यशपाल शर्मा, लुधियाना पंजाब डायर्स एसोसिएशन (पीडीए) की ओर से ताजपुर रोड पर लगाए जा रहे कॉमन एफयूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर बार बार अड़ाए जा रहे पेच में एक बार फिर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पीडीए को बड़ी राहत दे दी है। एनजीटी ने पीडीए पर सीईटीपी डिस्चार्ज के लिए कनाल बनाने की शर्त को हटा दिया है और अन्य सीइटीपी की तरह ही इस पर भी शर्तें लागू करने का आदेश दे दिया है। पीपीसीबी की ओर से सीईटीपी की ग्रांट राशि जारी करने से पहले पीडीए के पदाधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा था कि वे सीईटीपी से निकलने वाले डिस्चार्ज को किसान अपने खेतों में इस्तेमाल कर सकें, उसके लिए कारोबारी अपने खर्च पर एक कनाल बनाने का एफिडेविट साइन करके दें। इसके लिए पीपीसीबी की ओर से केंद्र सरकार की मिनिस्ट्री आफ इंवायरमेंट, फोरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज की ओर से इस बारे में लगाई शर्त का हवाला देते हुए ग्रांट देने में आनाकानी की जा रही थी। गौर हो कि इसी फाइनांशियल ईयर के लिए जहां पंजाब सरकार ने 1.5 करोड़ रुपए व केंद्र सरकार ने 3 करोड़ रुपए बैंक के एस्को अकाउंट में ट्रांसफर किया हुआ है। जब इस ग्रांट को लेने के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर रही कंपनी का बिल पीपीसीबी को दिया गया तो वे पीडीए पर पहले कनाल बनाने संबंधी एफिडेविट पर साइन करने का दबाव बनाने लगे, जिस पर पीडीए राजी नहीं हुई और बीते सप्ताह ही पीडीए ने इस संबंधी दोबारा से एनजीटी का दरवाजा खटखटाया तो एक सप्ताह के भीतर ही एनजीटी ने एमओईएफ को इस शर्त हो हटाने संंबंधी आदेश जारी करते हुए ग्रांट जारी करने को कह दिया है। पीडीए ने एनजीटी में पीपीसीबी के पूर्व मेंबर सेक्रेटरी ने तब इस डिस्चार्ज के लिए खुद प्रबंध करने की बात कही थी, का हवाला साथ में दिया था। गौर हो कि एक ओर से जहां पीपीसीबी 31 मार्च 2020 से पहले पीडीए व डाइंग कारोबारियों पर दबाव बना रही है, वहीं दूसरी ओर से यही डिपार्टमेंट सीईटीपी के लिए ग्रांट जारी करने में नई नई शर्ताें का ब्यौरा रखकर इस प्रोजेक्ट के काम को रोक कर बैठा हुआ है। पीडीए के महासचिव बॉवी जिंदल ने कहा कि हम तो पंजाब सरकार व केंद्र से ग्रांट लेने के लिए ही बार बार कोर्ट में धक्के खा रहे हैं और इससे प्रोजेक्ट में ओर देरी होना संभव है। फंड के आभाव में कारोबारी अपनी जेब से इस प्रोजेक्ट को शुरु नहीं कर पाएंगे।
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