ई न्यूज पंजाब, लुधियाना अभी भारतीय साइकिल उद्योग ग्लोबल कंपीटिशन को तैयार नहीं हो पाया। जहां चाइना साल भर में 17 करोड़ साइकिल बेच रहा है, वहीं उसके मुकाबले में भारत मात्र 1.70 करोड़ साइकिल ही बेच पा रहा है। ऐसे में अगर चाइना को भारत में रीजनल कंपरीहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरईसीपी) के जरिए फ्री ट्रेड की इजाजत दे दी गई तो पंजाब की साइकिल इंडस्ट्री पूरी तरह से तबाह हो जाएगी। इस अहम मुददे पर शहर की पूरी साइकिल, आटो पार्टस व मशीन टूल्स इंडस्ट्री बुधवार को एक साथ दिखाई दी और कहा कि इस योजना के खिलाफ इंडस्ट्री पूरी तरह से हल्ला बोलने की तैयारी में है। इस संबंध में साइकिल इंडस्ट्री के विभिन्न संगठनों की एक संयुक्त बैठक गिल रोड स्थित यूनाइटेड साइकिल एंड पार्टस मैन्यूफेक्चर्स एसोसिएशन (यूसीपीएमए) कार्यालय में हुई। जिसमें इंडिया साइकिल मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन, फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीयल एंव कमर्शियल आर्गेनाइजेशन, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीयल एंव कमर्शियल अंडरटेकिंग, इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट एसोसिएशन एंव बराडो शामिल हुए। कारोबारियों ने इस दौरान कहा कि चीन जोकि अब तक साफता के माध्यम से भारत में अपने उत्पाद भेज रहा था, अब इसका सदस्य होने के नाते सीधे भारत में अपने उत्पाद बिक्री कर सकेगा। इस दौरान उद्यमियों ने इस नए बदलाव को लेकर मंथन किया। इस दौरान उद्यमियों ने कहा कि चीन में मास प्रोडक्शन के चलते भारी मात्रा में साइकिल का स्टाक पड़ा है। इस समय कंपलीट साइकिल पर 30 और पार्टस पर 20 प्रतिशत डयूटी है। अगर इस समझौते में साइकिल को भी रखा गया, तो भारत का साइकिल उद्योग बर्बादी की ओर चला जाएगा। उपस्थिति को संबोधित करते हुए यूसीपीएमए प्रधान डीएस चावला ने कहा कि इस नए समझौते में 6 नए देश चीन, जापान, इंडिया, साउथ कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल किए गए हैं। अब ट्रेड एग्रीमेंट में 16 देश एक साथ हो जाएंगे। ऐसे में भारत में सबसे ज्यादा नुक्सान साइकिल इंडस्ट्री को होगा। हम सरकार से अपील कर रहें हैं कि अब भारतीय साइकिल उद्योग ग्लोबल कंपीटिशन को तैयार नहीं है। इसकी मुख्य वजह चीन की मास प्रोडक्शन और वहां रूका हुआ भारी स्टाक है। भारत और चीन का बिक्री का दस गुणा का अंतर है। भारत एक करोड़ 70 लाख साइकिल बेच रहा है, जबकि चीन 17 करोड़ साइकिल बेच रहा है। अमेरिका और चीन में ट्रेड वार से साइकिल का डंप भारतीय मार्केट में चीन करेगा। इस समय चीन साफता के माध्यम से भारत मैटीरियल भेजता है, क्योंकि चीन पर भारत एक्सपोर्ट पर कंपलीट साइकिल पर तीस और पार्टस पर बीस प्रतिशत डयूटी है। ऐसे में अब सीधे फ्री ट्रेड होने से चीन भारत की मार्केट में घरेलू ब्रांड खत्म कर देगा। हीरो साइकिल के वाइस चेयरमैन एसके राय ने कहा कि यह दौर बेहद कठिन है। सरकार को भारतीय उद्योग को बचाने के लिए अहम कदम उठाने होंगे। उपकार सिंह आहुजा ने कहा कि सीआईसीयू एक साल से इस मुद्दे पर सरकार को लिख रहा है। इस फैसले से न केवल साइकिल बल्कि भारत के आटो पार्टस, मशीन टूल सहित एमएसएमई इंडस्ट्री को नुक्सान होगा। इस फैसले के लिए भारतीय उद्योग अभी तैयार नहीं हैं। केके सेठ ने कहा कि अमेरीका चीन झगड़े का नुक्सान भारत को हो सकता है। उद्यमियों ने बताया कि इस फैसले पर विचार के लिए सभी एसोसिएशन की ओर से संयुक्त रुप से पीएमओ कार्यालय को लिखा गया है और सारी इंडस्ट्री एक साथ मिलकर इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ेगी। इस दौरान डीएस चावला, एसके राय, केके सेठ, रजिंदर जिंदल, , गुरमीत कुलार, गुरचरण सिंह जैमको, सतनाम सिह मक्कड़, मनजिंदर सिंह सचदेवा, उपकार सिंह आहुजा, प्रवीण गुप्ता, रजिंदर सिंह सरहाली सहित भारी संख्या में उद्यमी मौजूद थे।
Save Indian Bicycle Industry from the Clutches of RCEP