बाउंड समय में इल्लीगल कालोनियों पर कार्रवाई करेंगे। इसके साथ साथ हर सप्ताह की वीकली रिपोर्ट डायरेक्टर हाउसिंग एंड अर्बन डेवलमपेंट को करेंगे। इस आदेश में साफ किया गया है कि एक महीने के भीतर ये पूरा एक्शन लिया जाएगा और किसी भी हिस्से में कोई भी इल्लीगल कालोनी पर कार्रवाई न छोडे़ जाने की बात कही गई है। ------- कालोनाइजर्स के लिए बढ़ सकती हैं दिक्कतें बात करें इल्लीगल कालोनियों की तो इन्हें लेकर कालोनाइजर्स की दिक्कतें बढ़ सकती हैं, क्यों कि कालोनाइजर ये मान कर चल रहे हैं कि गलाड़ा केवल 2018 के बाद बनी इल्लीगल कालोनियों को तोड़ने की कार्रवाई करेगा, लेकिन अगर इल्लीगल कालोनियों को लेकर पिछले पांच छह सालों में जो नोटिफिकेशन जारी हुई हैं, उनके तहत साल 2005 से बनती आ रही इल्लीगल कालोनियां भी सरकार की कार्रवाई के दायरे में आ सकती है। इसका कारण है कि सरकार की ओर से आई कंपाउडिंग पालिसी के तहत इनमें कितनी कालोनियों के एक्सर्टनल डेवलपमेंट फीस जमा की गई है। कालोनाईजनर अभी तक केवल कार्रवाई से बचने को व इल्लीगल कालोनियों को बेच किनारे होने के लिए केवल एप्लीकेशन फीस व प्रोसेसिंग फीस ही गलाड़ा को जमा करवाते रहे हैं। इन पिछले सालों में सैंकड़ों ऐसी कालोनियां हैं, जिनकी प्रोसेसिंग फीस लेने के बाद उनके मालिक इन्हे अप्रूव करवाने को आगे नहीं आए और ये सभी कालोनियां इल्लीगल करार दे दी गई। कालोनाइजर केवल इस बात के जरिए बचने की कोशिश में हैं, क्यों कि ऐसी 40 फीसदी कालोनियों में पब्लिक अपने रैन बसरे डाल चुकी हैं और इसके चलते कालोनाइजर इस बात की राहत महसूस करते हैं कि अब इन पर सरकारी डंडा नहीं चलेगा। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये इल्लीगल कालोनियां सरकार के पीले पंजे के दायरे में नहीं हैं।
Meeting With The Cm On The Side Of The Colonizer On The Other Hand A Decree Issued For Action On Illegal Colonies